राजस्थान मौसम अपडेट: 21 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट, 10 अगस्त तक सक्रिय रहेगा मानसून

राजस्थान में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम विभाग ने 26 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। उदयपुर, कोटा और भरतपुर संभागों में 7 अगस्त से भारी बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है, जो 10 अगस्त तक जारी रह सकता है।

राजस्थान में मानसून की मेहरबानी का दौर लगातार जारी है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, गुरुवार को राज्य के 26 जिलों में तेज बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग का अनुमान है कि पूरे प्रदेश में 10 अगस्त तक मानसून पूरी तरह से सक्रिय बना रहेगा। इस दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है, जिससे आम जनजीवन और कृषि गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ने की उम्मीद है।

इन संभागों में शुरू होगा भारी बारिश का नया दौर

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 7 अगस्त से राज्य के कुछ विशिष्ट हिस्सों में बारिश की तीव्रता में बढ़ोतरी होगी। विशेष रूप से उदयपुर, कोटा और भरतपुर संभाग में भारी बारिश का एक नया दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण बादलों की आवाजाही तेज होगी और भारी गर्जना के साथ वर्षा हो सकती है और मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 10 अगस्त तक मानसून की यह सक्रियता पूरे प्रदेश को कवर करेगी, जिससे सूखे पड़े इलाकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

जयपुर और भरतपुर संभाग में दर्ज की गई अच्छी बारिश

पिछले कुछ घंटों के दौरान भरतपुर और जयपुर संभाग के कई जिलों में मानसून ने अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराई है और बुधवार को इन संभागों के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई, जहां कुछ स्थानों पर करीब 3 इंच तक पानी बरसा। इसके विपरीत, राज्य के उत्तरी हिस्सों जैसे हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गई है। हालांकि यह बारिश भारी नहीं थी, लेकिन इसने स्थानीय तापमान में गिरावट लाने और उमस से राहत दिलाने में मदद की है।

अलवर के गोविंदगढ़ में सबसे ज्यादा 72 मिलीमीटर बारिश

पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अलवर जिले का गोविंदगढ़ बारिश के मामले में सबसे आगे रहा, जहां 72 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। तेज बारिश के कारण अलवर शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। भारी बारिश की वजह से बाजारों की सड़कें जलमग्न हो गईं और जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। इसके अलावा सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर, डीग, दौसा और जयपुर में भी मानसून ने अच्छी बढ़त दिखाई है। वहीं जयपुर, कोटा, राजसमंद, टोंक, हनुमानगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूंदी और बारां जैसे जिलों में हल्की बारिश का दौर देखने को मिला है।

साइक्लोनिक सर्कुलेशन और मॉनसून ट्रफ का प्रभाव

मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इसके साथ ही मॉनसून ट्रफ लाइन इस समय श्रीगंगानगर, रोहतक और गया से होकर गुजर रही है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण राजस्थान में अगले तीन दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है। इन सिस्टम्स की वजह से नमी वाली हवाएं राज्य में प्रवेश कर रही हैं, जो बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रही हैं।

जल संसाधनों की स्थिति और बांधों का हाल

बारिश के इस दौर के बावजूद राज्य में जल संसाधनों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। इस सीजन में अब तक राजस्थान में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश का सीधा असर प्रदेश के बांधों पर पड़ा है और आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कुल 693 छोटे-बड़े बांधों में से केवल 15 बांध ही ऐसे हैं जो पूरी तरह से लबालब भरे हैं। वहीं, 245 बांध अभी भी पूरी तरह खाली पड़े हैं और 433 बांधों में केवल आंशिक रूप से पानी मौजूद है। मौसम विभाग को उम्मीद है कि 10 अगस्त तक चलने वाला यह सक्रिय दौर इन बांधों के जलस्तर में सुधार ला सकता है।