कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और जैव प्रौद्योगिकी (BT) मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। रविवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खरगे ने आरएसएस की तुलना 'शैतान' से की और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उसकी 'परछाई' करार दिया। उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली, उसके वित्तीय ढांचे और कानूनी स्थिति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश के विकास के लिए सीधे मूल संगठन से मुकाबला करना आवश्यक है।
आरएसएस और भाजपा के संबंधों पर टिप्पणी
प्रियांक खरगे ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि भाजपा अपनी वैचारिक शक्ति और दिशा पूरी तरह से आरएसएस से प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि यदि आरएसएस का अस्तित्व नहीं होता, तो भाजपा की स्थिति क्षेत्रीय दलों जैसे जनता दल (सेक्युलर) से भी खराब होती। खरगे के अनुसार, राजनीतिक विरोधियों को भाजपा से लड़ने के बजाय सीधे आरएसएस से मुकाबला करना चाहिए क्योंकि भाजपा केवल एक परछाई है, जबकि असली शक्ति केंद्र आरएसएस है। उन्होंने जोर देकर कहा कि परछाई से लड़ने के बजाय मूल इकाई से लड़ना देश के भविष्य के लिए बेहतर होगा।
वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप
मंत्री ने आरएसएस पर वित्तीय अपारदर्शिता का आरोप लगाते हुए 'मनी लॉन्ड्रिंग' जैसे गंभीर शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने संगठन के फंड के स्रोतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरएसएस के पास धन कहां से आता है, इसकी जांच होनी चाहिए। खरगे ने दावा किया कि संगठन आम नागरिकों को कर भुगतान और अच्छे नागरिक बनने का उपदेश देता है, लेकिन स्वयं वित्तीय जवाबदेही से मुक्त रहना चाहता है। उन्होंने मांग की कि जो नियम और कानून देश के अन्य संगठनों और नागरिकों पर लागू होते हैं, वही आरएसएस पर भी लागू होने चाहिए।
वैश्विक नेटवर्क और विदेशी फंडिंग का दावा
प्रियांक खरगे ने संगठन के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आरएसएस का 2500 से अधिक संबद्ध संगठनों का एक विशाल नेटवर्क है। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में भी फैला हुआ है। उनके अनुसार, इन विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्रोतों से संगठन को भारी मात्रा में धन प्राप्त होता है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि इतने बड़े स्तर पर संचालन करने के बावजूद संगठन की वित्तीय पारदर्शिता सार्वजनिक डोमेन में स्पष्ट नहीं है।
पंजीकरण और कानूनी जवाबदेही की मांग
संगठन की कानूनी स्थिति पर प्रहार करते हुए खरगे ने कहा कि आरएसएस खुद को 'व्यक्तियों का समूह' (Body of Individuals) बताकर पंजीकरण से बचता रहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से वादा किया कि वह संगठन का पंजीकरण अनिवार्य कराने के लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक देश में संविधान और कानून का शासन है, किसी भी संगठन को कानूनी दायरे से बाहर रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि चाहे वह आरएसएस हो या एसडीपीआई, किसी भी सांप्रदायिक ताकत को रोकने के लिए कानूनी और संवैधानिक तरीके अपनाना अनिवार्य है।
राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवैधानिक ढांचे पर जोर
अपने भाषण के अंतिम भाग में खरगे ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों से निपटने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि उस विचारधारा और व्यवस्था से है जो कानून के ऊपर होने का दावा करती है। उन्होंने दोहराया कि संवैधानिक ढांचे के भीतर रहते हुए सभी संगठनों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
