केंद्र सरकार एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लोकसभा में पेश करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, इस बिल को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है और इसे एक संशोधन विधेयक के रूप में सदन के पटल पर रखा जाएगा। संशोधित बिल के माध्यम से महिलाओं को 33 प्रतिशत और दलितों को 20 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है। इससे पहले अप्रैल 2026 में लोकसभा में दो तिहाई बहुमत की कमी के कारण यह महत्वपूर्ण बिल पास नहीं हो सका था। चूंकि यह एक संवैधानिक विधेयक है, इसलिए इसे पारित कराने के लिए संसद में दो तिहाई सांसदों का समर्थन अनिवार्य है। सरकार अब इस बिल को सफल बनाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है।
दो तिहाई बहुमत की बड़ी चुनौती
इकॉनोमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार महिला और परिसीमन को लेकर एक संशोधित मसौदा तैयार कर रही है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस बिल को आगामी मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं। परिसीमन का मुख्य उद्देश्य लोकसभा सीटों की वर्तमान सीमाओं को फिर से निर्धारित करना है। सरकार समय-समय पर जनसंख्या और अन्य कारकों के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं को तय करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया अपनाती है। मोदी सरकार की योजना परिसीमन के बाद नए सिरे से महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने की है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस तरह के बिल को पास कराने के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का दो तिहाई समर्थन जरूरी होता है।
अप्रैल 2026 का पिछला अनुभव और आंकड़े
अप्रैल 2026 में जब इस बिल पर लोकसभा में मतदान हुआ था, तब इसके पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 230 सांसदों ने मतदान किया था। बिल को पारित कराने के लिए 352 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता थी, जिसके कारण यह बिल गिर गया और आगे नहीं बढ़ पाया। अब सवाल यह है कि बीजेपी इस बार दो तिहाई बहुमत कैसे जुटाएगी और राज्यसभा में बीजेपी जरूरी दो तिहाई सांसदों की संख्या के काफी करीब है और उसे वहां केवल 10 और सांसदों की जरूरत है। लेकिन लोकसभा में फासला अभी भी काफी बड़ा है, जिसे पाटने के लिए सरकार को अन्य दलों के सहयोग की आवश्यकता होगी।
लोकसभा में वर्तमान दलीय स्थिति
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हुई टूट के बाद एनडीए के सांसदों की संख्या बढ़कर 319 हो गई है। अब एनडीए को 352 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए 33 और सांसदों के समर्थन की जरूरत है। दूसरी ओर, विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास वर्तमान में 208 सांसद हैं, जिन्हें 2 निर्दलीय सांसदों का भी समर्थन प्राप्त है। इस स्थिति में सरकार को बिल पास कराने के लिए विपक्षी खेमे या अन्य छोटे दलों में सेंध लगानी होगी। परिसीमन बिल के तहत पहले लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की घोषणा की गई थी, लेकिन संशोधित बिल में सीटों की संख्या को लेकर अभी कोई खुलासा नहीं किया गया है।
बहुमत जुटाने के लिए बीजेपी की 4 सूत्रीय रणनीति
बीजेपी बहुमत जुटाने के लिए चार प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पहला, सदन में अन्य सांसदों की संख्या 16 है, जिनमें आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसद और 7 निर्दलीय सांसद शामिल हैं। वाईएसआर के सांसद पहले भी कई मौकों पर सरकार का साथ दे चुके हैं। एनडीए के सहयोगी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी इस बिल को पास कराने में मजबूती से जुटे हैं। दूसरा, एनडीए की नजर डीएमके पर है जिसके पास 22 सांसद हैं। डीएमके ने हाल ही में इंडिया गठबंधन की बैठक का बहिष्कार किया था और वह अटल बिहारी वाजपेयी के समय में एनडीए का हिस्सा रह चुकी है। तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस के साथ डीएमके के रिश्तों में खटास की खबरें भी आ रही हैं।
एनसीपी और कांग्रेस में संभावित टूट
तीसरी रणनीति के तहत शरद पवार की पार्टी एनसीपी में भी टूट की चर्चाएं तेज हैं। एनसीपी के पास इस वक्त लोकसभा में 8 सांसद हैं। यदि ये सांसद पाला बदलते हैं, तो एनडीए दो तिहाई बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगा। चौथी और अंतिम संभावना कांग्रेस में सेंध लगाने की है और बीजेपी इसके लिए 2019 के अनुच्छेद 370 के उदाहरण को देख रही है, जब कांग्रेस के राज्यसभा सांसद भुवनेश्वर कलीता ने ऐन मौके पर इस्तीफा दे दिया था। इससे कांग्रेस व्हिप जारी नहीं कर पाई थी और बीजेपी ने आसानी से विधेयक पास करा लिया था। बाद में कलीता बीजेपी में शामिल हो गए थे। सरकार इसी तरह की रणनीति अपनाकर महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को इस बार संसद से पार लगाने की कोशिश कर सकती है।
