E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने का कोई सबूत नहीं, सरकार ने संसद में दी बड़ी जानकारी

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। देश में 23 करोड़ से अधिक वाहन इस ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि पुराने वाहनों में 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है, लेकिन इंजन की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है।

देशभर में E20 पेट्रोल के उपयोग और उससे वाहनों के इंजन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चल रही विभिन्न चर्चाओं और आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि E20 पेट्रोल के कारण इंजन खराब होने या वाहन के अचानक बंद पड़ने का कोई भी ठोस सबूत या मामला सामने नहीं आया है। यह जानकारी सोमवार को राज्यसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी द्वारा एक प्रश्न के उत्तर में दी गई। सरकार का यह बयान उन करोड़ों वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को लेकर संशय में थे।

23 करोड़ से अधिक वाहन कर रहे हैं उपयोग

सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में 23 करोड़ से ज्यादा वाहन एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रहे हैं। इन वाहनों के विस्तृत विवरण में बताया गया कि इनमें 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल से चलने वाली कारें शामिल हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि इन 23 करोड़ वाहनों में बड़ी संख्या उन पुराने वाहनों की भी है, जिन्हें तकनीकी रूप से E20 पेट्रोल के लिए प्रमाणित (सर्टिफाइड) नहीं किया गया था। इसके बावजूद, वास्तविक परिस्थितियों में इन वाहनों के इंजन में खराबी आने या ईंधन की वजह से गाड़ी रुकने का कोई भी मामला रिकॉर्ड नहीं किया गया है, जो इस ईंधन की सुरक्षा को दर्शाता है।

क्रमबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू हुई योजना

भारत में E20 पेट्रोल को लागू करने की प्रक्रिया अचानक नहीं अपनाई गई, बल्कि इसे पिछले कई वर्षों में एक सुनियोजित और सिलसिलेवार तरीके से चरणबद्ध रूप में लागू किया गया है। सरकार ने बताया कि साल 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा केवल 1 दशमलव 53 प्रतिशत थी। इसे विशेषज्ञों की सलाह और निरंतर वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर धीरे-धीरे बढ़ाया गया, जिसका लक्ष्य साल 2025-26 तक 20 प्रतिशत तक पहुंचना है। इस लंबी अवधि के दौरान ईंधन के हर स्तर के मिश्रण का गहन विश्लेषण किया गया ताकि वाहनों की कार्यक्षमता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

व्यापक परीक्षण और विशेषज्ञों की निगरानी

एथेनॉल की मात्रा में प्रत्येक वृद्धि से पहले सरकार ने सुनिश्चित किया कि इसका व्यापक स्तर पर परीक्षण किया जाए। इसमें लैब टेस्ट, वास्तविक सड़कों पर वाहन चलाकर किए गए परीक्षण और लंबे समय तक चलने वाले एंड्योरेंस टेस्ट शामिल थे। इस पूरी प्रक्रिया में देश की शीर्ष संस्थाएं और हितधारक शामिल रहे, जिनमें नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सियाम (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), प्रमुख तेल कंपनियां और वाहन निर्माता कंपनियां शामिल हैं। इन परीक्षणों के दौरान इंजन की मजबूती, फ्यूल सिस्टम की सहनशीलता, धातुओं में जंग लगने की संभावना, माइलेज, उत्सर्जन स्तर और वाहन के समग्र प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण मानकों की बारीकी से जांच की गई थी।

वाहन निर्माताओं के सर्विस डेटा से मिली पुष्टि

सरकार ने अपने दावों की पुष्टि के लिए प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों के सर्विसिंग आंकड़ों का भी संदर्भ दिया। एक बड़ी कार निर्माता कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उन्होंने लगभग 2 दशमलव 84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। इन वाहनों में से लगभग 1 दशमलव 5 करोड़ वाहन पुराने मॉडल के थे। कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्विसिंग के दौरान E20 पेट्रोल की वजह से किसी भी वाहन के इंजन या फ्यूल सिस्टम में नुकसान की पुष्टि नहीं हुई। इसी प्रकार, एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी सूचित किया कि E20 का उपयोग करने वाले वाहनों में तकनीकी खराबी के कोई अतिरिक्त मामले नहीं देखे गए हैं, जो सामान्य पेट्रोल वाले वाहनों की तुलना में अधिक हों।

माइलेज और इंजन परफॉर्मेंस का विश्लेषण

माइलेज के मुद्दे पर सरकार ने पारदर्शिता बरतते हुए स्वीकार किया कि कुछ पुराने वाहनों में मामूली अंतर देखा जा सकता है। सरकार के अनुसार, वे पुराने वाहन जिन्हें मूल रूप से E10 पेट्रोल (10 प्रतिशत एथेनॉल) के मानकों पर बनाया गया था, उनमें माइलेज में लगभग 3 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने E20 पेट्रोल के तकनीकी लाभ भी गिनाए। बताया गया कि E20 पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग बेहतर होती है, जिससे इंजन के अंदर होने वाली 'नॉकिंग' कम हो जाती है। इससे ईंधन अधिक कुशलता और सफाई से जलता है, जिससे इंजन का संचालन स्मूद होता है और प्रदूषण भी कम होता है।

भविष्य की योजना और स्पष्ट रुख

एथेनॉल ब्लेंडिंग के भविष्य को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल E20 से अधिक एथेनॉल मिलाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यदि भविष्य में E30 या उससे अधिक ब्लेंडिंग पर विचार किया जाता है, तो वह केवल गहन वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी मूल्यांकन और ऑटोमोबाइल उद्योग के सभी पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही संभव होगा। इसके अतिरिक्त, सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि पेट्रोल पंपों पर बिना एथेनॉल वाला या कम एथेनॉल वाला पेट्रोल अलग से बेचने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। सरकार का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में सहायक हो।