बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने का साहसिक फैसला किया है। शेख हसीना के खिलाफ वर्तमान में बांग्लादेश में 150 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं और उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है। इन तमाम खतरों और फांसी के फंदे के डर के बावजूद हसीना ने 2026 के अंत तक ढाका लौटने की तैयारी कर ली है। उनका यह फैसला बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में एक नई हलचल पैदा कर सकता है।
निर्वासन और कानूनी चुनौतियों का सिलसिला
शेख हसीना का तख्तापलट जुलाई 2024 के विद्रोह के बाद हुआ था, जिसके बाद उन्हें एक विशेष विमान के जरिए नई दिल्ली लाया गया था। तब से वह भारत की राजधानी में ही रह रही हैं। उनके जाने के बाद बांग्लादेश में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई। वर्तमान में उन पर 150 से अधिक मामले चल रहे हैं और 10 मामलों में उन्हें पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है। इसी साल बांग्लादेश की एक अदालत ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में फांसी की सजा सुनाई है। ऐसे में उनका वापस लौटना उनके जीवन के लिए एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है।
मौत के साये में वापसी का संकल्प
समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए शेख हसीना ने अपनी वापसी को लेकर बेहद स्पष्ट और निडर रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वह जानती हैं कि वहां उनके लिए फांसी की तैयारी की जा रही है, लेकिन वह फिर भी जाएंगी। हसीना ने भावुक होते हुए कहा कि उनके अपने लोग उन्हें बुला रहे हैं और वह अपने देशवासियों की पुकार को अनसुना नहीं कर सकतीं। उनका यह बयान उनके समर्थकों के बीच एक नया उत्साह भरने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विरासत और छवि को बचाने की कोशिश
शेख हसीना के लौटने के पीछे एक बड़ा कारण उनकी राजनीतिक विरासत और छवि है और वह बांग्लादेश के संस्थापक की बेटी हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की राजनीति को समर्पित किया है। वह अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं और चाहती हैं कि उनका आखिरी समय उनके अपने मुल्क में बीते। इसके साथ ही वह उस छवि को भी खत्म करना चाहती हैं कि वह संकट के समय देश छोड़कर भागने वाली नेता हैं। वह अपनी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करना चाहती हैं जो अंत तक अपने देश के लिए खड़ा रहा।
मजबूत जनाधार और जनता का समर्थन
भले ही शेख हसीना देश से बाहर हों, लेकिन बांग्लादेश में उनका जनाधार अब भी काफी मजबूत नजर आता है। दिसंबर 2024 में किए गए एक सर्वे के अनुसार, 57 प्रतिशत लोगों का मानना है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र के लिए शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग का होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, फरवरी 2026 के प्रथम आलो सर्वे के मुताबिक, 25 प्रतिशत लोगों ने आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने के विचार का खुलकर विरोध किया है। ये आंकड़े बताते हैं कि जनता का एक बड़ा हिस्सा अब भी हसीना और उनकी पार्टी के साथ खड़ा है।
धर्मनिरपेक्षता बनाम कट्टरपंथ की लड़ाई
शेख हसीना की छवि हमेशा से एक धर्मनिरपेक्ष नेता की रही है और शहरी इलाकों में उनकी लोकप्रियता काफी अधिक है और उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में कट्टरपंथी जमात के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। हाल के दिनों में बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों का प्रभाव और उनके द्वारा किए जाने वाले जुल्म बढ़ने की खबरें आई हैं। आवामी लीग लगातार इस मुद्दे को उठा रही है और हसीना की वापसी को कट्टरपंथ के खिलाफ एक मजबूत ढाल के रूप में पेश कर रही है।
वर्तमान सरकार की विफलताओं पर निशाना
हसीना के जाने के बाद बनी अंतरिम सरकार ने संविधान में संशोधन किए और चुनाव कराए, जिसमें बीएनपी की जीत हुई। हालांकि, सत्ता में आने के बाद तारिक रहमान की सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने उन संशोधनों को सही तरीके से लागू नहीं किया और शासन पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। इसने आवामी लीग को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। हसीना वापस लौटकर यह साबित करना चाहती हैं कि उनके द्वारा किए गए कार्य और नीतियां गलत नहीं थीं।
आवामी लीग के अस्तित्व का संकट
शेख हसीना की अनुपस्थिति में उनकी पार्टी आवामी लीग धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है। पार्टी के भीतर यह डर है कि अगर हसीना जल्द वापस नहीं लौटीं, तो पार्टी पूरी तरह बिखर सकती है। तारिक रहमान की सरकार नए कानून लाने की तैयारी में है जिससे आवामी लीग का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। हसीना की कोशिश है कि इससे पहले कि पार्टी पूरी तरह खत्म हो जाए, वह वापस लौटकर एक बड़ा जन आंदोलन शुरू करें और अपनी पार्टी को फिर से जीवित करें।
आर्थिक मंदी और उद्योगों की बदहाली
आवामी लीग के नेताओं का दावा है कि शेख हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश के विकास की रफ्तार पूरी तरह थम गई है। विदेशी निवेशक अब बांग्लादेश आने से कतरा रहे हैं। पिछले 2 साल में देश में 1 टका का भी नया निवेश नहीं हुआ है। भारत के साथ संबंधों में आई खटास के कारण बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, पूरी तरह ठप होने की कगार पर है। हसीना की वापसी को इन आर्थिक समस्याओं के समाधान के रूप में भी देखा जा रहा है।
