फ्लाईदुबई विमान हादसे की जांच के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात के बाद अब सऊदी अरब ने भी इस पूरे प्रकरण की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। सऊदी अरब का तर्क है कि जब ओमानी सह-पायलट ने विमान को क्रैश कराने का कथित प्रयास किया था, उस समय विमान सऊदी के वायुक्षेत्र में ही मौजूद था। इसके अलावा, विमान की सुरक्षित लैंडिंग भी सऊदी अरब की धरती पर ही हुई थी, जिसके आधार पर रियाद ने इस मामले में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
सऊदी अरब की जांच और तकनीकी पहलू
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की इस जांच ने पूरे मामले को एक नई दिशा दे दी है। अब तक इस हादसे की कानूनी और तकनीकी जांच मुख्य रूप से यूएई की एजेंसियों द्वारा की जा रही थी, लेकिन सऊदी के इस कदम से मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी गंभीर हो गया है और सबसे दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब ने इस हादसे के लगभग 10 दिन बीत जाने के बाद अपनी जांच की घोषणा की है। सऊदी अरब मुख्य रूप से इस घटना के तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा और इसके तहत सऊदी यह जानने की कोशिश करेगा कि जब सह-पायलट ने मुख्य पायलट पर हमला किया, तब क्या विमान पूरी तरह सुरक्षित था?
- 1. ओमानी पायलट को यूएई ने किस आधार पर नौकरी पर रखा था? क्या भर्ती के समय उसके बैकग्राउंड की सही तरीके से जांच की गई थी?
- 2. क्या फ्लाइट को सुरक्षित रखने के लिए सिस्टम में कोई वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद थी?
- 3. अगर विमान वास्तव में क्रैश हो जाता, तो इससे सऊदी अरब को जान-माल का कितना नुकसान हो सकता था?
- 4. क्या इस पूरी घटना में गलती सिर्फ ओमानी पायलट की थी या फिर पूरे एयरलाइन सिस्टम में ही कोई बड़ी खामी थी?
- 5. विमान के 14000 फीट नीचे गिरने के बावजूद एक भी यात्री या क्रू मेंबर घायल क्यों नहीं हुआ?
ओमानी पायलट के लिए राहत की उम्मीद
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जाने के दौरान फ्लाईदुबई के विमान को क्रैश कराने की कोशिश की गई थी। हालांकि, मुख्य पायलट की सूझबूझ और कुछ बहादुर यात्रियों की मदद से सऊदी अरब में इस विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई थी। उस समय सऊदी अरब ने ओमानी सह-पायलट को हिरासत में लिया था और बाद में उसे यूएई के हवाले कर दिया गया था। अब सऊदी अरब द्वारा 8 दिन बाद शुरू की गई यह जांच ओमानी पायलट के लिए राहत की खबर हो सकती है। दरअसल, सऊदी की जांच पूरे फ्लाईदुबई सिस्टम को लेकर है। अगर सऊदी अरब अपनी रिपोर्ट में यह साबित करने में सफल रहता है कि इस मामले में सिर्फ ओमानी पायलट हमामी की ही गलती नहीं थी, बल्कि सिस्टम भी जिम्मेदार था, तो उसे बड़ी राहत मिल सकती है। इसे दो मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है और पहला, यूएई के कानून के अनुसार अगर कोई पायलट विमान हाईजैक करने की कोशिश करता है या कोई अन्य गंभीर गलती करता है, तो उसे 6 साल की सजा हो सकती है। दूसरा, यदि यह साबित हो जाता है कि ओमानी पायलट किसी आतंकी कृत्य में शामिल था, तो उसे मौत की सजा भी दी जा सकती है। गौरतलब है कि हादसे के बाद पहली रिपोर्ट सऊदी के हवाले से ही आई थी, जिसमें कहा गया था कि पायलट स्मित मच्छार द्वारा असॉल्ट किए जाने के बाद ही ओमानी पायलट ने उन पर हमला किया था।
