देश के परिवहन और ईंधन क्षेत्र में एक नया विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि E20 जनता पार्टी ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। यह नई पार्टी नीट पेपर लीक मामले में सक्रिय रही कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की राह पर चल रही है और जिस तरह सीजेपी के आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था, उसी से प्रेरित होकर अब E20 जनता पार्टी ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग की है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प दिलाना है।
आंदोलन की शुरुआत और सीजेपी का प्रभाव
E20 जनता पार्टी का गठन हाल ही में हुआ है और इसने सोशल मीडिया पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। रविवार को इस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महज कुछ ही घंटों के भीतर 25000 से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए। यह पार्टी उन लोगों का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रही है जो सरकार की इथेनॉल सम्मिश्रण नीति से असंतुष्ट हैं। सीजेपी द्वारा शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ किए गए सफल विरोध प्रदर्शनों ने इस नई पार्टी को ऊर्जा दी है, जिसके कारण अब वे परिवहन मंत्रालय को निशाने पर ले रहे हैं और नीतिगत बदलाव की मांग कर रहे हैं।
4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान
इस अभियान को ट्रांसपोर्ट सेक्टर का भी भारी समर्थन मिल रहा है। दिल्ली टैक्सी और टूरिस्ट एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए 4 अगस्त को संसद की ओर मार्च निकालने का ऐलान किया है। एसोसिएशन का कहना है कि वे E20 पेट्रोल के अनिवार्य उपयोग के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे। ट्रांसपोर्टर्स का मानना है कि सरकार की मौजूदा नीतियां वाहन मालिकों के हितों के खिलाफ हैं और इसी विरोध के स्वरूप वे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं ताकि इस नीति पर पुनर्विचार किया जा सके।
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़ी समस्याएं
एसोसिएशन और E20 जनता पार्टी ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से होने वाले नुकसानों की एक लंबी सूची पेश की है। उनका आरोप है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के कारण गाड़ियों की माइलेज में भारी गिरावट आई है। इसके अलावा, वाहनों की मरम्मत और रखरखाव का खर्च भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। सबसे गंभीर चिंता इंजन की खराबी को लेकर है, विशेष रूप से पुरानी गाड़ियों में इथेनॉल वाला पेट्रोल इंजन को नुकसान पहुंचा रहा है। इन तकनीकी समस्याओं के कारण वाहन मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पार्टी की मुख्य मांगें और स्पष्टीकरण
E20 जनता पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे न तो सरकार से किसी प्रकार की सब्सिडी मांग रहे हैं और न ही मुफ्त पेट्रोल की उनकी कोई इच्छा है। वे यह भी नहीं चाहते कि इथेनॉल वाले पेट्रोल की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाए। उनकी एकमात्र और प्रमुख मांग यह है कि पेट्रोल पंपों पर लोगों को 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए। पार्टी का कहना है कि उपभोक्ताओं को यह चुनने का अधिकार होना चाहिए कि वे अपनी गाड़ी में कौन सा ईंधन डालना चाहते हैं, ताकि वे अपने वाहन की लंबी उम्र सुनिश्चित कर सकें।
पारदर्शिता और स्वतंत्र अध्ययन की आवश्यकता
ईंधन की गुणवत्ता को लेकर पार्टी ने पारदर्शी फ्यूल लेबलिंग की भी मांग की है ताकि ग्राहकों को पता चल सके कि वे जो ईंधन खरीद रहे हैं उसमें कितना मिश्रण है। इसके साथ ही, फ्यूल ब्लेंड्स की लागत, उनके फायदों और वाहनों पर पड़ने वाले असर से जुड़ा डेटा सार्वजनिक करने की मांग की गई है। पार्टी चाहती है कि माइलेज, इंजन परफॉर्मेंस, उत्सर्जन और मेंटेनेंस कॉस्ट पर स्वतंत्र अध्ययन कराए जाएं ताकि जनता के सामने सही तथ्य आ सकें और वे वैज्ञानिक आधार पर निर्णय ले सकें।
बाजार की स्थिति और सरकारी पक्ष
वर्तमान में भारत में इथेनॉल मुक्त 100-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल उपलब्ध तो है, लेकिन यह केवल कुछ चुनिंदा फ्यूल स्टेशनों पर ही मिलता है। इसकी कीमत भी काफी अधिक है, जो 169 रुपये प्रति लीटर तक जाती है। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली में स्टैंडर्ड E20 फ्यूल की कीमत 102 रुपये 12 पैसे प्रति लीटर है। इस पूरे मामले पर सरकार का रुख अलग है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने पिछले हफ्ते संसद में जानकारी दी थी कि सरकार को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ने की कोई बड़े पैमाने पर या पुख्ता शिकायतें प्राप्त नहीं हुई हैं और सरकार के इस बयान और जमीनी स्तर पर हो रहे विरोध के बीच अब 4 अगस्त का मार्च काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
