Parliament Winter Session / संसद में विपक्ष का लगातार दूसरे दिन हंगामा, 'वोट चोर-गद्दी छोड़' के नारों से गूंजा सदन

संसद में विपक्ष ने लगातार दूसरे दिन 'SIR' और 'वोट चोरी' के आरोपों पर जोरदार हंगामा किया। लोकसभा और राज्यसभा में कार्यवाही बाधित हुई, जिससे दोनों सदन दोपहर 2 बजे तक स्थगित करने पड़े। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकतंत्र बचाने के लिए विरोध को आवश्यक बताया।

संसद में विपक्ष का लगातार दूसरे दिन जोरदार प्रदर्शन जारी रहा, जिससे लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही बाधित हुई। विपक्षी सांसदों ने 'SIR' और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे सदन में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा

लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने एकजुट होकर नारेबाजी शुरू कर दी। 'वोट चोर- गद्दी छोड़' जैसे नारे लगाते हुए कुछ सांसद वेल तक पहुंच गए, जिससे सदन में शोरगुल बढ़ गया। स्पीकर ने इस हंगामे के बावजूद प्रश्नकाल जारी रखने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष लगातार 20 मिनट तक अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करता रहा और इस स्थिति के कारण, लोकसभा की कार्यवाही को पहले 12 बजे तक और फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इसी तरह का नजारा राज्यसभा में भी देखने को मिला, जहां विपक्षी सांसदों ने 'SIR' के मुद्दे पर। हंगामा और नारेबाजी जारी रखी, जिसके चलते राज्यसभा को भी दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

लोकतंत्र की रक्षा के लिए विरोध आवश्यक: खड़गे

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद। में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि 'SIR' एक अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक विषय है जिस पर सरकार को तुरंत चर्चा करनी चाहिए। खड़गे ने राज्यसभा में 'SIR' पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए कहा कि यह एक अर्जेंट विषय है और इस पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए। विपक्ष ने सुबह 10:30 बजे संसद परिसर में मकर द्वार के सामने भी लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन किया, अपनी मांग दोहराते हुए कि सरकार 'SIR' पर फौरन चर्चा करे।

सरकार का रुख और चुनावी सुधारों पर चर्चा

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में बताया कि। सरकार 'SIR' और चुनावी सुधारों पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे इस पर कोई समय सीमा न थोपें। रिजिजू ने कहा कि सरकार ने इस पर परामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने विपक्ष के 'समय बताओ' के तरीके पर आपत्ति जताई। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष ने यह तर्क भी दिया है कि यदि सरकार 'SIR' शब्द का उपयोग नहीं करना चाहती,। तो वह 'इलेक्टोरल रिफॉर्म' या किसी अन्य उपयुक्त नाम का उपयोग करके विषय को कार्यवाही में सूचीबद्ध कर सकती है। ऐसी संभावना है कि सरकार इस तर्क पर सहमत हो। सकती है और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में अपना रुख रखेगी।

सांसदों के तीखे बयान

संसद में चल रहे गतिरोध के बीच, कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। रिजिजू ने कहा था कि 'विपक्ष सदन को न चलने देने के बहाने ढूंढता है', जिस पर चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा, 'अरे तुम नालायक हो तो हम क्या करें, तुमको चलाना नहीं आता तो हम क्या करें। हम मुद्दा भी ना उठाएं। हम सांसद हैं और लोगों की आवाज उठाना हमारा कर्तव्य है और ' यह बयान संसद में चल रहे राजनीतिक घमासान को और गहरा करता है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

वंदे मातरम् पर 10 घंटे की चर्चा संभव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार 'वंदे मातरम्' के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सदन में इस पर 10 घंटे की चर्चा करा सकती है। यह बहस गुरुवार और शुक्रवार को होने की संभावना है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं। 30 सितंबर को राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में सत्तारूढ़ दल के कई सदस्यों ने इस चर्चा का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह चर्चा संसद के मौजूदा सत्र में एक महत्वपूर्ण एजेंडा हो सकती है, जो। 'SIR' पर चल रहे गतिरोध के बीच एक अलग विषय पर ध्यान केंद्रित करेगी।

संसद की कार्यवाही बार-बार स्थगित

लोकसभा में दोपहर 12 बजे कार्यवाही फिर से शुरू हुई, लेकिन विपक्ष ने 'SIR' पर चर्चा की मांग को लेकर फिर से हंगामा शुरू कर दिया। पीठासीन अधिकारी पीसी मोहन ने स्थिति को देखते हुए कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। राज्यसभा में भी यही स्थिति रही, जहां हंगामे के बाद कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया और यह लगातार दूसरा दिन है जब संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों के कारण बाधित हुई है, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में देरी हो रही है। विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा हुआ है कि 'SIR' पर तत्काल और विस्तृत चर्चा। होनी चाहिए, जबकि सरकार प्रक्रियागत नियमों का पालन करने पर जोर दे रही है।

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