मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ लंबी बातचीत के बाद अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया है। यह सफलता तब मिली जब सरकार के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे को 12 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा, जिसमें समुदाय की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन दिया गया है। सरकारी टीम का नेतृत्व कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने किया। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में शनिवार सुबह से भूख हड़ताल पर बैठे जरांगे ने शनिवार देर रात सरकार के लिखित प्रस्ताव पर भरोसा जताते हुए अपना आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया।
12 सूत्रीय प्रस्ताव और कुनबी प्रमाणपत्र पर सहमति
अनशन खत्म करने के बाद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए मनोज जरांगे ने बताया कि राज्य सरकार 58 लाख पहले से चिन्हित कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने के लिए सहमत हो गई है। यह निर्णय मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जरांगे ने स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित किया जाएगा और इस पूरी प्रक्रिया के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभागीय आयुक्त कार्यालय को सौंपी गई है। जरांगे ने यह भी मांग की कि जिन मामलों में वैध रिकॉर्ड मौजूद हैं, वहां प्रमाणपत्र जारी करने में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
आर्थिक सहायता और प्रशासनिक सुधारों का वादा
सरकार द्वारा सौंपे गए प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले प्रदर्शनकारियों के परिवारों को 15 दिनों के भीतर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, सरकार 15 दिन बाद जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा करने पर भी सहमत हुई है। जरांगे ने मराठा और कुनबी समुदाय के लिए एक अलग मंत्रालय बनाने की अपनी मांग को फिर से दोहराया और कहा कि वे इस मुद्दे पर अपना समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वे इन सभी निर्णयों के संबंध में औपचारिक आदेश जारी करें और सभी संबंधित जिला और तहसील स्तर के अधिकारियों को सूचित करें ताकि जमीन पर काम शुरू हो सके।
भीषण गर्मी और गिरता स्वास्थ्य
मनोज जरांगे का यह अनशन उनके स्वास्थ्य के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा और मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव में उन्होंने बिना किसी टेंट या छांव के खुले मैदान में चिलचिलाती धूप के बीच भूख हड़ताल शुरू की थी। डॉक्टरों के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण उन्हें डिहाइड्रेशन की समस्या हो गई थी और उन्हें बार-बार उल्टी की शिकायत भी हुई और जांच में उनका ब्लड प्रेशर भी कम पाया गया। उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें छत्रपति संभाजीनगर के एक अस्पताल में विस्तृत जांच और उपचार के लिए भर्ती होने की सलाह दी है। पिछले 3 वर्षों में यह जरांगे का 9वां अनशन था, जिसने सरकार पर भारी दबाव बनाया।
आंदोलन का इतिहास और प्रमुख मांगें
मनोज जरांगे पहली बार तब सुर्खियों में आए थे जब अंतरवाली सराटी में उनके अनशन के दौरान पुलिस की कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद वे मराठा आरक्षण आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे। उनकी मांगों में मुख्य रूप से हैदराबाद और सतारा गजट रिकॉर्ड को लागू करना, मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज पुलिस केस वापस लेना और ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण शामिल है। इससे पहले, पिछले साल 29 अगस्त को उन्होंने मुंबई के आजाद मैदान में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जिसे सरकार के साथ शुरुआती सहमति के बाद 2 सितंबर को समाप्त किया गया था। ताजा घटनाक्रम में, मराठा आरक्षण कैबिनेट उप-समिति के प्रमुख विखे पाटिल ने आश्वासन दिया है कि सरकार इस मुद्दे को सकारात्मक और स्थायी रूप से हल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
