रामायण की सीता बनने के लिए साई पल्लवी ने अपनाया आध्यात्मिक रास्ता

दिल्ली में आयोजित प्रथम संकल्प कार्यक्रम में साई पल्लवी ने माता सीता का किरदार निभाने के अपने अनुभव और आध्यात्मिक तैयारी के बारे में विस्तार से बताया।

बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण: पार्ट 1 के प्रमोशन की भव्य शुरुआत शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रथम संकल्प इवेंट के साथ हुई। इस विशेष कार्यक्रम ने फिल्म के प्रचार अभियान का शंखनाद किया, जिसमें फिल्म की मुख्य स्टारकास्ट और क्रू के साथ-साथ सिनेमा और आध्यात्मिकता जैसे विभिन्न क्षेत्रों की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं। यह आयोजन न केवल फिल्म के बारे में जानकारी देने का एक मंच था, बल्कि इसने फिल्म से जुड़े कलाकारों के भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव को भी प्रदर्शित किया।

सितारों और आध्यात्मिक हस्तियों का संगम

नई दिल्ली में आयोजित इस प्रथम संकल्प कार्यक्रम में फिल्म जगत और आध्यात्मिक जगत के दिग्गजों का जमावड़ा लगा। इस दौरान फिल्म की टीम ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए और कार्यक्रम के दौरान साउथ के सुपरस्टार यश ने बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर की जमकर तारीफ की, जिससे फिल्म की टीम के बीच आपसी सम्मान और तालमेल की झलक मिली। निर्देशक नितेश तिवारी ने भी इस अवसर पर फिल्म के निर्माण और कलाकारों के चयन को लेकर अपने विचार साझा किए, जिससे दर्शकों में फिल्म के प्रति उत्सुकता और बढ़ गई।

माता सीता के किरदार पर साई पल्लवी के विचार

इवेंट के दौरान जब दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साई पल्लवी से रामायण में माता सीता का किरदार निभाने के उनके अनुभव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही भावुक और गहराई से अपनी बात रखी। साई पल्लवी ने कहा कि एक अभिनेता के लिए इस तरह के रोल मिलना बिल्कुल भी आसान नहीं होता है, क्योंकि किसी देवी का किरदार निभाना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी और चुनौतीपूर्ण काम है। उन्होंने बताया कि इस तरह के महान कार्य को बेहतरीन बनाने के लिए एक ऐसी टीम की आवश्यकता होती है जो अपना सब कुछ न्योछावर करने के लिए तैयार हो। साई पल्लवी ने विनम्रता से कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने सीता मां का रोल निभाने का फैसला खुद किया, बल्कि वह इसे अपना सौभाग्य मानती हैं कि उन्हें यह अवसर प्राप्त हुआ।

आध्यात्मिक तैयारी और ध्यान का मार्ग

साई पल्लवी ने अपनी तैयारी के विशेष तरीके के बारे में बताते हुए कहा कि यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसके लिए आप सामान्य रूप से कोशिश करें या जिसे पहले से लिखकर तय कर लें कि इसे कैसे निभाना है। उन्होंने एक आध्यात्मिक मार्ग चुना और अभिनेत्री ने साझा किया कि वह बैठकर ध्यान करती थीं और प्रार्थना करती थीं कि सीता मां, आप मेरे जरिए अभिनय करें। मेरे जरिए जो कुछ भी पर्दे पर आए, वही हो जो आप इस फिल्म के लिए चाहती हैं। उन्होंने खुद को पूरी तरह से उस दिव्य शक्ति को समर्पित कर दिया ताकि उनका अभिनय स्वाभाविक और सच्चा लग सके।

जीवनशैली में बदलाव और विचारों की शुद्धता

किरदार की गहराई को समझने के लिए साई पल्लवी ने अपनी जीवनशैली और मानसिक स्थिति पर भी काम किया। उन्होंने बताया कि रोल निभाते समय उन्होंने खुद को जितना संभव हो सके शुद्ध बनाए रखने का प्रयास किया। उन्होंने विशेष रूप से अपने विचारों की शुद्धता पर जोर दिया ताकि सब कुछ न्यूट्रल रहे। उनका मानना था कि विचारों में स्पष्टता और शुद्धता होने से ही वह पर्दे पर अपना सबसे अच्छा और वास्तविक रूप दिखा सकती हैं। उन्होंने खुद को एक माध्यम के रूप में तैयार किया ताकि माता सीता के गुणों को आत्मसात किया जा सके।

निर्देशक नितेश तिवारी का नजरिया

फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी ने भी साई पल्लवी और रणबीर कपूर की जोड़ी की काफी सराहना की। उन्होंने बताया कि एक निर्देशक के तौर पर वह कलाकारों में उन पात्रों की आत्मा को ढूंढ रहे थे। नितेश तिवारी ने कहा कि अभिनेता की आंखें सच बयां करती हैं और उन्होंने रणबीर की आंखों में भगवान राम और साई की आंखों में माता सीता की छवि देखी है। उन्होंने कहा कि जिस ईमानदारी और सच्चाई की उन्हें तलाश थी, वह उन्हें इन दोनों कलाकारों में मिली। निर्देशक के अनुसार, फिल्म में उन्हें साई और रणबीर नहीं, बल्कि साक्षात सीता और राम दिखाई देते हैं।