राम मंदिर ट्रस्ट को मिले 3 नए ट्रस्टी, जल्द होगा पहले सीईओ का औपचारिक ऐलान

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की है, जिनमें महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव शामिल हैं। इसके साथ ही ट्रस्ट के पहले सीईओ के चयन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है, जिसके लिए 5500 से अधिक आवेदकों में से छंटनी की गई है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में विस्तार करते हुए तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की गई है। यह महत्वपूर्ण निर्णय राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास मणिरामदास छावनी में आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान लिया गया। ट्रस्ट में शामिल होने वाले नए सदस्यों में दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव के नाम शामिल हैं। इन नियुक्तियों के माध्यम से ट्रस्ट ने विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।

नए ट्रस्टियों का परिचय

ट्रस्ट में शामिल किए गए नए सदस्यों में दिल्ली के महेश भागचंदका का नाम प्रमुख है, जो दिवंगत अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं और उनके साथ ही अयोध्या के स्थानीय निवासी मदन मोहन पांडेय को भी ट्रस्टी के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, शिकोहाबाद की निर्मला यादव को भी नए ट्रस्टी के रूप में बोर्ड में शामिल किया गया है। इन तीनों नए सदस्यों की नियुक्ति से ट्रस्ट के कार्यों में नई ऊर्जा और दृष्टिकोण आने की उम्मीद जताई जा रही है।

सीईओ पद के लिए अंतिम चयन

ट्रस्ट की इस बैठक का एक अन्य मुख्य एजेंडा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की नियुक्ति है। जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट को आज ही अपना पहला सीईओ मिल सकता है और इसकी औपचारिक घोषणा कुछ ही समय में की जा सकती है और सीईओ के चयन के लिए बनाई गई विशेष कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में तीन नामों की एक संक्षिप्त सूची (शॉर्टलिस्ट) शामिल है, जिस पर ट्रस्ट के पदाधिकारी अंतिम विचार-विमर्श कर रहे हैं।

रेस में शामिल प्रमुख नाम

सीईओ पद की दौड़ में वर्तमान में 4 प्रमुख नामों की चर्चा सबसे अधिक है। पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे का नाम इस रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। उनके साथ ही एक अन्य पूर्व आईपीएस अधिकारी परेश सक्सेना का नाम भी मजबूती से उभरा है। प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में योगेश्वर राम मिश्रा और दिनेश चंद्र सिंह के नामों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इन सभी उम्मीदवारों के पास प्रशासनिक कार्यों का लंबा अनुभव है, जो मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है।

चयन की जटिल प्रक्रिया

सीईओ के चयन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी और चुनौतीपूर्ण रही है। इसके लिए 3 सदस्यीय एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, सुरेश हावरे और विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल थे। इस पद के लिए कमेटी को 5500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदकों की छंटनी के लिए एक गूगल फॉर्म का उपयोग किया गया था, जिसमें 600 अंकों के विभिन्न प्रश्न पूछे गए थे। लगभग 3500 से अधिक लोगों ने इस फॉर्म को भरकर अपनी योग्यता का प्रमाण दिया था, जिसके आधार पर उनकी मार्किंग की गई थी।

अयोध्या में हुआ अंतिम साक्षात्कार

मार्किंग प्रक्रिया के दौरान 3500 आवेदकों में से केवल 108 लोग ही ऐसे थे, जिन्हें 600 में से 470 से अधिक अंक प्राप्त हुए। इन चयनित उम्मीदवारों का पहले वर्चुअल इंटरव्यू लिया गया, जिसके बाद 17 लोगों को अंतिम चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। इन 17 उम्मीदवारों को व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए विशेष रूप से अयोध्या बुलाया गया था। वहां उन्हें नेतृत्व क्षमता, अटूट आस्था, भविष्य की चुनौतियों को समझने की क्षमता और मंदिर की जटिल व्यवस्थाओं के प्रबंधन जैसे कड़े पैमानों पर परखा गया और इस गहन प्रक्रिया के बाद अंततः 3 नामों का चयन कर ट्रस्ट के पास भेजा गया है, जिनमें से किसी एक को सीईओ नियुक्त किया जाएगा।