राजस्थान में करोड़ों ग्रामीणों और पंचायत चुनाव का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है और भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य की बहुप्रतीक्षित पंचायत परिसीमन प्रक्रिया को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ ही, राज्य में पंचायत चुनाव कराने की राह में आ रही सभी कानूनी बाधाएं अब हमेशा के लिए समाप्त हो गई हैं। यह निर्णय उन सभी लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो। लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ग्रामीणों की दलीलें
मुख्य न्यायाधीश (CJI) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने रेवेन्यू गांव सिंहानिया और अन्य ग्रामीणों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है। इन याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा किए गए नए परिसीमन और पंचायतों के पुनर्गठन को चुनौती दी थी। ग्रामीणों ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि उनके गांवों को ऐसे दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों और काफी दूरी पर स्थित अन्य पंचायतों से जोड़ दिया गया है, जहां सड़क संपर्क का अभाव है और यह दूरी संबंधी नियमों का भी उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया, जिससे परिसीमन प्रक्रिया को कानूनी वैधता मिल गई।
राज्य सरकार का मजबूत पक्ष
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष अत्यंत मजबूती से प्रस्तुत किया और उन्होंने न्यायालय को स्पष्ट रूप से बताया कि परिसीमन की प्रक्रिया केवल दूरी के आधार पर नहीं की गई है, बल्कि इसमें जनसंख्या घनत्व, प्रशासनिक सुगमता और जिला कलेक्टर की विस्तृत रिपोर्ट जैसे कई महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखा गया है।
शर्मा ने यह भी बताया कि पूरी परिसीमन प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक कानूनी रूप से सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी मतदाता सूचियां तैयार करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं, जो चुनावी तैयारियों की गंभीरता को दर्शाता है और
15 अप्रैल 2026 की अंतिम डेडलाइन
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले की पुष्टि की है, जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि सभी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में संपन्न करा लिए जाएं। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब परिसीमन प्रक्रिया को दोबारा नहीं खोला जाएगा। न्यायालय ने तर्क दिया कि परिसीमन प्रक्रिया को फिर से खोलने से पूरे। राज्य का चुनावी कार्यक्रम बुरी तरह से प्रभावित होगा और इससे अनावश्यक देरी होगी। यह निर्णय चुनावी प्रक्रिया में स्थिरता और निश्चितता लाने के उद्देश्य से लिया गया है।
ग्राम पंचायतों को मिली सीमित छूट
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम पंचायतों को एक सीमित छूट प्रदान की है। न्यायालय ने कहा है कि यदि किसी ग्राम पंचायत को अपने पंचायत मुख्यालय (Headquarter) के स्थान को लेकर कोई विशेष शिकायत है, तो वे अपनी शिकायत सक्षम प्राधिकारी को एक आवेदन के माध्यम से प्रस्तुत कर सकते हैं। यह छूट ग्रामीणों को अपनी स्थानीय समस्याओं को उठाने का अवसर देती है। लेकिन, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस तरह के किसी भी आवेदन या शिकायत से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया या चल रहे परिसीमन पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगेगी। इसका अर्थ है कि चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही होंगे, भले ही मुख्यालय संबंधी शिकायतें विचाराधीन हों। इस फैसले से राजस्थान में पंचायत चुनावों का बिगुल बजने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।