सोनम वांगचुक: नीट पेपर लीक पर अनशन खत्म करने के लिए केंद्र के सामने रखीं शर्तें

सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अपना अनशन खत्म करने के लिए शर्तें रखी हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग शामिल है।

प्रसिद्ध शिक्षाविद् और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने चल रहे अनशन को समाप्त करने के संबंध में केंद्र सरकार को अपनी शर्तों से अवगत कराया है। बुधवार को वांगचुक ने दावा किया कि केंद्र ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की कोशिशों के तहत वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सकारात्मक रूप से विचार करेंगे और यह घटनाक्रम उस विरोध प्रदर्शन में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में आया है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

केंद्रीय नेतृत्व को लिखा गया पत्र

पेपर लीक के मामले पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक औपचारिक पत्र लिखा है। यह पत्र केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के नाम लिखा गया है। अपने पत्र में वांगचुक ने लिखा कि कल रात अस्पताल में मुझसे मिलने और मेरा अनशन खत्म करने की आपकी अपील के लिए धन्यवाद। उन्होंने उल्लेख किया कि बातचीत के दौरान मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी बातों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। इसी बातचीत के आधार पर वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने की संभावना जताई है, बशर्ते उनकी मांगों को स्वीकार किया जाए।

सोनम वांगचुक की प्रमुख मांगें

सोनम वांगचुक ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवज़ा दिया जाए। इसके साथ ही, जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा की जाए, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल हो। ये मांगें उस गहरे संकट को दर्शाती हैं जो पेपर लीक के कारण छात्र समुदाय के बीच पैदा हुआ है और जिसके कारण कई युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

'चलो संसद' मार्च और लोकतांत्रिक विरोध

वांगचुक ने अपने पत्र में 20 जुलाई 2026 के 'चलो संसद' मार्च का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा ज़्यादती और ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के बावजूद यह मार्च बहुत शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूरे देश और दुनिया ने लोकतांत्रिक विरोध के प्रति प्रदर्शनकारियों के धैर्य और प्रतिबद्धता को देखा। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में इस भरोसे को किसी भी कानूनी मामले, उत्पीड़न या इसमें शामिल लोगों के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई से कमज़ोर नहीं किया जाएगा।

छात्रों के लिए जीने की इच्छा

वांगचुक ने पत्र में अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को साझा करते हुए लिखा कि वे छात्रों के लिए जीना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में मंत्रियों से मिलने के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखा है। इनमें से कुछ लोग पहले ही उनसे मिल चुके हैं और बाकी के शाम तक आने की उम्मीद है। उन सभी ने वांगचुक से अपना अनशन खत्म करने का आग्रह किया है और उन्हें याद दिलाया है कि उन्हें अभी देश की सेवा में बहुत काम करना है। वांगचुक ने कहा कि वे उनसे सहमत हैं और अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम में लौटना चाहते हैं जिसने उनके जीवन को एक पहचान दी है, लेकिन वे उन युवाओं की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकते जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था।

केंद्र से मांगा गया स्पष्ट आश्वासन

अनशन समाप्त करने के लिए सोनम वांगचुक ने सरकार से एक स्पष्ट आश्वासन मांगा है। उन्होंने मांग की है कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या बदले की भावना वाली कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने तर्क दिया कि इन युवाओं का एकमात्र "अपराध" एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज़ उठाना रहा है और वांगचुक ने स्पष्ट किया कि अगर ऐसा आश्वासन दिया जाता है, तो वे इस भरोसे के साथ अपना अनशन खत्म करेंगे कि सरकार ने न केवल उनकी अपील सुनी है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों की उम्मीदों को भी समझा है। ऐसे आश्वासन के अभाव में, उन्होंने अनिश्चित काल तक अपना अनशन जारी रखने की चेतावनी दी है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस द्वारा और ज़्यादा बल प्रयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि लोकतंत्र का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने युवा नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है।