Russia-US Tensions / रूस ने समंदर में उतारा ‘यमराज’, अमेरिका ने एक्टिव किया डूम्सडे विमान: क्या तीसरे विश्व युद्ध की आहट?

रूस और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध का खतरा वेनेजुएला संकट पर बढ़ गया है। पुतिन की बेलगोरोद परमाणु पनडुब्बी की अटलांटिक में तैनाती और अमेरिका के डूम्सडे विमान की सक्रियता ने तनाव चरम पर पहुंचा दिया है। रूसी तेल टैंकरों की जब्ती से शुरू हुई जुबानी जंग अब वैश्विक महाविनाश की आहट दे रही है।

रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को एक बार फिर परमाणु युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। वेनेजुएला संकट को लेकर दोनों महाशक्तियों के बीच टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक महाविनाश की आशंकाएं गहरा गई हैं और 2026 में इन दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच सीधा टकराव होने की बात कही जा रही है, और इससे पहले ही दोनों ओर से तीखी बयानबाजी और सैन्य तैनाती ने माहौल को बेहद गंभीर बना दिया है।

वेनेजुएला बना टकराव का केंद्र

इस पूरे विवाद के केंद्र में वेनेजुएला है, जो लंबे समय से भू-राजनीतिक खींचतान का शिकार रहा है। यह वही वेनेजुएला है, जिसके राष्ट्रपति को एक बार अमेरिकी कूटनीति के तहत आधी रात उनके घर से उठवा लिया गया था, जिसे 'किडनैप कूटनीति' कहा गया। वेनेजुएला चीन और रूस जैसे देशों को भारी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति करता रहा है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, चीन इस समुद्री मार्ग से रूस से सस्ता तेल खरीद रहा था, जिसे अमेरिका अब बंद करना चाहता है। इसी पृष्ठभूमि में, अमेरिकी सेना ने अटलांटिक महासागर में रूसी तेल टैंकरों को जब्त कर लिया, जिसने पुतिन के गुस्से को भड़का दिया।

रूसी तेल टैंकरों की जब्ती और पुतिन का गुस्सा

अमेरिकी कार्रवाई ने रूस को सीधे तौर पर चुनौती दी है। अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक में रूसी तेल टैंकर 'बेला-1' को जब्त कर लिया, जिसका दो हफ्तों तक पीछा किया गया था और अमेरिका ने इस टैंकर पर प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। 'बेला-1' के अलावा, अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में 'एम/टी सोफिया' टैंकर पर भी नियंत्रण पा लिया। इन दोनों टैंकरों को अमेरिकी कोस्ट गार्ड ब्रिटेन ले जा रहे हैं, और ब्रिटेन ने इस ऑपरेशन में अमेरिका को खुफिया और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने का दावा किया है और यह पहली बार था जब अमेरिका ने रूसी समुद्री संपत्ति पर सीधा कब्जा किया, जिसे पुतिन के लिए एक बड़ी बेइज्जती माना जा रहा है। ये दोनों टैंकर वेनेजुएला से कच्चा तेल लेकर चीन जाने वाले थे, जिससे चीन-रूस के तेल व्यापार को भी बड़ा झटका लगा है। क्रेमलिन में इस कार्रवाई को लेकर भारी नाराजगी है, और इसी के जवाब में रूस ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

रूसी तेल टैंकरों की सुरक्षा और अमेरिकी प्रकोप का जवाब देने के लिए, पुतिन ने वेनेजुएला के पास अटलांटिक महासागर में परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत भेजे हैं। इन रूसी नॉर्दर्न फ्लीट का हिस्सा होने के बावजूद, सबसे ज्यादा चर्चा उस पनडुब्बी की हो रही है, जिसे समंदर का ‘यमराज’ कहा जाता है। यह रूसी परमाणु पनडुब्बी बीएस-329 बेलगोरोद है, जो दुनिया की सबसे लंबी और रहस्यमयी पनडुब्बी मानी जाती है। इसमें 100 मेगाटन न्यूक्लियर पेलोड भरा है और यह दुनिया की इकलौती सुपर टॉरपीडो, अंडरवाटर ड्रोन पोसाइडन ले जाने में सक्षम है। इस सबमरीन से पोसाइडन को लॉन्च करके रूस समुद्र के नीचे 500 मीटर ऊंची रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा कर सकता है, जो अमेरिका के तटीय शहरों को चुटकियों में कब्रिस्तान में बदल सकती है। इस सुनामी से फैले रेडिएशन के कारण कई वर्षों तक उन क्षेत्रों में इंसान का कदम रखना भी नामुमकिन हो सकता है। कहा जाता है कि इस परमाणु पनडुब्बी का तोड़ दुनिया के किसी भी देश के पास। नहीं है, यहां तक कि अमेरिका के पास भी नहीं, जिससे अमेरिका में डर का माहौल है।

अमेरिका ने एक्टिव किया ‘डूम्सडे विमान’

वेनेजुएला के करीब रूसी परमाणु पनडुब्बी की हलचल से अमेरिका में खलबली मच गई है। इसी के जवाब में, अमेरिका ने अपने ‘डूम्सडे विमान’ को सक्रिय कर दिया है। यह विशालकाय विमान बोइंग ई-4बी नाइटवॉच है, जिसे वाशिंगटन डीसी के बाहर कैंप स्प्रिंग्स एयरफील्ड में उतारा गया है और इस विमान का इस्तेमाल आखिरी बार 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के समय किया गया था, और तब से इसे केवल बेहद संवेदनशील स्थितियों में ही सक्रिय किया जाता है।

डूम्सडे विमान की खासियतें

यह विमान परमाणु युद्ध के समय एक हवाई कमांड सेंटर के रूप में कार्य करता है। यह बहुत ही लो फ्रीक्वेंसी और हाई फ्रीक्वेंसी एंटेना से लैस है, जो परमाणु संघर्ष के दौरान भी वैश्विक संचार बनाए रखता है और इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह परमाणु विस्फोट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स जैसे खतरों को झेल सके। यह एयरक्राफ्ट सीधे न्यूक्लियर पनडुब्बियों, बॉम्बर्स और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) साइलो से संपर्क कर सकता है। इसका मतलब है कि इस प्लेन में बैठकर अमेरिकी राष्ट्रपति दुश्मन देश पर न्यूक्लियर मिसाइल लॉन्च करने का आदेश दे सकते हैं। यह एयरक्राफ्ट इस बात को सुनिश्चित करता है कि अमेरिकी सेना और राष्ट्रपति, रक्षा सचिव के साथ शीर्ष सैन्य कमांडर, जमीन पर मौजूद सुविधाएं नष्ट होने पर भी अमेरिकी सेनाओं को कमांड और कंट्रोल कर सकें और बोइंग ई-4बी नाइटवॉच एक उड़ता किला है, जो कई दिनों तक आसमान में रह सकता है क्योंकि इसमें हवा में ही ईंधन भरने की तकनीक है और इसमें एक समय में 110 से ज़्यादा लोग सवार हो सकते हैं। हालांकि, एक आम गलतफहमी है कि यह न्यूक्लियर हथियार भी लॉन्च कर सकता है,। जबकि यह केवल एक कमांड सेंटर है, न कि हथियार लॉन्च करने वाला कोई प्लेन।

परमाणु युद्ध की धमकी और जुबानी जंग

रूस और अमेरिका के बीच जुबानी जंग भी चरम पर है। रूसी स्टेट ड्यूमा की रक्षा समिति के पहले डिप्टी हेड और पुतिन के करीबी एलेक्सी जुरालेव ने अमेरिका को जोरदार अंदाज़ में धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पर टॉरपीडो से हमला कर दो, परमाणु बम गिरा। दो, या फिर अटलांटिक में अमेरिका की कुछ नावों को हमला करके डुबा दो। अमेरिका ने भी करारा जवाब दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मॉर्को रुबियो ने कहा कि पूरा पश्चिमी गोलार्ध अमेरिका का इलाका है और वेनेजुएला को विरोधी देशों का ऑपरेटिंग हब नहीं बनने देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वेनेजुएला के तेल पर दुश्मनों का कब्जा नहीं होने देंगे। यह जुबानी फायरिंग, सैन्य तैनाती और तेल टैंकरों की जब्ती ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां तेल के खेल से परमाणु युद्ध भी छिड़ सकता है। दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव बहुत ज्यादा है, और वैश्विक शांति के लिए यह एक गंभीर खतरा है।