IND vs NZ ODI / न्यूजीलैंड वनडे सीरीज: रुतुराज गायकवाड़ बनाम ऋषभ पंत, 9 मैचों के बाद किसका पलड़ा भारी?

बीसीसीआई ने न्यूजीलैंड वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान किया, जिसमें ऋषभ पंत को शामिल किया गया है जबकि रुतुराज गायकवाड़ को बाहर कर दिया गया है। फैंस इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। 9-9 वनडे मैचों के बाद दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना में गायकवाड़ कई मायनों में पंत से आगे दिखते हैं।

हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया के स्क्वॉड की घोषणा की, जिसने क्रिकेट प्रेमियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। इस घोषणा में जहां एक ओर अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को टीम में जगह दी गई है, वहीं दूसरी ओर युवा सलामी बल्लेबाज रुतुराज गायकवाड़, जिन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपनी पिछली सीरीज में शानदार शतक जड़ा था, उन्हें स्क्वॉड से बाहर कर दिया गया है और इस फैसले ने कई फैंस को निराश किया है और वे सोशल मीडिया पर बीसीसीआई के इस निर्णय की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। फैंस का मानना है कि हालिया प्रदर्शन को देखते हुए गायकवाड़ को टीम में बनाए रखना चाहिए था। किसी भी खिलाड़ी के करियर के शुरुआती चरण उसके भविष्य की दिशा तय करते हैं।

रुतुराज गायकवाड़ ने अपने वनडे करियर में अभी तक केवल 9 मैच खेले हैं। इन 9 मैचों की 8 पारियों में उन्होंने कुल 228 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत 28 और 50 का रहा है। यह एक सम्मानजनक शुरुआत मानी जा सकती है, खासकर जब खिलाड़ी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा हो। वहीं, ऋषभ पंत, जो अब तक 31 वनडे मैच खेल चुके हैं, उनके करियर के शुरुआती 9 मैचों के प्रदर्शन पर गौर करें तो उन्होंने भी 8 पारियों में बल्लेबाजी की थी और इन 8 पारियों में पंत ने 26. 12 के औसत से 209 रन बनाए थे और आंकड़ों की इस तुलना में, रुतुराज गायकवाड़ ने ऋषभ पंत से अधिक रन बनाए हैं और उनका औसत भी बेहतर रहा है, जो उनके शुरुआती प्रदर्शन की मजबूती को दर्शाता है।

शतक और अर्धशतक: कौन रहा आगे?

क्रिकेट में शतक और अर्धशतक किसी भी बल्लेबाज के लिए मील का पत्थर होते हैं, जो उसकी क्षमता और बड़े स्कोर बनाने की भूख को दर्शाते हैं। रुतुराज गायकवाड़ ने अपने शुरुआती 9 वनडे मैचों में एक शतक और एक अर्धशतक लगाने में सफलता प्राप्त की है। उनका यह शतक साउथ अफ्रीका के खिलाफ आया था, जिसने उनकी बल्लेबाजी कौशल को उजागर किया और इसके विपरीत, ऋषभ पंत अपने शुरुआती 9 वनडे मैचों में एक भी शतक या अर्धशतक नहीं लगा पाए थे। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बड़े स्कोर बनाने के मामले में गायकवाड़ ने अपने शुरुआती करियर में पंत पर बढ़त बनाई थी। यह प्रदर्शन चयनकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण विचार बिंदु हो सकता था।

उच्चतम स्कोर की तुलना

एक पारी में बनाया गया उच्चतम स्कोर अक्सर किसी बल्लेबाज की क्षमता का परिचायक होता है, खासकर दबाव की स्थिति में। रुतुराज गायकवाड़ का 9 वनडे मैचों के बाद उच्चतम स्कोर 105 रन रहा है, जो उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मैच में बनाया था। यह एक मैच-विनिंग पारी थी जिसने उनकी प्रतिभा को साबित किया। दूसरी ओर, ऋषभ पंत का 9 वनडे मैचों के बाद उच्चतम स्कोर 48 रन था और यह पारी उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ खेली थी। इस तुलना में भी गायकवाड़ का पलड़ा भारी दिखता है, क्योंकि उन्होंने एक बड़ी शतकीय पारी खेलकर अपनी छाप छोड़ी थी, जबकि पंत अर्धशतक तक भी नहीं पहुंच पाए थे।

बाउंड्री का खेल: चौके और छक्के

आधुनिक क्रिकेट में तेजी से रन बनाने के लिए चौके और छक्के महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रुतुराज गायकवाड़ ने अपने शुरुआती 9 वनडे मैचों में 28 चौके लगाए हैं और इसके साथ ही उन्होंने 2 छक्के भी जड़े हैं। यह दर्शाता है कि वह गेंद को गैप में खेलने और बाउंड्री हासिल करने में सक्षम हैं और वहीं, ऋषभ पंत ने अपने शुरुआती 9 वनडे मैचों में 25 चौके लगाए थे, जो गायकवाड़ से थोड़े कम हैं। हालांकि, छक्के लगाने के मामले में पंत ने गायकवाड़ को पीछे छोड़ दिया था, उन्होंने 4 छक्के लगाए थे। यह दिखाता है कि पंत में पावर-हिटिंग की क्षमता गायकवाड़ से थोड़ी अधिक थी, लेकिन चौकों के मामले में गायकवाड़ आगे थे।

आंकड़ों की रोशनी में चयन पर सवाल

इन आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि रुतुराज गायकवाड़ ने अपने करियर के शुरुआती 9 वनडे मैचों में ऋषभ पंत की तुलना में अधिक प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। उन्होंने अधिक रन बनाए, बेहतर औसत रखा, एक शतक और एक अर्धशतक जड़ा, और उनका उच्चतम स्कोर भी काफी अधिक था। हालांकि, छक्कों के मामले में पंत थोड़े आगे थे। इसके बावजूद, हाल ही में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शतक लगाने वाले गायकवाड़ को न्यूजीलैंड सीरीज से बाहर करना और पंत को शामिल करना, फैंस के बीच बहस का विषय बना हुआ है। यह स्थिति चयनकर्ताओं के फैसलों पर सवाल उठाती है और क्रिकेट प्रेमियों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या प्रदर्शन के आधार पर ही चयन किया जा रहा है।