राम मंदिर के पहले सीईओ बने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, जानें कितनी मिलेगी सैलरी और सुविधाएं

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है। उनकी सैलरी ट्रस्ट के साथ आपसी बातचीत के आधार पर तय की जाएगी। वायुसेना में 38 वर्षों का शानदार अनुभव रखने वाले मिश्रा मंदिर के प्रबंधन और सुरक्षा की कमान संभालेंगे।

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति की घोषणा बुधवार 2 सितंबर को की गई। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के एक अत्यंत सम्मानित और अनुभवी अधिकारी रहे हैं। उन्होंने देश की सेवा में 38 साल से अधिक का समय बिताया है और कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। उनकी नियुक्ति से मंदिर के दैनिक कामकाज और प्रबंधन में और अधिक कुशलता आने की उम्मीद है।

कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (एसवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम) भारतीय वायु सेना के एक सेवानिवृत्त एयर ऑफिसर हैं। अपने 38 साल से अधिक के लंबे और गौरवशाली करियर में उन्होंने वायु सेना के कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पदों पर कार्य किया है। उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं, जो भारतीय वायु सेना की सबसे महत्वपूर्ण कमानों में से एक है। इसके अलावा उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (एएसटीई) में चीफ टेस्ट पायलट और बाद में वहां के कमांडेंट के रूप में भी काम किया है।

उनके करियर के अन्य महत्वपूर्ण पदों में फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग, और वायु सेना मुख्यालय में डायरेक्टर (ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप), प्रिंसिपल डायरेक्टर (एएसआर) और असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) जैसे पद शामिल हैं। अपनी सेवानिवृत्ति से पहले वह इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ थे और इससे पहले उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’, ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ और ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया जा चुका है।

राम मंदिर सीईओ की सैलरी और मिलने वाली सुविधाएं

राम मंदिर के नए सीईओ की सैलरी को लेकर काफी चर्चा हो रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक शर्तों के अनुसार, 2026 में राम मंदिर सीईओ की सैलरी बातचीत यानी नेगोशिएबल आधार पर तय की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि सैलरी का कोई निश्चित सरकारी वेतनमान नहीं होगा, बल्कि ट्रस्ट के अधिकारी और एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा आपसी चर्चा के बाद इसे तय करेंगे। यह सैलरी पैकेज उनके प्रोफेशनल बैकग्राउंड, प्रशासनिक अनुभव और पिछले रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाएगा।

चूंकि वह एयर मार्शल जैसे उच्च पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, इसलिए उनका सैलरी पैकेज उच्च-स्तरीय कार्यकारी मानकों के अनुरूप होने की संभावना है। सैलरी के अलावा उन्हें कई अन्य सुविधाएं भी मिल सकती हैं। इसमें अयोध्या में रहने के लिए आवास, सरकारी वाहन, प्रशासनिक सुरक्षा और अन्य भत्ते शामिल हो सकते हैं और सीईओ की यह जिम्मेदारी काफी बड़ी है, जिसमें मंदिर के रोजाना के कार्यों का संचालन, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रबंधन और ट्रस्ट के वित्त का प्रबंधन शामिल है।

वायुसेना में कितनी मिलती थी सैलरी?

अगर एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की पिछली सैलरी की बात करें, तो भारतीय वायु सेना में एक एयर मार्शल को सैलरी लेवल 15 के तहत वेतन मिलता है। इस पद पर मूल वेतन लगभग 1 लाख 82 हजार 200 रुपये प्रति माह होता है। ध्यान रहे कि यह केवल मूल वेतन है और इसमें महंगाई भत्ता (डीए), परिवहन भत्ता और सैन्य सेवा वेतन (एमएसपी) जैसे अन्य भत्ते शामिल नहीं हैं। इन सभी भत्तों को जोड़ने पर कुल मासिक वेतन काफी अधिक हो जाता है और इसके अलावा पोस्टिंग के स्थान के आधार पर हाई एल्टीट्यूट या फ्लाइंग अलाउंस भी दिया जाता है। सेवानिवृत्ति के बाद इस रैंक के अधिकारियों को सरकार की ओर से कई तरह के पेंशन लाभ और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

सीईओ के रूप में मुख्य जिम्मेदारियां

राम मंदिर के सीईओ के रूप में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के पास कई महत्वपूर्ण चुनौतियां और जिम्मेदारियां होंगी। उन्हें मंदिर परिसर के समग्र प्रबंधन की देखरेख करनी होगी। इसमें सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखना, लाखों भक्तों की भीड़ को सुचारू रूप से संभालना और ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। मंदिर की सुरक्षा के लिए उन्हें विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और मंदिर की मर्यादा व सुरक्षा बनी रहे।