नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। बालेन शाह ने मोदी के समर्थन और मदद की पेशकश की दिल से सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती का प्रतीक बताया। यह आभार ऐसे समय में व्यक्त किया गया है जब नेपाल तिब्बत से आए सैलाब के कारण भीषण तबाही का सामना कर रहा है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भारत द्वारा दी गई मानवीय मदद की पेशकश को इस मुश्किल घड़ी में एक बड़ा सहारा बताया है।
पीएम मोदी और बालेन शाह के बीच बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और वहां बाढ़ से हुई जान-माल की भारी क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की और बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत अपने पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए पूरी तरह तैयार है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत के लोग इस कठिन समय में नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं। भारत की ओर से यह आश्वासन नेपाल के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है।
नेपाल प्रधानमंत्री कार्यालय का आधिकारिक बयान
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी भावनाओं को साझा किया। कार्यालय ने लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आपके फोन कॉल और गहरी संवेदनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के प्रति एकजुटता दिखाने वाले आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और मदद की उदार पेशकश की हम दिल से सराहना करते हैं। " यह बयान दोनों देशों के बीच के कूटनीतिक और भावनात्मक संबंधों की गहराई को प्रदर्शित करता है।
तिब्बत से आए सैलाब ने मचाई तबाही
नेपाल में आई इस आपदा का मुख्य कारण तिब्बत से आया भीषण फ्लैश फ्लड है। बुधवार सुबह यह सैलाब भोटेकोशी नदी में इतनी तेजी से पहुंचा कि स्थानीय लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। जब यह आपदा आई, तब लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे, लेकिन कुछ ही पलों में सैकड़ों फीट ऊंचा पानी का सैलाब उनके सामने खड़ा था। देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी का बहाव इतना प्रचंड था कि मात्र 30 सेकंड के भीतर 2 बड़े बाजारों का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया।
हताहतों और लापता लोगों के आंकड़े
इस भीषण हादसे में अब तक 98 लोगों की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, और आशंका जताई जा रही है कि मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, 750 यात्री अभी भी लापता हैं। इन लापता लोगों में 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों की सूची में 133 भारतीय और 37 एनआरआई भी शामिल बताए गए हैं। लापता लोगों में एक बड़ी संख्या उन श्रद्धालुओं की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन खराब मौसम और मलबे के कारण कार्यों में बाधा आ रही है।
बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
सैलाब की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अनगिनत घर और दुकानें बह गईं। सड़कों पर खड़ी गाड़ियां पानी में डूब गईं और कई बहुमंजिला इमारतें मलबे के साथ बहती हुई नजर आईं और भोटेकोशी नदी के रास्ते में आने वाला लगभग हर ढांचा इस सैलाब की चपेट में आकर नष्ट हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, 3 पुलिस चौकियों, कई महत्वपूर्ण पुलों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को इस आपदा में भारी नुकसान पहुंचा है। सड़कों और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे का भी एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया है, जिससे प्रभावित इलाकों तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
