मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य हमलों और तनाव की वजह से सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड की कीमत अब 90 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत में 2 डॉलर 69 सेंट या 3 दशमलव 05 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिसके बाद यह 90 डॉलर 79 सेंट पर पहुंच गया है। यह 11 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते भी इसमें 15 दशमलव 9 प्रतिशत की बड़ी बढ़त देखी गई थी, जो अप्रैल के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त थी।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता युद्ध का खतरा
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा विवाद अब और भी तीखा हो गया है और दोनों ही देश एक-दूसरे की शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसके कारण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से होने वाले तेल शिपमेंट में मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जबकि पिछले हफ्ते भी कीमतों में करीब 16 प्रतिशत का उछाल आया था। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यदि कच्चे तेल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो दुनिया भर में महंगाई के आंकड़ों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक नाकेबंदी और हमले
वीकेंड के दौरान मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के खिलाफ हमले जारी रखे। वहीं, अमेरिका के सहयोगी देशों कुवैत और बहरीन ने भी ईरान की ओर से नए हमलों की जानकारी दी है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों ने समुद्री शिपिंग ट्रैफिक को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिका का दावा है कि वह ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि वह उन जहाजों को निशाना बना रहा है जो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के उसके नियमों का उल्लंघन करते हैं। आपको बता दें कि इस स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स एजेंसी ने सोमवार सुबह सूचना दी कि ओमान के कुमजार के उत्तर-पश्चिम में एक जहाज में आग लगने की घटना हुई है।
5 साल के निचले स्तर पर पहुंचा तेल का स्टॉक
बार्कलेज के एनालिस्ट अमरप्रीत सिंह के अनुसार, आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि इस दोहरी नाकेबंदी के बीच क्षेत्र से तेल का निर्यात किस स्तर पर रह पाता है। वर्तमान में तेल बाजार इन्वेंट्री यानी स्टॉक पर पड़ने वाले असर को लेकर काफी निश्चिंत दिख रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि युद्ध की शुरुआत के मुकाबले अभी इन्वेंट्री पिछले पांच सालों के सबसे निचले स्तर पर है। LSEG के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को केवल चार जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट से यात्रा की, जबकि उससे एक दिन पहले आठ जहाजों ने यह रास्ता पार किया था। डेटा यह भी दिखाता है कि शुक्रवार से तेल लोड करने के लिए कम से कम तीन ऑयल प्रोडक्ट टैंकर और एक बहुत बड़ा क्रूड कैरियर इस स्ट्रेट में दाखिल हुए हैं।
WTI क्रूड में भी उछाल और भारत में ईंधन के दाम
अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2 डॉलर 19 सेंट या 2 दशमलव 65 प्रतिशत बढ़कर 84 डॉलर 68 सेंट प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो 12 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। पिछले हफ्ते इसमें 15 दशमलव 5 प्रतिशत की बढ़त हुई थी। दूसरी ओर, भारत में 25 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। 25 मई को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल में 2 रुपये 61 पैसे और डीजल में 2 रुपये 71 पैसे की बढ़ोतरी की थी। दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपये 12 पैसे और डीजल 95 रुपये 20 पैसे प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल 111 रुपये 21 पैसे और डीजल 97 रुपये 83 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता में भी पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर से ऊपर है, जबकि हैदराबाद में डीजल की कीमत 103 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर बनी हुई है।
