भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उम्र में धोखाधड़ी के खिलाफ एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए एक साथ 64 खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह कार्रवाई भारतीय क्रिकेट में उम्र छिपाने की समस्या को जड़ से खत्म करने के बोर्ड के प्रयासों का हिस्सा है। इस प्रतिबंधित सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम रवि कुमार का है, जो साल 2022 में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य थे। बीसीसीआई के इस कड़े फैसले ने घरेलू क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है और यह स्पष्ट कर दिया है कि उम्र के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीएबी की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
खिलाड़ियों की उम्र में यह गड़बड़ी तब सामने आई जब क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) ने अपने खिलाड़ियों के लिए प्री-सीजन डॉक्यूमेंटेशन ड्राइव चलाई। आयु वर्ग के क्रिकेट में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए खिलाड़ियों को अपने जन्म प्रमाण पत्र के साथ-साथ स्कूल और कॉलेज के शैक्षणिक रिकॉर्ड जमा करने होते हैं और सीएबी द्वारा इन दस्तावेजों की व्यापक जांच के दौरान कई खिलाड़ियों के रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां पाई गईं। इसके बाद संघ ने अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई को सौंपी, जिसके आधार पर इन 64 खिलाड़ियों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
रवि कुमार और रोहित यादव पर गिरी गाज
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बैन किए गए खिलाड़ियों में रवि कुमार का नाम शामिल है जिन्होंने 2022 के अंडर-19 विश्व कप में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। सीएबी के रिकॉर्ड के अनुसार, रवि कुमार की उम्र में 45 महीने का अंतर पाया गया है। इसके अलावा, लेग स्पिनर रोहित यादव का नाम भी इस सूची में है, जिन्हें हाल ही में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ होने वाली सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुना गया था। रोहित की उम्र में 27 महीने की गड़बड़ी पाई गई है, जिसके बाद उन्हें तुरंत प्रभाव से टीम से हटा दिया गया है। रोहित को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच वनडे और दो मल्टी-डे मैचों के लिए चुना गया था, लेकिन अब बीसीसीआई ने उन पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया है।
दस्तावेजों की जांच और विसंगतियों का विवरण
प्रतिबंधित खिलाड़ियों की इस सूची में बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर विशाल भट्टी का नाम भी शामिल है। सीएबी ने अपनी वेबसाइट पर उन सभी खिलाड़ियों की सूची जारी की है जिनके दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई है और जांच प्रक्रिया के दौरान यह देखा गया कि खिलाड़ियों द्वारा जमा किए गए जन्म प्रमाण पत्र और उनके स्कूल-कॉलेज के रिकॉर्ड में दी गई जन्मतिथि मेल नहीं खा रही थी। रवि कुमार के मामले में यह अंतर 40 महीने से अधिक यानी 45 महीने का पाया गया, जबकि रोहित यादव के मामले में यह 27 महीने का था। संघ ने कई अन्य आयु वर्ग के खिलाड़ियों के रिकॉर्ड में भी इसी तरह की गड़बड़ी पाई है।
बीसीसीआई की सख्त कार्रवाई और भविष्य के कदम
बीसीसीआई ने उम्र से जुड़ी धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए अपनी निगरानी प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है। बोर्ड ने सभी राज्य इकाइयों को इस प्रतिबंध के बारे में सूचित कर दिया है और यह आदेश तुरंत लागू हो गया है। अंडर-19 स्तर पर उम्र की जांच की प्रक्रिया अब और भी सख्त होगी, जहां खिलाड़ियों को अपने जन्म प्रमाण पत्र के साथ-साथ अपने पूरे शैक्षणिक करियर के रिकॉर्ड पेश करने होंगे। बीसीसीआई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र खिलाड़ी ही आयु वर्ग के टूर्नामेंटों में हिस्सा लें और खेल की गरिमा बनी रहे।
