सर्वदलीय बैठक में हंगामा: बागी TMC सांसदों की मौजूदगी पर विपक्ष का वॉकआउट

संसद के मॉनसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने बागी टीएमसी सांसदों को आमंत्रित किए जाने के विरोध में वॉकआउट किया। कांग्रेस, सपा और आप जैसे दलों ने इसे असंवैधानिक बताया, हालांकि बाद में वे बैठक में शामिल हो गए।

संसद के मॉनसून सत्र के औपचारिक आगाज से ठीक पहले रविवार को दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी में आयोजित सर्वदलीय बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सदन से बाहर जाने का फैसला किया। इस वॉकआउट में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (यूबीटी) के नेता शामिल थे। विपक्ष का यह कड़ा विरोध तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उन 20 बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर था, जिन्हें सरकार ने बैठक में आमंत्रित किया था।

विवाद की मुख्य वजह और विपक्षी तर्क

पूरे विवाद की जड़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को बैठक में बुलाना और उन्हें एक अलग गुट के रूप में मान्यता देना है। ये बागी सांसद अब NCPI नाम के दल का हिस्सा बन चुके हैं। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में अभी भी टीएमसी के सांसदों की संख्या 28 दिखाई गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है, तो उन्हें किस आधार पर आमंत्रित किया गया? मोइत्रा ने यह भी याद दिलाया कि इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की 20 याचिकाएं अभी भी लंबित हैं और 91वें संविधान संशोधन के बाद किसी अलग गुट को मान्यता देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं बचा है।

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना

बैठक से बाहर निकलने के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर संविधान की अवहेलना और लोकतंत्र की हत्या का गंभीर आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा के लिए यह वॉकआउट किया है। उन्होंने कहा कि सांसदों की स्थिति पर अंतिम फैसला लिए बिना उन्हें अलग गुट के रूप में आमंत्रित करना पूरी तरह से असंवैधानिक है और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी तीखे सवाल पूछे और कहा कि बागी सांसदों को दी गई संबद्धता कानून की किस किताब में लिखी है। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद एनडी गुप्ता ने अपने दल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके मामले में भी राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों को 'हाईजैक' कर लिया गया है और याचिका लंबित होने के बावजूद उन्हें अलग सीटें दे दी गईं, जो लोकतंत्र की सरेआम हत्या है।

बागी गुट का पक्ष और सरकार का रुख

दूसरी तरफ, NCPI में शामिल हुई टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार भी इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचीं। वहां केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू और अर्जुन राम मेघवाल ने उनका स्वागत किया। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा 20 बागी सांसदों को अलग सीट आवंटित किए जाने के फैसले पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि वे देश और अपने राज्य के विकास के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी 20 सदस्य चाहते हैं कि उनके निर्वाचन क्षेत्र का विकास सही तरीके से हो। उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले खतरे में थे और अब उन्होंने मान्यता के लिए आवेदन किया है और मांगे गए सभी दस्तावेज जमा कर रहे हैं।

सांकेतिक विरोध के बाद बैठक में वापसी

शुरुआती तीखे विरोध और वॉकआउट के बाद विपक्षी दलों के नेता वापस सर्वदलीय बैठक में शामिल हो गए। विपक्षी नेताओं का कहना था कि उनका वॉकआउट सरकार की मनमानी के खिलाफ एक 'सांकेतिक विरोध' था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने और जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए बैठक का हिस्सा बने रहेंगे, ताकि मॉनसून सत्र के दौरान जनहित के विषयों पर चर्चा की जा सके।