राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 59 पेज की चार्जशीट और 101 सीडी पेश, सुनवाई टली

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कोर्ट ने 59 पन्नों की मुख्य चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। पुलिस ने 36039 पन्नों के दस्तावेज और 101 सीडी साक्ष्य के रूप में पेश की हैं। मामले में 133 गवाह बनाए गए हैं और अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है, जहां अदालत ने जांच टीम द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट पर औपचारिक रूप से संज्ञान ले लिया है। यह घटनाक्रम इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक बड़ा कदम है, जिससे पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों की व्यापकता का पता चलता है और 'लीगल एड डिफेंस काउंसिल' के माध्यम से आरोपियों का पक्ष रख रहे वकील कुल शेखर सिंह ने चार्जशीट की बारीकियों और मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की है।

साक्ष्यों का विशाल अंबार और गवाहों की सूची

जांच अधिकारी ने इस मामले में 59 पन्नों की एक मुख्य चार्जशीट दाखिल की है। हालांकि, इस मुख्य दस्तावेज के साथ पेश किए गए सहायक साक्ष्यों की संख्या बहुत अधिक है। पुलिस ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए अदालत में लगभग 36039 पन्नों के दस्तावेज और करीब 101 सीडी जमा की हैं। साक्ष्यों का यह विशाल संग्रह मंदिर के चढ़ावे की चोरी से जुड़ी जांच की जटिलता को दर्शाता है। इसके साथ ही, अभियोजन पक्ष ने इस पूरे मामले में 133 लोगों को गवाह के तौर पर सूचीबद्ध किया है, जो आने वाले समय में अपनी गवाही दर्ज कराएंगे।

कानूनी धाराओं में बदलाव और हटाए गए आरोप

वकील कुल शेखर सिंह के विवरण के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ शुरू में लगाई गई कुछ धाराओं में बदलाव किया है। चार्जशीट से धारा 305 और 306 को पूरी तरह से हटा दिया गया है। इसके अलावा, आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ पहले लगाई गई धारा 317(2) को भी हटा दिया गया है। हालांकि, यह धारा अन्य आरोपियों पर लागू रहेगी क्योंकि पुलिस ने उनसे बरामदगी होने का दावा किया है। चार्जशीट में धारा 316(5) को बरकरार रखा गया है, जो सरकारी कर्मचारियों से संबंधित है और पुरानी धारा 409 के समकक्ष मानी जाती है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1), 13(1)(a) और 13(2) को भी बरकरार रखा गया है।

बचाव पक्ष की आपत्तियां और गवाहों पर सवाल

बचाव पक्ष के वकील ने इन धाराओं को बरकरार रखने को चुनौती दी है और इन्हें जबरदस्ती थोपे गए आरोप बताया है। कुल शेखर सिंह का तर्क है कि उनके मुवक्किल सरकारी कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं आते हैं, इसलिए उन पर ये धाराएं लगाना तर्कसंगत नहीं है और सुनवाई के दौरान वकील ने गवाहों की सूची पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने इस मामले में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और ऐसे लोगों को गवाह बना दिया है जिन्हें वास्तव में आरोपी बनाया जाना चाहिए था। उल्लेखनीय है कि गवाहों की इस सूची में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े 4 लोग भी शामिल हैं।

अब 24 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

मामले के मुख्य आरोपी टीनू यादव और सुभाष की जमानत याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई होनी तय थी। लेकिन कोर्ट परिसर में वकीलों के भारी विरोध और हंगामे के कारण अदालती कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। इसके चलते अब अदालत इस मामले में 24 सितंबर को सुनवाई करेगी। अन्य 6 आरोपियों के संबंध में वकील ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने पहले उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, लेकिन वह आदेश तब आया था जब मामले में धाराएं 305 और 306 शामिल थीं। अब जब नई चार्जशीट से ये धाराएं हटा दी गई हैं, तो बचाव पक्ष परिस्थितियों में बदलाव का हवाला देते हुए दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की योजना बना रहा है। जरूरत पड़ने पर इस मामले को हाई कोर्ट में भी ले जाया जा सकता है।