पीएनजी गैस में 5 प्रतिशत हाइड्रोजन मिलाने की तैयारी, बढ़ सकते हैं रसोई गैस के दाम

ई20 पेट्रोल के बाद अब सरकार पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (PNG) में 5 प्रतिशत हाइड्रोजन मिलाने की योजना बना रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) द्वारा तैयार इस ड्राफ्ट का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना है, हालांकि इससे रसोई गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं।

ई20 पेट्रोल के सफल कार्यान्वयन के बाद अब भारत सरकार घरेलू ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और महंगे आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से अब रसोई में इस्तेमाल होने वाली पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (PNG) में हाइड्रोजन मिलाने की योजना बनाई जा रही है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट और खाड़ी देशों में होने वाले तनावों के मद्देनजर उठाया जा रहा है और गौरतलब है कि खाड़ी युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कच्चे तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ था, जिसके बाद सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग को अनिवार्य किया था। अब इसी तर्ज पर कुकिंग गैस में भी हाइड्रोजन गैस की ब्लेंडिंग की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी ऊर्जा संकट से निपटा जा सके और घरेलू मांग को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।

5 प्रतिशत हाइड्रोजन ब्लेंडिंग का पूरा खाका

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया है। इस योजना के तहत शुरुआती चरण में पीएनजी गैस में 5 प्रतिशत तक हाइड्रोजन गैस मिलाने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि इस ड्राफ्ट को सरकार की अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो जल्द ही देश के करोड़ों घरों की रसोई तक पहुंचने वाली पीएनजी गैस में हाइड्रोजन का मिश्रण होगा और इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक गैस के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है। वर्तमान में भारत अपनी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता है। हाइड्रोजन ब्लेंडिंग से इस दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और घरेलू ऊर्जा संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

कीमतों पर पड़ने वाला संभावित असर

रणनीतिक रूप से यह कदम जितना महत्वपूर्ण है, आर्थिक रूप से यह उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ सकता है। पीएनजीआरबी के ड्राफ्ट के अनुसार, पीएनजी में हाइड्रोजन की ब्लेंडिंग से गैस की कीमतों में बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है। इसका मुख्य कारण हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस की कीमतों में मौजूद बड़ा अंतर है। आंकड़ों के अनुसार, एक किलो हाइड्रोजन की कीमत 387 से 397 रुपये के बीच है। वहीं, प्राकृतिक गैस की कीमत 1067 रुपये प्रति MMBtu है। अगर हम ग्रीन हाइड्रोजन की बात करें, तो इसे तैयार करने का खर्च 2880 से 2950 रुपये प्रति MMBtu तक आ सकता है। यह लागत सामान्य प्राकृतिक गैस के मुकाबले लगभग 2 पॉइंट 7 गुना अधिक है। ऐसी स्थिति में, हाइड्रोजन मिश्रित पीएनजी गैस सामान्य गैस की तुलना में महंगी साबित होगी, जिसका सीधा असर आम आदमी के मासिक रसोई बजट पर पड़ेगा।

सुरक्षा मानक और कार्यान्वयन की समयसीमा

कीमतों के अलावा, इस योजना में सुरक्षा एक सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हाइड्रोजन गैस अपनी अत्यधिक ज्वलनशील प्रकृति के लिए जानी जाती है, इसलिए इसे घरेलू पाइपलाइनों में प्रवाहित करने से पहले सुरक्षा के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। पीएनजीआरबी इस समय सुरक्षा और परिचालन संबंधी तैयारियों का गहन आकलन कर रहा है। इसमें पाइपलाइनों की मजबूती और घरेलू उपकरणों की नए गैस मिश्रण के साथ अनुकूलता की जांच शामिल है। वर्तमान में इस ड्राफ्ट पर विशेषज्ञों और जनता से सुझाव मांगे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को मंजूरी मिल भी जाती है, तो इसे पूरी तरह से लागू करने में 2 से 3 साल का समय लग सकता है। सुरक्षा एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिलने के बाद ही इस परियोजना को धरातल पर उतारा जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का कोई समझौता न हो।