भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करना चाहता है अफगानिस्तान, बिजनेस वीजा प्रक्रिया आसान करने की मांग

अफगानिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट (ACCI) ने भारत के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया है। पाकिस्तान के रास्ते ट्रांजिट ट्रेड में भारी गिरावट के बीच, अफगानिस्तान अब भारत के साथ सीधे व्यापारिक संबंधों और बिजनेस वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग कर रहा है।

अफगानिस्तान के शीर्ष व्यापारिक संगठन, अफगानिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट (ACCI) ने भारत के साथ अपने व्यापारिक और निवेश संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया है। काबुल में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, संगठन ने व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने और अफगान व्यापारियों के लिए बिजनेस वीजा जारी करने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने का सुझाव दिया है। इन महत्वपूर्ण विषयों पर एसीसीआई के चेयरमैन सैयद करीम हाशिमी और अफगानिस्तान में भारत के राजदूत यतिन पटेल के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

पाकिस्तान के रास्ते ट्रांजिट ट्रेड में भारी गिरावट

एसीसीआई और भारत के बीच यह बैठक एक ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान के रास्ते होने वाले अफगानिस्तान के ट्रांजिट ट्रेड में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। एसीसीआई द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में जहां यह व्यापार लगभग 5 अरब डॉलर के स्तर पर था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह घटकर मात्र 36 करोड़ 70 लाख डॉलर रह गया है। इस भारी गिरावट के कारण अफगानिस्तान ने अब ईरान के चाबहार बंदरगाह जैसे वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

चाबहार बंदरगाह के जरिए भारत की सीधी पहुंच

भारत भी ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान के साथ अपने संपर्क और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में जुटा है। यह मार्ग सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए भारत को अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। आंकड़ों की बात करें तो भारत और अफगानिस्तान के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 90 करोड़ 78 लाख डॉलर रहा था। यह आंकड़ा दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संभावनाएं अभी भी काफी मजबूत हैं और इन्हें और अधिक विस्तार दिया जा सकता है।

कृषि और खनन क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं

बैठक के दौरान सैयद करीम हाशिमी ने विशेष रूप से कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प, खनन और खनिज संसाधनों जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अफगानिस्तान के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारतीय बाजारों तक बेहतर पहुंच, लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और बिजनेस वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उनका मानना है कि यदि इन प्रशासनिक समस्याओं को सुलझा लिया जाता है, तो दोनों देशों के व्यापारियों के बीच सीधा संवाद और व्यापार बढ़ेगा।

सहयोग के लिए भारत की प्रतिबद्धता

भारतीय राजदूत यतिन पटेल ने अफगानिस्तान की ओर से आए इन प्रस्तावों का स्वागत किया और कहा कि भारत इन क्षेत्रों में सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच व्यापार को गति देने के लिए संयुक्त व्यापार प्रदर्शनी, विशेष व्यापारिक मंचों और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान की योजनाओं पर सक्रिय रूप से काम किया जा रहा है। इससे दोनों देशों के उद्यमियों को एक-दूसरे की जरूरतों और बाजार की स्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

दीर्घकालिक आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध

बैठक के समापन पर दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्रों में स्थायी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। भारत और अफगानिस्तान ने पारदर्शिता, दक्षता और पारस्परिक लाभ के आधार पर अपने दीर्घकालिक आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया। यह बैठक भविष्य में दोनों देशों के बीच एक नए आर्थिक अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।