एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, मिली मंजूरी

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। वे मंदिर के प्रशासन, सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम में, एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है। इस ऐतिहासिक निर्णय को आज हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में अंतिम रूप दिया गया, जहां उनकी नियुक्ति को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई। राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ के रूप में, एयर मार्शल मिश्रा मंदिर के प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन की व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे।

भारतीय वायु सेना में एक शानदार करियर

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा इस प्रतिष्ठित भूमिका में अनुभव का एक विशाल भंडार लेकर आए हैं। उन्होंने भारतीय वायु सेना में 39 वर्षों तक देश की सेवा की है। वह इसी वर्ष 30 अप्रैल को अपनी लंबी और गौरवशाली सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। अपनी सेवानिवृत्ति से पहले, वह भारतीय वायु सेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख (चीफ) के रूप में कार्यरत थे। उनका करियर असाधारण कौशल और वीरता का प्रमाण है, जिसे उनके 3000 घंटों के उड़ान अनुभव से समझा जा सकता है। अपनी सेवा के दौरान, उन्होंने 18 से अधिक विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों को उड़ाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

ऑपरेशनल उत्कृष्टता और वीरता का इतिहास

नवनियुक्त सीईओ का परिचालन सफलता का एक लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके लिए उन्हें उच्च स्तर पर सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त, टाइगर हिल और सफेद सागर ऑपरेशनों के दौरान उनके योगदान ने भारतीय वायु सेना के मिशनों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी परिचालन योजना और निष्पादन क्षमताओं ने उनके लगभग चार दशक लंबे करियर को विशिष्ट बनाया है।

वायु सेना में विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाएं

भारतीय वायु सेना में अपने कार्यकाल के दौरान, एयर मार्शल मिश्रा ने कई उच्च पदों पर सेवाएं दी हैं, जिनमें शामिल हैं: फाइटर स्क्वाड्रन (MiG-21) के कमांडिंग ऑफिसर, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में चीफ टेस्ट पायलट, और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (नासिक) में चीफ टेस्ट पायलट। उन्होंने बरेली में 15 विंग और पठानकोट में 18 विंग के एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी कार्य किया। उनकी प्रशासनिक और रणनीतिक भूमिकाओं में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर, प्रिंसिपल डायरेक्टर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स), और एयर हेडक्वार्टर्स में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) के रूप में सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने ASTE के कमांडेंट, डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग), और डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के पदों को भी सुशोभित किया। उनकी अंतिम प्रमुख नियुक्ति 1 जनवरी 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में थी।

प्रतिष्ठित पुरस्कार और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी विशिष्ट सेवा और वीरता को मान्यता देते हुए, उन्हें पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया था। उनके अन्य सम्मानों में साल 2024 में मिला अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में मिला विशिष्ट सेवा मेडल शामिल हैं। उनकी शैक्षणिक और व्यावसायिक ट्रेनिंग भी उतनी ही प्रभावशाली है। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला, एयर फोर्स एकेडमी डुंडीगल, और एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल बेंगलुरु से शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज मोंटगोमरी, अलबामा, USA और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज यूनाइटेड किंगडम से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है।