पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों और इसकी खपत को कम करने के उद्देश्य से भारत सरकार वैकल्पिक ईंधनों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है और इसी कड़ी में फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी एक गेम-चेंजर के रूप में उभर रही है। हाल ही में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपनी लोकप्रिय वैगन आर का फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किया है और इससे ठीक एक दिन पहले, दोपहिया वाहन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट लॉन्च किए हैं। यह तकनीक न केवल ऑटो सेक्टर की तस्वीर बदलेगी, बल्कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान साबित हो सकती है।
क्या है फ्लेक्स-फ्यूल और यह कैसे काम करता है?
फ्लेक्स-फ्यूल एक ऐसा ईंधन है जिसे दो अलग-अलग ईंधनों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। आमतौर पर इसमें पेट्रोल के साथ एथेनॉल या मेथेनॉल को मिलाया जाता है। यह तकनीक गाड़ियों को अलग-अलग फ्यूल मिक्स पर चलने की आजादी देती है और सरकार इस दिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तेजी से काम कर रही है। शुरुआती चरण में दिल्ली-एनसीआर, पुणे, मुंबई और नागपुर जैसे महानगरों में 50 से 100 फ्लेक्स-फ्यूल स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद, सरकार की योजना 2027 के अंत तक पूरे देश में लगभग 5,000 फ्लेक्स-फ्यूल स्टेशन शुरू करने की है।
एथेनॉल का उत्पादन और इसके स्रोत
एथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस से तैयार किया जाता है। इसके अलावा, इसे उन सभी कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है जिनमें स्टार्च की मात्रा अधिक होती है और इसमें मक्का, सड़े हुए आलू, कसावा और कुछ विशेष प्रकार की सड़ी हुई सब्जियां शामिल हैं। इन चीजों से एथेनॉल बनाकर हम न केवल कचरे का सही इस्तेमाल कर सकते हैं, बल्कि ईंधन के लिए एक स्वदेशी विकल्प भी तैयार कर सकते हैं।
फ्लेक्स-फ्यूल के विभिन्न प्रकार
फ्लेक्स-फ्यूल को पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण के अनुपात के आधार पर बांटा गया है। इसमें E-5 का मतलब है 5 प्रतिशत एथेनॉल और 95 प्रतिशत पेट्रोल। इसी तरह E-10 में 10 प्रतिशत एथेनॉल और 90 प्रतिशत पेट्रोल होता है। E-20 मिश्रण में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का उपयोग किया जाता है। सबसे उन्नत स्तर पर E-85 आता है, जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और केवल 15 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। यह वर्गीकरण इंजन की क्षमता और तकनीक के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है।
फ्लेक्स-फ्यूल अपनाने के बड़े फायदे
फ्लेक्स-फ्यूल के इस्तेमाल से कई बड़े फायदे जुड़े हैं और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि एथेनॉल एक स्वच्छ और हरित ईंधन है। चूंकि इसे गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से बनाया जाता है, इसलिए यह पेट्रोल की खपत को कम करता है। इससे विदेशों से मंगाए जाने वाले कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) पर हमारी निर्भरता कम होगी, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। पर्यावरण के लिहाज से भी यह काफी बेहतर है। पेट्रोल और डीजल के जलने से निकलने वाली हानिकारक गैसों और धुएं के मुकाबले एथेनॉल का मिश्रण प्रदूषण को कम करने में मदद करता है। यही कारण है कि दुनिया भर के विकसित देश इस तकनीक को अपना रहे हैं।
भारत सरकार की एथेनॉल नीति
भारत सरकार एथेनॉल के उत्पादन और उपयोग को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन के साथ आते हैं जो पेट्रोल से लेकर 100 प्रतिशत एथेनॉल (E100) तक किसी भी ईंधन पर चल सकते हैं। इसमें किसी एक निश्चित ईंधन का उपयोग अनिवार्य नहीं है। वाहन मालिक एक ही टैंक में पेट्रोल, एथेनॉल या इनका कोई भी मिश्रण (जैसे E20 से E85 तक) भरवा सकते हैं। भारत में एथेनॉल का उत्पादन घरेलू स्तर पर होने से तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी। कई ऑटोमोबाइल कंपनियां अब ऐसे इंजन विकसित कर रही हैं जो E85 और E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण पर कुशलता से काम कर सकें।
मारुति सुजुकी वैगन आर फ्लेक्स-फ्यूल
मारुति सुजुकी ने अपनी सबसे भरोसेमंद कार वैगन आर को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के साथ पेश किया है। वैगन आर ने पहले भी सीएनजी और एलपीजी जैसे विकल्पों के साथ बाजार में अपनी जगह बनाई थी और अब यह फ्लेक्स-फ्यूल सेगमेंट में क्रांति लाने के लिए तैयार है। कंपनी आने वाले समय में इस मॉडल की कीमतों का खुलासा करेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इसकी कीमत सीएनजी वेरिएंट के आसपास ही हो सकती है। यह कार 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण पर चलने में सक्षम है, जो देश के तेल आयात को कम करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
हीरो मोटोकॉर्प की नई फ्लेक्स-फ्यूल बाइक
दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में हीरो मोटोकॉर्प ने बड़ी पहल करते हुए स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च किए हैं। स्प्लेंडर प्लस फ्लेक्स-फ्यूल की कीमत लगभग 82,710 रुपये तय की गई है, जबकि एचएफ डीलक्स की कीमत करीब 72,792 रुपये रखी गई है। इन मोटरसाइकिलों की बिक्री जुलाई 2026 से दिल्ली और महाराष्ट्र में शुरू होगी, जिसे बाद में पूरे देश में फैलाया जाएगा। ये दोनों बाइकें 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण पर चल सकती हैं। 3 एनएम का टॉर्क पैदा करता है। इनमें डिजिटल-एनालॉग मीटर, ट्यूबलेस टायर और साइड स्टैंड इंजन कट-ऑफ जैसे आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं।
भविष्य की राह और किसानों को लाभ
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से भविष्य में वाहनों को चलाने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा और पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को ईंधन चुनने की आजादी मिलेगी। यदि पेट्रोल महंगा होता है, तो चालक एथेनॉल का विकल्प चुन सकेंगे। इसके अलावा, इस तकनीक से किसानों को सीधा फायदा होगा क्योंकि एथेनॉल बनाने के लिए उनकी फसलों का उपयोग किया जाएगा और इससे कृषि और ऑटो सेक्टर के बीच एक मजबूत आर्थिक संबंध बनेगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।
