CJP का प्रदर्शन: दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशन बंद और बंगाल से आ रहे 2000 CRPF जवान

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के 33वें दिन दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। 16 मेट्रो स्टेशन बंद हैं और सरकार ने बातचीत की दूसरी पेशकश की है, लेकिन प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन आज अपने 33वें दिन में प्रवेश कर गया है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। जंतर-मंतर पर जारी इस बड़े प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने दूसरी बार बातचीत की पेशकश की है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की पुष्टि सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने की है। रांका का कहना है कि सरकार के इस प्रस्ताव पर कोई भी अंतिम निर्णय उनकी कोर टीम के साथ गहन चर्चा के बाद ही लिया जाएगा और बुधवार सुबह से ही जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं। इन प्रदर्शनकारियों में वे लोग भी शामिल हैं जो 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस की लाठियों और आंसू गैस के गोलों का शिकार हुए थे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और मेट्रो पर असर

सुरक्षा कारणों और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन ने दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का निर्णय लिया है। यह कदम प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है और इसके अतिरिक्त, सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए बंगाल से 2000 CRPF जवानों को दिल्ली बुलाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और झड़पों पर कड़ा रुख अपनाते हुए विभिन्न थानों में 10 FIR दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारियों पर RAF जवानों पर जानलेवा हमला करने, पथराव करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्यों में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सोनम वांगचुक का अनशन और मंत्रियों की मुलाकात

इस विरोध प्रदर्शन के बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सोनम वांगचुक से जुड़ा है, जो 28 जून से अनशन पर बैठे हैं। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात की। दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और निर्देश के बाद, वांगचुक को मंगलवार को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था। उनकी बिगड़ती सेहत और अनशन को लेकर सरकार की ओर से यह एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

NEET विवाद और इस्तीफे की मांग

राजनीतिक मोर्चे पर, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने NEET विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा है। वेणुगोपाल ने बुधवार को स्पष्ट रूप से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करने में विफल रहने के कारण उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक वे जंतर-मंतर का मोर्चा नहीं छोड़ेंगे। प्रदर्शन के पिछले दो दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान भारी हिंसा हुई थी, जबकि 21 जुलाई को अभिजीत दीपके ने कहा था कि यदि सरकार बात करना चाहती है तो उसे खुद आगे आना चाहिए।