राहुल गांधी का सीईसी ज्ञानेश कुमार पर हमला: 2023 के कानून और चुनाव धांधली पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी व्यवस्था को तबाह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने 2024 के चुनावों में धांधली का दावा करते हुए 2023 के उस कानून पर सवाल उठाए हैं जो चुनाव आयुक्त को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करता है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें देश की मतदान प्रणाली को नष्ट करने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। गांधी ने आरोप लगाया कि 2024 के आम चुनाव सहित हाल के सभी चुनावों में धांधली और हेरफेर की गई है। उन्होंने विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि ज्ञानेश कुमार का चयन स्वयं देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किया गया है। राहुल गांधी के अनुसार, यह चयन प्रक्रिया उस वोट चोरी की क्रोनोलॉजी का हिस्सा है जिसे सरकार अंजाम दे रही है।

ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चयन पर सवाल

राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि चुनावी व्यवस्था की तबाही के लिए सीधे तौर पर सीईसी ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि कुमार के नेतृत्व में वोटिंग सिस्टम को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। गांधी ने यह भी उल्लेख किया कि ज्ञानेश कुमार को लेकर दो अन्य आयुक्तों ने भी सवाल खड़े किए हैं, जो चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों या चिंताओं की ओर इशारा करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले 6 महीनों में सारा सच जनता के सामने आ जाएगा और दावा किया कि उनके पास वोट चोरी के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।

2023 का कानून और कानूनी सुरक्षा

गांधी की आलोचना का एक बड़ा हिस्सा 2023 में बनाए गए एक विशेष कानून पर केंद्रित था। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 2023 में ऐसा कानून क्यों बनाया गया जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। राहुल गांधी ने तर्क दिया कि बीजेपी सरकार द्वारा लाए गए इस कानून ने ज्ञानेश कुमार को कानूनी प्रणाली के दायरे से बाहर कर दिया है। इस कानून के माध्यम से सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि चुनावी गड़बड़ियों के गंभीर आरोपों के बावजूद सीईसी पर कोई जवाबदेही तय न की जा सके। गांधी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुँचाने वालों को बचाने का एक सुनियोजित प्रयास बताया।

एंटी-इनकंबेंसी का गायब होना

राहुल गांधी ने मौजूदा बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान राजनीतिक माहौल पर भी सवाल उठाए और उन्होंने कहा कि बीजेपी अक्सर 15 से 50 साल तक सत्ता में रहने का दावा करती है। अपने राजनीतिक परिवार के अनुभवों का हवाला देते हुए गांधी ने कहा कि भारत के इतिहास के सबसे बड़े नेताओं को भी एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का सामना करना पड़ा है। उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया, जिन्हें उन्होंने भारत की सबसे चर्चित नेता बताया, और कहा कि उनके खिलाफ भी एंटी-इनकंबेंसी थी। इसी तरह अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह को भी जनता के असंतोष का सामना करना पड़ा था।

मोदी-शाह सरकार के खिलाफ सवाल

कांग्रेस नेता ने आश्चर्य जताया कि मोदी-शाह की सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी पूरी तरह से गायब हो गई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कैसे बीजेपी सरकार लगातार 5 साल और फिर अगले 5 साल तक बिना किसी सत्ता विरोधी लहर के सत्ता में बनी हुई है। राहुल गांधी के अनुसार, यह स्थिति सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं लगती। उन्होंने दोहराया कि वोट चोरी की इस पूरी क्रोनोलॉजी और चुनाव व्यवस्था में की गई तबाही के लिए ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं और आने वाले समय में इस पूरे मामले का पर्दाफाश हो जाएगा।