बॉम्बे हाई कोर्ट ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक बड़ा कानूनी झटका देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणियों से जुड़े मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय के इस फैसले के बाद अब राहुल गांधी को इस मामले में निचली अदालत की कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला कई साल पुराना है और एक राजनीतिक रैली के दौरान दिए गए बयानों पर आधारित है।
हाई कोर्ट का फैसला और कानूनी आदेश
न्यायमूर्ति एन. आर. बोरकर ने मंगलवार को राहुल गांधी द्वारा दायर याचिका पर अपना आदेश सुनाया और राहुल गांधी ने अपनी याचिका में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी किए गए समन को चुनौती दी थी और पूरे मानहानि मामले को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया, जिससे शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
अदालत ने याचिका खारिज करने के साथ ही राहुल गांधी को एक सीमित राहत भी प्रदान की है। न्यायमूर्ति बोरकर ने उन्हें मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से 6 सप्ताह की छूट दी है। यह राहत इसलिए दी गई है ताकि राहुल गांधी बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें। इस 6 सप्ताह की अवधि के दौरान उन्हें निचली अदालत में पेश होने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उन्हें अपनी कानूनी रणनीति तैयार करने का समय मिल जाएगा।
क्या है पूरा मामला और शिकायत के आधार
यह पूरा विवाद सितंबर 2018 का है, जब राहुल गांधी राजस्थान में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। आरोप है कि इस रैली के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ ऐसी टिप्पणियां की थीं जिन्हें मानहानिकारक माना गया और भाजपा नेता महेश श्रीश्रीमल ने इन टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया।
महेश श्रीश्रीमल ने गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का मुख्य आरोप यह था कि राहुल गांधी के बयानों के कारण प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचा है। शिकायत में यह भी कहा गया कि इन बयानों के बाद विभिन्न समाचार चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित रूप से ट्रोल किया गया और उनके खिलाफ अपमानजनक बातें की गईं। इसी आधार पर मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था।
कानूनी प्रक्रिया और भविष्य की स्थिति
राहुल गांधी ने गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी दलील थी कि यह मामला रद्द किया जाना चाहिए, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अब जबकि हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है, तो मामला वापस निचली अदालत के अधिकार क्षेत्र में आ गया है।
आने वाले 6 हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में राहुल गांधी को कोई राहत प्रदान करता है। यदि सुप्रीम कोर्ट से कोई रोक नहीं लगती है, तो राहुल गांधी को गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही में शामिल होना होगा। यह मामला भारतीय राजनीति में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानहानि के कानूनों के बीच के संतुलन को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
