अभिषेक बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें: पुलिस ने तोड़ा घर का ताला, सीआईडी ने भेजा समन

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है क्योंकि पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के घर का ताला तोड़कर तलाशी ली और सीआईडी ने उन्हें हेट स्पीच और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है। ताजा घटनाक्रम में बंगाल पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बड़ी दबिश दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने घर के मुख्य गेट का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और करीब 5 घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे की गिरफ्तारी अब तय है।

पीए सुमित रॉय की तलाश और भ्रष्टाचार के आरोप

पुलिस की इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी और उनके निजी सचिव (पीए) सुमित रॉय को तलाशना था। सुमित रॉय को अभिषेक बनर्जी का सबसे बड़ा राजदार माना जाता है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव के दौरान टिकट दिलाने के नाम पर भारी वसूली की थी और सूत्रों के अनुसार, सुमित रॉय की मोबाइल टावर लोकेशन कालीघाट में अभिषेक बनर्जी के घर के पास मिली थी। इसी सूचना के आधार पर शालबनी पुलिस और कोलकाता पुलिस की टीम सुबह करीब 4 बजे वहां पहुंची। बार-बार दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो पुलिस ने ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। हालांकि, लंबी तलाशी के बाद भी सुमित रॉय वहां नहीं मिले और पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।

जमीन भ्रष्टाचार और वित्तीय लेन-देन का मामला

सुमित रॉय के खिलाफ जांच तब शुरू हुई जब पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी पुलिस ने टीएमसी के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को जमीन भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया। सुजॉय हाजरा से पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि उन्होंने अभिषेक बनर्जी के पीए सुमित रॉय को एक बड़ी धनराशि ट्रांसफर की थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस पिछले 3 से 4 दिनों से सुमित रॉय की तलाश कर रही है। माना जा रहा है कि सुमित रॉय की गिरफ्तारी से अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं क्योंकि उनके पास कई महत्वपूर्ण राज दफन हो सकते हैं।

सीआईडी का शिकंजा और हेट स्पीच का नोटिस

अभिषेक बनर्जी पर केवल पुलिस की छापेमारी ही नहीं, बल्कि सीआईडी का शिकंजा भी कसता जा रहा है। सीआईडी ने उन्हें दो अलग-अलग मामलों में नोटिस जारी किया है और पहला मामला फर्जी हस्ताक्षर से जुड़ा है, जिसमें उन्हें 14 जून को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। दूसरा मामला चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके कथित भड़काऊ बयान (डीजे वाले बयान) से संबंधित है और इस मामले में सीआईडी ने उन्हें 16 जून को भवानी भवन में पेश होने का निर्देश दिया है। यह एफआईआर चुनाव आयोग के आदेश पर दर्ज की गई थी, जिसके बाद सीआईडी ने अपनी जांच तेज कर दी है।

अभिषेक बनर्जी का पलटवार और ममता बनर्जी की सक्रियता

लगातार मिल रहे नोटिसों से अभिषेक बनर्जी काफी आक्रोशित नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि जब उन्होंने यह बयान दिया था, तब राज्य की कानून-व्यवस्था चुनाव आयोग के हाथ में थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उनका बयान गलत था, तो चुनाव आयोग ने उसी समय कार्रवाई क्यों नहीं की। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधा और गृहमंत्री अमित शाह के बयानों का जिक्र करते हुए पूछा कि उन पर एफआईआर क्यों नहीं हुई। इस बीच, पुलिस की छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सुबह 4 बजे अभिषेक के घर पहुंचीं और उनसे काफी देर तक बातचीत की, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।

रिजु दत्ता का बड़ा दावा और भविष्य की आशंकाएं

इस पूरे विवाद के बीच टीएमसी से निलंबित नेता रिजु दत्ता ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि अभिषेक बनर्जी का जेल जाना अब तय है और उन्हें कोई नहीं बचा सकता। रिजु दत्ता के अनुसार, अभिषेक बनर्जी का नाम गौ तस्करी और कोयला तस्करी जैसे गंभीर मामलों में भी शामिल है और इन आरोपों और सीआईडी की सक्रियता ने बंगाल की राजनीति में यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या आने वाले दिनों में अभिषेक बनर्जी को सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा। फिलहाल, 14 और 16 जून की तारीखें अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।