रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) 2026 के फाइनल में दिल्ली कैपिटल्स को हराकर दूसरी बार खिताब अपने नाम कर लिया है। 5 फरवरी को खेले गए इस निर्णायक मुकाबले में बेंगलुरु ने 204 रनों के विशाल लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत की सूत्रधार कप्तान स्मृति मंधाना रहीं, जिन्होंने न केवल बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि गंभीर शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद मैदान पर डटी रहीं।
मैच के बाद हुए खुलासे ने खेल जगत को हैरान कर दिया है। मंधाना ने फाइनल में 41 गेंदों पर 87 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिससे बेंगलुरु ने 6 विकेट से जीत दर्ज की। यह WPL के इतिहास का सबसे बड़ा सफल रन चेज है। इस जीत के साथ ही मंधाना ने बड़े मैचों में विफल होने के अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
फाइनल में मंधाना की रिकॉर्ड पारी और ऐतिहासिक रन चेज
दिल्ली कैपिटल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बेंगलुरु के सामने 204 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था। जवाब में उतरी RCB की शुरुआत धीमी रही, लेकिन कप्तान स्मृति मंधाना ने मोर्चा संभालते हुए आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने मात्र 41 गेंदों में 87 रन बनाए, जिसमें कई दर्शनीय शॉट शामिल थे। उनकी इस पारी की बदौलत बेंगलुरु ने न केवल मैच जीता, बल्कि IPL और WPL दोनों के फाइनल इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज भी पूरा किया और मंधाना को उनकी इस मैच जिताऊ पारी के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
103 डिग्री बुखार और शारीरिक संघर्ष का खुलासा
ट्रॉफी जीतने के बाद ड्रेसिंग रूम में टीम के हेड कोच मलोलन राजगोपालन ने एक चौंकाने वाली जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मैच से एक दिन पहले स्मृति मंधाना को 103 डिग्री तक तेज बुखार था। कोच के अनुसार, मंधाना ने अपनी बीमारी को टीम पर हावी नहीं होने दिया और बिना किसी को बताए फिट होने के लिए हर संभव प्रयास किया। जब कोच ने इस संघर्ष का खुलासा किया, तो टीम की अन्य खिलाड़ी भी कप्तान के इस जज्बे को देखकर दंग रह गईं।
व्यक्तिगत चुनौतियों के बीच मंधाना का शानदार प्रदर्शन
स्मृति मंधाना के लिए पिछला कुछ समय व्यक्तिगत और पेशेवर रूप से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। तीन महीने पहले भारत को महिला विश्व कप जिताने के बाद, उनकी निजी जिंदगी में बड़ी बाधाएं आईं। उनकी शादी के टलने और व्यक्तिगत संबंधों में आए तनाव की खबरों के बीच उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर अपनी एकाग्रता बनाए रखी। आलोचकों द्वारा अक्सर उन पर बड़े मैचों में दबाव न झेल पाने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस फाइनल पारी ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया है।
ऑरेंज कैप और सांख्यिकीय विश्लेषण
विश्लेषकों के अनुसार, स्मृति मंधाना का यह सीजन उनके करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक रहा है। उन्होंने इस सीजन की 9 पारियों में कुल 377 रन बनाए, जिसके लिए उन्हें 'ऑरेंज कैप' से नवाजा गया। 19 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करना उनकी मानसिक मजबूती को दर्शाता है। यह पारी न केवल RCB के लिए महत्वपूर्ण थी, बल्कि महिला क्रिकेट में नेतृत्व के नए मानक भी स्थापित करती है।
निष्कर्ष के तौर पर, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की यह जीत स्मृति मंधाना के साहस और समर्पण की कहानी के रूप में याद की जाएगी। बीमारी और व्यक्तिगत संघर्षों को पीछे छोड़कर उन्होंने अपनी टीम को दूसरी बार चैंपियन बनाया, जो आने वाले समय में युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
