पंजाब विधानसभा: मानसून सत्र से पहले अकाली दल को झटका, पहली बार बीएसी से बाहर

पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र से पहले शिरोमणि अकाली दल को बड़ा झटका लगा है। पहली बार पार्टी के किसी विधायक को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में जगह नहीं मिली है, जबकि इसमें आप, कांग्रेस और भाजपा के सदस्य शामिल हैं।

पंजाब की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है क्योंकि राज्य विधानसभा के आगामी मानसून सत्र की तैयारियां जोरों पर हैं। इस सत्र की शुरुआत से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पंजाब विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब शिरोमणि अकाली दल के किसी भी विधायक को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में जगह नहीं दी गई है। यह सत्र 3 अगस्त 2026 से शुरू होकर 10 अगस्त 2026 तक चलने वाला है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी विधानसभा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण समिति होती है जो यह सुनिश्चित करती है कि सदन की कार्यवाही कितने दिनों तक चलेगी और किस दिन किस विधायी कार्य या बिजनेस को सदन के पटल पर रखा जाएगा।

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी का नया स्वरूप

इस बार गठित की गई पांच सदस्यीय बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों को शामिल किया गया है। जानकारी के अनुसार, इस समिति में सत्ता पक्ष यानी आम आदमी पार्टी के तीन सदस्य शामिल हैं। विपक्ष की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष (LOP) प्रताप सिंह बाजवा को जगह मिली है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की ओर से अश्वनी कुमार शर्मा को इस समिति का हिस्सा बनाया गया है। शिरोमणि अकाली दल के किसी भी प्रतिनिधि का इस समिति में न होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि अब तक अकाली दल का कोई न कोई विधायक हमेशा इस कमेटी का हिस्सा रहा है।

अकाली दल के लिए बड़ा झटका और ऐतिहासिक संदर्भ

पिछले 4 साल से शिरोमणि अकाली दल की ओर से मनप्रीत सिंह अयाली इस महत्वपूर्ण कमेटी के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी उपस्थिति यह सुनिश्चित करती थी कि विधायी कार्यों के निर्धारण में पार्टी की राय शामिल रहे और हालांकि, विधानसभा स्पीकर की तरफ से इस साल में दूसरी बार गठित की गई इस कमेटी में अकाली दल के किसी भी विधायक को नहीं चुना गया है। विधानसभा चुनाव से पहले इसे पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। यह पहला मौका है जब अकाली दल को इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा गया है, जो सदन के एजेंडे को तय करने में मुख्य भूमिका निभाती है।

मानसून सत्र के मुख्य मुद्दे और संभावित हंगामा

पंजाब विधानसभा का यह मानसून सत्र 3 अगस्त 2026 से शुरू होकर 10 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इसमें मुख्य रूप से बेअदबी कानून में संशोधन, राज्य की कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़े अन्य नए विधेयकों एवं बिलों को पारित किया जाना शामिल है। बेअदबी कानून एक अत्यंत संवेदनशील और बड़ा मुद्दा है, जिसे लेकर सदन के भीतर भारी हंगामा होने के आसार जताए जा रहे हैं और सरकार इस सीमित समय में कई नए बिलों को पारित कराने की योजना बना रही है।

अकाल तख्त का हस्तक्षेप और विधायकों को निर्देश

सत्र शुरू होने से ठीक पहले अकाल तख्त ने शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और सदन के सभी सिख विधायकों को एक नया पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से अकाल तख्त ने सभी सिख विधायकों से अपील की है कि वे अपने धार्मिक दायित्व का पूरी निष्ठा से पालन करें। पत्र में विशेष रूप से जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 का जिक्र किया गया है। अकाल तख्त ने निर्देश दिया है कि इस अधिनियम में कोई भी बदलाव तभी स्वीकार किया जाना चाहिए, जब वह सिख समुदाय की भावनाओं और अकाल तख्त के आदेशों के पूर्णतः अनुरूप हो। इस पत्र के बाद सदन में इस संशोधन विधेयक पर होने वाली चर्चा और भी महत्वपूर्ण हो गई है।