नरेश मीणा की जमानत रद्द: टोंक कोर्ट ने शर्तों के उल्लंघन पर सुनाया फैसला

टोंक की एससी-एसटी कोर्ट ने नरेश मीणा की जमानत रद्द कर दी है। हाईकोर्ट से मिली इस राहत को शर्तों के उल्लंघन के आधार पर खत्म किया गया है। यह मामला देवली उनियारा उपचुनाव के दौरान हुई हिंसा और एसडीएम थप्पड़कांड से जुड़ा है।

राजस्थान की राजनीति और कानूनी गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नरेश मीणा को एक बार फिर जेल की सलाखों के पीछे जाना होगा क्योंकि टोंक की एससी-एसटी कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी है। सोमवार को आए इस फैसले ने नरेश मीणा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बता दें कि हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को देवली उनियारा में उपचुनाव के दौरान हुए चर्चित एसडीएम थप्पड़कांड और उसके बाद भड़की आगजनी व हिंसा के मामले में जमानत दी थी। हालांकि, अब निचली अदालत ने यह माना है कि मीणा ने उन शर्तों का पालन नहीं किया जिनके आधार पर उन्हें रिहाई मिली थी।

जमानत रद्द होने का मुख्य कारण

टोंक की एससी-एसटी कोर्ट ने नरेश मीणा की जमानत इस आधार पर रद्द की है कि उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों का उल्लंघन किया। सरकारी वकील ने कोर्ट में दलील दी कि जमानत मिलने के बाद नरेश मीणा का आचरण उन नियमों के विरुद्ध रहा जो अदालत ने निर्धारित किए थे और मामला नगरफोर्ट थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 166/2024 से जुड़ा है। नगरफोर्ट थाना पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) के माध्यम से कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र पेश किया था, जिसमें मीणा की जमानत निरस्त करने की मांग की गई थी। पुलिस ने तर्क दिया कि झालावाड़ स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले 7 बच्चों के परिजनों से मिलने जाने के दौरान हुई उनकी गिरफ्तारी, हाईकोर्ट की जमानत शर्तों का सीधा उल्लंघन है।

नरेश मीणा की तीखी प्रतिक्रिया

कोर्ट के इस फैसले के बाद नरेश मीणा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करते हैं और फैसले की कॉपी मिलने के बाद आगे की कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। हालांकि, उन्होंने सत्ताधारी बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। मीणा ने आरोप लगाया कि बीजेपी उन नेताओं को तो संरक्षण देती है जो बड़े अपराध करके उनकी पार्टी में शामिल हो जाते हैं, लेकिन जो जनता के हक के लिए लड़ता है, उसे परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि वह कानून के दायरे में रहकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी को यह सहन नहीं हो रहा है। मीणा ने दावा किया कि सिस्टम पर सत्ता का भारी दबाव है और उनकी गिरफ्तारी को गलत तरीके से पेश किया गया।

लोकतंत्र और संविधान पर उठाए सवाल

नरेश मीणा ने अपने बयान में आगे कहा कि अगर इस लोकतंत्र में किसी पीड़ित परिवार से मिलना जमानत का उल्लंघन माना जाएगा और पुलिस इस आधार पर कोर्ट को गुमराह करेगी, तो संविधान की परिभाषा ही बदल जाएगी। उन्होंने बीजेपी को अहंकारी बताते हुए कहा कि सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है और मीणा के अनुसार, बीजेपी गरीब, किसान, मजदूर और युवाओं के खिलाफ काम कर रही है। सरकारी वकील ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के आवेदन को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है क्योंकि शर्तों की पालना नहीं की गई थी और अब इस आदेश के बाद नरेश मीणा की कानूनी टीम अगले कदम की तैयारी कर रही है।