मणिपुर के अशांत माहौल में हिंसा की एक और दुखद घटना सामने आई है, जहां शनिवार शाम को अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने एक 53 वर्षीय स्थानीय किसान की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान हाओलाल सिंग्सिट के रूप में हुई है, जो कांगपोकपी जिले के गोवनजांग गांव के निवासी थे। यह हमला उस समय हुआ जब वह अपने खेत में धान की कटाई कर रहे थे। इस घटना ने क्षेत्र में पहले से ही व्याप्त तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।
घटना का विस्तृत विवरण
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह वारदात शनिवार शाम करीब 5 बजकर 30 मिनट पर हुई। घटना स्थल चालवाह पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाला गोवनजांग गांव है, जो इम्फाल-तामेंगलोंग (आईटी) रोड पर स्थित है और हमले के वक्त हाओलाल सिंग्सिट अपनी पत्नी के साथ खेत में धान की कटाई के काम में व्यस्त थे। अचानक आए हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। हमले के दौरान उनकी पत्नी किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहीं, लेकिन हाओलाल को कई गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और शव को अपने कब्जे में लिया। शव को पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताओं के लिए कांगपोकपी जिला अस्पताल पहुंचाया गया है। संबंधित पुलिस स्टेशन में इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस जघन्य अपराध के पीछे किन लोगों का हाथ है। दोषियों की धरपकड़ के लिए पुलिस और सुरक्षा बल लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।
मई से जारी जातीय तनाव का इतिहास
इस क्षेत्र में तनाव की शुरुआत 13 मई को हुई थी, जब दो अलग-अलग हमलों में चार लोगों की जान चली गई थी। इन मृतकों में तीन चर्च लीडर और एक नागा समुदाय का व्यक्ति शामिल था। इस घटना के बाद जातीय संघर्ष और तेज हो गया। इसके जवाब में कुकी-ज़ो गुट ने कांगपोकपी जिले के लीलोन वाइफेई से 20 नागा लोगों का अपहरण कर लिया। इसके प्रतिशोध में नागा गुटों ने भी सेनापति जिले में 28 कुकी लोगों को बंधक बना लिया था।
तनाव कम करने के प्रयासों के तहत 15 मई को दोनों पक्षों ने 14-14 लोगों को रिहा किया। इसके बाद 9 जून को नागा गुट ने कुकी गुट के पास बंधक बने बाकी 6 नागा लोगों की रिहाई के बदले 14 और कुकी बंधकों को छोड़ दिया। हालांकि, स्थिति तब और बिगड़ गई जब 10 जून को लीलोन वाइफेई के पास कांगपोकपी जिले के खराम वाइफेई में उन 6 नागा लोगों के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था।
आर्थिक नाकेबंदी और सुरक्षा स्थिति
6 नागा लोगों की हत्या के बाद से नागा नागरिक संगठनों ने राज्य की जीवन रेखा माने जाने वाले नेशनल हाईवे-2 (इम्फाल-दीमापुर) और नेशनल हाईवे-37 (जिरीबाम के रास्ते इम्फाल-सिलचर) पर अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। दूसरी ओर, कुकी संगठन भी इस नाकेबंदी को हटाने की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन हत्याओं की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) कर रही है। एनआईए ने मणिपुर पुलिस और सीआरपीएफ के सहयोग से इस मामले में शामिल एक दंपति को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
मुख्यमंत्री का दौरा और कार्रवाई का आश्वासन
शनिवार को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने स्थिति का जायजा लेने के लिए मैतेई और नागा विधायकों के साथ माखन गांव का दौरा किया। उन्होंने वहां प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने बताया कि पीड़ितों ने इस घटना में कथित तौर पर शामिल 5 लोगों की पहचान की है। उनके द्वारा बताए गए नामों के आधार पर पुलिस ने 2 संदिग्धों को पहले ही हिरासत में ले लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बाकी बचे संदिग्धों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करना सरकार और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की प्राथमिकता है और इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
