ममता बनर्जी को झटका: ईडी ने टीएमसी के 3 बैंक खाते किए फ्रीज

प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है जिनमें 440 करोड़ रुपये जमा हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है जिसमें निजी विमानों और हेलीकॉप्टरों की खरीद में संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े 3 बैंक खातों को फ्रीज करने का बड़ा कदम उठाया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि इन खातों में 440 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि जमा है। केंद्रीय एजेंसी की यह कार्रवाई पार्टी के फंड से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा है।

ईडी की कार्रवाई और कोलकाता में छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की सख्त धाराओं के तहत की है। एजेंसी का मुख्य ध्यान उन संदिग्ध लेनदेन पर है जो कथित तौर पर इन पार्टी खातों के माध्यम से किए गए थे। जांच के सिलसिले में ईडी के अधिकारियों ने कोलकाता में 5 अलग-अलग स्थानों पर व्यापक छापेमारी की। इस तलाशी अभियान का उद्देश्य बड़ी मात्रा में धन की आवाजाही और चार्टर्ड विमानों पर किए गए खर्च से संबंधित दस्तावेजों और सबूतों को इकट्ठा करना था।

छापेमारी के दौरान जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उनमें केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज के परिसर भी शामिल थे। इसकी एक इकाई केयरवेल एविएशन निजी जेट विमानों को किराए पर देने के व्यवसाय में है। एजेंसी इस राजनीतिक दल और विमानन समूह के बीच के संबंधों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि उनके बीच हुए वित्तीय लेनदेन की प्रकृति को समझा जा सके।

वित्तीय विसंगतियां और विमानों की खरीद

ईडी की शुरुआती जांच में वित्तीय लेनदेन का एक जटिल जाल सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी इकाइयों को भेजे गए थे। इसके बाद एक और महत्वपूर्ण लेनदेन हुआ जिसमें इसी अवधि के दौरान कंपनी के खातों से 82 करोड़ 96 लाख रुपये एक नई बनी कंपनी के खाते में स्थानांतरित किए गए।

जांच में आगे यह बात सामने आई है कि इन भारी भरकम फंडों में से 112 करोड़ रुपये का उपयोग विशेष रूप से महंगे विमानों की खरीद के लिए किया गया था। इसमें एक एम्ब्रेयर लिगेसी 600 कॉर्पोरेट जेट और एक अगस्ता वेस्टलैंड 109एसपी हेलीकॉप्टर शामिल है। ईडी ने पाया है कि इन खरीदों के लिए धन का स्रोत सीधे तौर पर टीएमसी के बैंक खातों से जुड़ा था और इसके अलावा यह भी आरोप हैं कि हेलीकॉप्टर की खरीद में विदेशों से प्राप्त धन का भी उपयोग किया गया था जिससे इस जांच में एक नया मोड़ आ गया है।

संदिग्ध लेनदेन और मुखौटा कंपनियों का संदेह

प्रवर्तन निदेशालय ने इन लेनदेन की प्रकृति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एजेंसी का मानना है कि विमानों के उपयोग और किराए के नाम पर जिस बड़ी राशि का आदान-प्रदान किया गया वह काफी संदेहास्पद है। इस बात का गहरा संदेह है कि इन सौदों को एक मुखौटा बनाने के लिए तैयार किया गया था ताकि लेनदेन के वास्तविक लाभार्थियों को छिपाया जा सके। ईडी वर्तमान में इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन उच्च-मूल्य वाली खरीद और हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए शेल कंपनियों या फ्रंट संगठनों का उपयोग किया गया था।

रिपोर्टों के अनुसार विमानों को खरीदने के बाद उन्हें वापस टीएमसी को ही किराए पर दे दिया गया था जिसे एजेंसी धन के प्रवाह को वैध बनाने के एक संभावित तरीके के रूप में देख रही है। जांच अब उन व्यक्तियों की पहचान करने पर केंद्रित है जिन्हें अंततः इन व्यवस्थाओं से लाभ हुआ और क्या वित्तीय नियमों को जानबूझकर दरकिनार करने का कोई प्रयास किया गया था।

मामले की शुरुआत और कानूनी लड़ाई

यह मामला तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह के बाद प्रकाश में आया। पार्टी के बागी विधायकों ने पार्टी के कोष में जमा पैसे के स्रोत पर सवाल उठाए और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की मांग की। इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कोलकाता पुलिस ने शुरुआत में टीएमसी के 3 विशिष्ट बैंक खातों से वित्तीय लेनदेन और निकासी पर रोक लगा दी थी।

स्थानीय पुलिस के इस कदम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनौती दी और प्रतिबंधों के खिलाफ राहत पाने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हालांकि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय के प्रवेश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है जिससे पार्टी का वित्तीय प्रबंधन केंद्रीय जांच एजेंसी की सीधी निगरानी में आ गया है। 440 करोड़ रुपये का फ्रीज होना इस कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।