संसद के बजट सत्र के छठे दिन लोकसभा में अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिले, जिसके परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति के अभिभाषण पर होने वाला संबोधन स्थगित कर दिया गया। मंगलवार शाम 5 बजे निर्धारित यह संबोधन विपक्ष के सुनियोजित हंगामे और महिला सांसदों के कड़े विरोध की भेंट चढ़ गया। विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए सदन के भीतर आक्रामक रुख अपनाया, जिससे कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना असंभव हो गया। अब प्रधानमंत्री बुधवार को राज्यसभा में अपना पक्ष रखेंगे, जिससे संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है।
विपक्ष की रणनीति और सदन में विरोध का स्वरूप
संसदीय सूत्रों के अनुसार, विपक्षी गठबंधन ने प्रधानमंत्री के संबोधन को बाधित करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की थी और सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी महिला सांसदों ने मोर्चा संभाल लिया और प्रधानमंत्री की कुर्सी के समीप पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। इन सांसदों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर सरकार विरोधी नारे लिखे थे। बताया जा रहा है कि विपक्ष की रणनीति के तहत केवल चार वरिष्ठ सांसदों को अपनी सीटों पर बैठना था, जबकि शेष सभी सदस्यों को सदन के बीचों-बीच (वेल) आकर प्रदर्शन करना था। इस 'करो या मरो' की स्थिति ने सदन के भीतर गतिरोध को गहरा कर दिया।
विफल रही सुलह की कोशिशें और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
सदन में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से पर्दे के पीछे कई प्रयास किए गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं के साथ लगभग तीन घंटे तक बातचीत की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा, जिसके बाद सरकार ने प्रधानमंत्री का संबोधन टालने का निर्णय लिया और इस घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार महिला सांसदों के विरोध से डर गई है। वहीं, सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर महिलाओं को ढाल बनाकर संसदीय कार्यवाही में बाधा डाल रहा है।
संसद में 'किताब बनाम किताब' का नया विवाद
आज सदन में एक नया विवाद तब शुरू हुआ जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' लेकर पहुंचे। उन्होंने इस किताब के माध्यम से सरकार की सैन्य नीतियों पर सवाल उठाए। इसके जवाब में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार पर लिखी गई पुरानी किताबों का हवाला देते हुए पलटवार किया। दुबे ने सोनिया गांधी और इंदिरा गांधी से संबंधित कुछ विवादित संदर्भों का उल्लेख किया, जिस पर सदन में भारी शोर-शराबा हुआ। स्पीकर द्वारा बार-बार टोकने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग जारी रही।
भारत-अमेरिका व्यापार सौदे और अन्य ज्वलंत मुद्दे
सदन में केवल आंतरिक राजनीति ही नहीं, बल्कि विदेश नीति और व्यापारिक समझौतों पर भी क्लेश देखने को मिला। विपक्ष ने भारत और अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड डील को लेकर सरकार पर 'सरेंडर' करने का आरोप लगाया। सांसदों ने दावा किया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में देश के हितों से समझौता कर रही है। इसके अलावा, संसद परिसर के मकर द्वार पर राहुल गांधी और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें 'गद्दार' और 'देश के दुश्मन' जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया। विश्लेषकों के अनुसार, संसद में जारी यह टकराव आने वाले दिनों में और तीव्र होने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने रुख पर अडिग हैं।
