घड़साना में किसानों का अर्धनग्न प्रदर्शन: 4 में से 2 समूह में पानी की मांग, दी चेतावनी

घड़साना में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन आठवें दिन भी जारी रहा, जहां किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन को चेतावनी दी।

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाले नई मंडी घड़साना में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। गुरुवार को इस आंदोलन ने उस समय एक नया और उग्र मोड़ ले लिया जब किसानों ने अर्धनग्न होकर एक विशाल रैली निकाली। इस रैली के माध्यम से किसानों ने राज्य सरकार और सिंचाई विभाग को अपनी मांगों के प्रति गंभीर होने का एक कड़ा संदेश दिया। प्रदर्शनकारी किसान धरना स्थल से रवाना होकर मुख्य बाजार के विभिन्न हिस्सों से गुजरे और अंत में धान मंडी पहुंचे। वहां उन्होंने सरकार और सिंचाई विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं के तत्काल और स्थाई समाधान की मांग दोहराई।

4 में से 2 समूह में पानी और स्थाई रेगुलेशन की प्रमुख मांग

किसानों की सबसे प्रमुख और बुनियादी मांग इंदिरा गांधी नहर परियोजना की अनूपगढ़ शाखा के लिए 4 में से 2 समूह में सिंचाई पानी उपलब्ध कराने की है। किसानों का स्पष्ट तर्क है कि वर्तमान में लागू जल वितरण व्यवस्था उनके खेतों की सिंचाई के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही, वे आगामी रबी सीजन के लिए 6 माह का एक स्थाई रेगुलेशन जारी करने की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर कोई अनिश्चितता न रहे। किसानों का कहना है कि स्थाई रेगुलेशन न होने के कारण उन्हें हर फसल सीजन में पानी के हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है और लंबे आंदोलन करने पड़ते हैं। वे अनूपगढ़ शाखा को रिजर्व रखने की भी मांग कर रहे हैं ताकि क्षेत्र के किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।

फसल खराबे का मुआवजा और विशेष गिरदावरी की आवश्यकता

आंदोलनकारी किसानों ने कम बारिश और सिंचाई के पानी की भारी कमी के कारण खराब हुई खरीफ फसलों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बताया कि मूंग, ग्वार और नरमा जैसी महत्वपूर्ण फसलें पानी के अभाव में खेतों में ही दम तोड़ रही हैं। किसानों ने सरकार से मांग की है कि इन प्रभावित फसलों की विशेष गिरदावरी तुरंत करवाई जाए ताकि नुकसान का वास्तविक और सटीक आकलन हो सके और गिरदावरी की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए और फसल बीमा योजना के तहत मिलने वाली क्लेम राशि का भुगतान भी बिना किसी देरी के सुनिश्चित किया जाए।

सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप

किसान नेता हरविंद्र सिंह संधू ने सिंचाई विभाग के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि नहर में करीब 13000 क्यूसेक पानी प्रवाहित होने के बावजूद किसानों को उनकी वास्तविक जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की मांग 4 में से 2 समूह में पानी देने की थी, लेकिन विभाग ने 8 सितंबर से 3 में से 1 समूह का रेगुलेशन जबरन लागू कर दिया, जो किसानों के साथ सरासर अन्याय है। इसी आक्रोश के चलते संधू ने आईजीएनपी हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी और अतिरिक्त मुख्य अभियंता सुनील कटारिया को उनके पदों से तुरंत हटाने की मांग की है। किसानों का सीधा आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों की गलत नीतियों और निर्णयों के कारण ही पूरे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।

18 सितंबर को प्रशासनिक कामकाज ठप करने का अल्टीमेटम

किसान नेताओं ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 17 सितंबर तक उनकी सभी जायज मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो 18 सितंबर को इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र बनाया जाएगा। किसानों की योजना के अनुसार, बड़ी संख्या में किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ घड़साना में एकत्रित होंगे और किसान नेताओं ने स्पष्ट रूप से तहसील कार्यालय सहित पूरे उपखंड का प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप करने की चेतावनी दी है। किसानों ने यह साफ कर दिया है कि जब तक 6 माह का स्थाई रेगुलेशन और 4 में से 2 समूह में पानी देने की व्यवस्था आधिकारिक तौर पर लागू नहीं की जाती, तब तक उनका यह संघर्ष और धरना प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा।