राजस्थान की राजनीति में एक समय सबसे बड़ा विवाद रही ‘लाल डायरी’ का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा के बीच हाल ही में हुई एक शिष्टाचार भेंट ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। यह मुलाकात जयपुर में कांग्रेस नेता और राजस्थान पर्यटन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ के पुत्र के सगाई समारोह के दौरान हुई। कार्यक्रम में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब दोनों नेता आमने-सामने आए, तो माहौल में कड़वाहट के बजाय मुस्कुराहट और पुरानी यादों का मेल दिखाई दिया। अशोक गहलोत ने राजेंद्र गुढ़ा का हाथ थामकर मजाकिया लहजे में ‘लाल डायरी’ का जिक्र किया, जिससे वहां मौजूद अन्य अतिथि भी हैरान रह गए।
सगाई समारोह में शिष्टाचार और पुरानी यादें
धर्मेंद्र राठौड़ के आवास पर आयोजित इस निजी समारोह में राजस्थान की राजनीति के कई दिग्गज जुटे थे। इसी दौरान जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वहां पहुंचे, तो उनका सामना राजेंद्र गुढ़ा से हुआ और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को किनारे रखते हुए गहलोत ने गुढ़ा का हाथ पकड़ा और मुस्कुराते हुए उनसे बातचीत की। इस दौरान गहलोत ने गुढ़ा का परिचय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मुकुल वासनिक से भी करवाया। कार्यक्रम के मेजबान धर्मेंद्र राठौड़ ने इस मौके पर पुरानी बातों को याद करते हुए कहा कि राजेंद्र गुढ़ा ने सरकार बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इसके बाद गहलोत और गुढ़ा को एक ही मेज पर बैठकर रात्रि भोज करते हुए भी देखा गया। दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई, जिसमें गुढ़ा ने गहलोत के स्वास्थ्य का हालचाल भी जाना।
लाल डायरी विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
लाल डायरी का विवाद जुलाई 2023 में उस समय शुरू हुआ था जब राजेंद्र गुढ़ा ने विधानसभा के पटल पर एक लाल रंग की डायरी लहराई थी। गुढ़ा का दावा था कि यह डायरी धर्मेंद्र राठौड़ के आवास पर आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान उन्होंने जलने से बचाई थी। उनके अनुसार, इस डायरी में अशोक गहलोत सरकार के वित्तीय लेन-देन और चुनावी प्रबंधन से जुड़े कई संवेदनशील राज दर्ज थे। इस घटना के तुरंत बाद गहलोत ने गुढ़ा को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया था। विधानसभा में इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ था और गुढ़ा को सदन से बाहर निकाल दिया गया था। भारतीय जनता पार्टी ने उस समय इस मुद्दे को भ्रष्टाचार के बड़े प्रमाण के रूप में पेश किया था और 2023 के विधानसभा चुनावों में यह एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बना था।
गहलोत सरकार के संकट में गुढ़ा की भूमिका
राजेंद्र गुढ़ा और अशोक गहलोत के रिश्तों में उतार-चढ़ाव का लंबा इतिहास रहा है। साल 2020 में जब सचिन पायलट की बगावत के कारण अशोक गहलोत की सरकार संकट में थी, तब राजेंद्र गुढ़ा उन 6 विधायकों में शामिल थे जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इन विधायकों के समर्थन के कारण ही गहलोत अपनी सरकार बचाने में सफल रहे थे। इसके पुरस्कार स्वरूप गुढ़ा को राज्य मंत्री बनाया गया था और हालांकि, समय के साथ गुढ़ा और गहलोत के बीच दूरियां बढ़ती गईं। गुढ़ा ने अपनी ही सरकार के खिलाफ कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर बयानबाजी शुरू कर दी थी, जिसका चरम लाल डायरी विवाद के रूप में सामने आया।
विधानसभा में लाल डायरी को लेकर हुआ हंगामा
24 जुलाई 2023 को राजस्थान विधानसभा में जो दृश्य देखा गया, वह प्रदेश के संसदीय इतिहास में विरल था। राजेंद्र गुढ़ा लाल डायरी लेकर सदन के बीचों-बीच पहुंच गए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस दौरान कांग्रेस के अन्य विधायकों और गुढ़ा के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। गुढ़ा ने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा था कि डायरी के कुछ पन्ने धर्मेंद्र राठौड़ की लिखावट में हैं और उनमें क्रिकेट संघ के चुनावों से लेकर राज्यसभा चुनावों तक के खर्चों का विवरण है। हालांकि, अशोक गहलोत ने हमेशा इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि ऐसी किसी डायरी का कोई अस्तित्व नहीं है।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और मुलाकात के मायने
विधानसभा चुनाव 2023 में हार के बाद राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और अब भाजपा की सरकार है। राजेंद्र गुढ़ा ने शिवसेना (शिंदे गुट) के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब सत्ता से बाहर होने के बाद गहलोत और गुढ़ा की इस सौहार्दपूर्ण मुलाकात को राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं और हालांकि दोनों नेताओं ने इसे एक पारिवारिक कार्यक्रम की औपचारिक मुलाकात बताया है, लेकिन जिस तरह से गहलोत ने खुद लाल डायरी का जिक्र किया, उसने यह संकेत दिया है कि अब वे इस विवाद को पीछे छोड़ना चाहते हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या यह मुलाकात भविष्य में किसी नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत हो सकती है।
