ममता बनर्जी का बीजेपी को अल्टीमेटम: जरूरत पड़ी तो इंटरनेशनल कोर्ट जाने की दी चेतावनी

ममता बनर्जी ने बीजेपी को कड़ी चेतावनी देते हुए 14000 केसों के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट जाने का संकेत दिया है। तृणमूल छात्र परिषद के मंच से उन्होंने छात्रों से सड़कों पर उतरने और जेल जाने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है जब ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सीधी और कड़ी चेतावनी दी है। तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने अपनी पार्टी के खिलाफ हो रही कानूनी कार्रवाइयों पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने 14000 केसों का विशेष रूप से जिक्र किया और संकेत दिया कि यदि उन्हें देश की अदालतों से न्याय मिलने में बाधा आती है, तो वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (इंटरनेशनल कोर्ट) का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं हटेंगी। ममता बनर्जी का यह बयान उनके कड़े रुख को दर्शाता है और यह साफ करता है कि वह बीजेपी के खिलाफ अपनी लड़ाई को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

14000 केसों पर पलटवार और कानूनी चुनौती

ममता बनर्जी ने मंच से स्पष्ट संदेश दिया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को मुकदमों के जरिए दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर 14000 केस दर्ज किए गए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी इन मामलों को सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह खुद भी इस कानूनी लड़ाई में उतरेंगी। ममता बनर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इंटरनेशनल कोर्ट भी जाएंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में सरकार और गिरफ्तारी करने वाले लोग बेनकाब होंगे और उनका कहना था कि वह यह देखना चाहती हैं कि यह सिलसिला कब तक चलता है और वह हर स्तर पर इसका मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।

छात्रों और युवाओं से सड़कों पर उतरने की अपील

तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस के इस मंच का उपयोग ममता बनर्जी ने युवाओं को सक्रिय करने के लिए किया। उन्होंने छात्रों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध करना चाहिए। उन्होंने एक बेहद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि युवाओं को जेल जाने से भी नहीं डरना चाहिए। ममता बनर्जी ने कहा कि एक महीने तक जेल का खाना खाना मंजूर है, लेकिन बीजेपी का खाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका यह आह्वान पार्टी की युवा शक्ति को एकजुट करने और उन्हें भविष्य के राजनीतिक संघर्षों के लिए तैयार करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

पुलिस अनुमति और प्रशासनिक बाधाओं पर नाराजगी

कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी ने पुलिस और प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 21 जुलाई के बाद से ही स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर खींचतान चल रही थी और अंततः बिरला तारामंडल के सामने मीटिंग करने की अनुमति मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने गद्दारों की रैली के लिए सुबह 9 बजे से उनके घर के आसपास की सभी सड़कें बंद कर दी थीं, जबकि उनके कार्यक्रम स्थल के पास से गाड़ियों को गुजरने दिया जा रहा था जिससे जनता को परेशानी हो रही थी। उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया कि एम्बुलेंस के लिए रास्ता बनाने में सहायता करें और अपने कार्यकर्ताओं से भी पुलिस के साथ सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई दुर्घटना होती है, तो प्रशासन उसे संभालने की जिम्मेदारी नहीं ले पाएगा।

लोकतांत्रिक आंदोलन और भविष्य की रणनीति

ममता बनर्जी ने घोषणा की कि वह जल्द ही विभिन्न जिलों का दौरा शुरू करेंगी। उन्होंने बार-बार कोर्ट से अनुमति लेने की प्रक्रिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि इससे कोर्ट का कीमती समय बर्बाद हो रहा है। उन्होंने पुलिस को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में उन्हें जुलूस या मीटिंग के लिए पुलिस से अनुमति नहीं मिली, तो वह सीधे जनता से अनुमति लेंगी और सड़कों पर उतरेंगी। उन्होंने इसे एक लोकतांत्रिक आंदोलन करार दिया और कहा कि वह जनता के बीच जाकर अपनी बात रखेंगी। ममता बनर्जी के इस रुख से साफ है कि वह आने वाले समय में अपने राजनीतिक अभियान को और अधिक आक्रामक बनाने वाली हैं और किसी भी प्रशासनिक बाधा को अपने रास्ते में नहीं आने देंगी।