भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ताकत और उसके प्रभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद तीखी और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि भारत में क्रिकेट पर BCCI का नियंत्रण अब केवल व्यावहारिक नहीं, बल्कि कानूनन भी मान्यता प्राप्त कर चुका है। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मांग की गई थी कि भारतीय क्रिकेट। टीम को 'भारतीय टीम' या 'टीम इंडिया' कहने से रोका जाए क्योंकि BCCI एक निजी संस्था है।
'पूंछ ही कुत्ते को हिला रही है' - कोर्ट की सख्त टिप्पणी
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने मौजूदा क्रिकेट परिदृश्य पर कटाक्ष करते। हुए कहा कि स्थिति कभी-कभी ऐसी हो जाती है जैसे 'पूंछ ही कुत्ते को हिला रही हो'। उनका इशारा इस बात की ओर था कि क्रिकेट जगत में पैसा और ताकत इतनी ज्यादा। हो चुकी है कि यह सवाल उठने लगता है कि असली नियंत्रण आखिर किसके हाथ में है। कोर्ट ने माना कि BCCI का प्रभाव इतना व्यापक है कि उसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या BCCI एक निजी संस्था है?
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि BCCI एक निजी संस्था है, जो तमिलनाडु सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत है। याचिका में कहा गया था कि BCCI न तो कोई सरकारी संस्था है और न ही संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' की श्रेणी में आती है। इस आधार पर तर्क दिया गया कि उसे भारतीय क्रिकेट टीम को 'राष्ट्रीय टीम' कहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होना चाहिए। हालांकि, अदालत इस तर्क से बिल्कुल भी सहमत नहीं दिखी।
कोर्ट ने लगाई फटकार: समय बर्बाद न करें
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका को पूरी तरह से 'फालतू' बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई और चेतावनी दी कि इस तरह के मामलों में भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लोग घर बैठे याचिकाएं ड्राफ्ट कर देते हैं, जिससे कोर्ट का कीमती समय बर्बाद होता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देश में अब नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल तक का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है, जहाँ खेल संबंधी विवाद सुलझाए जा सकते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट का पुराना रुख
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले अक्टूबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट भी इसी तरह की याचिका को खारिज कर चुका था। उस वक्त कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील रीपक कंसल को फटकार लगाते हुए पूछा था कि क्या जो टीम दुनिया भर में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है, वह भारत की टीम नहीं है? हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि जो टीम अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर रही है, उसे 'टीम इंडिया' कहने पर आपत्ति जताना बेमानी है।
BCCI और सरकारी फंड का विवाद
याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया था कि खेल मंत्रालय के RTI जवाबों के अनुसार, BCCI को न। तो नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन की आधिकारिक मान्यता मिली है और न ही उसे सरकार से कोई फंड मिलता है। इसके बावजूद, सरकारी मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म क्रिकेट टीम को 'टीम इंडिया' कहते हैं और मैचों के दौरान तिरंगे जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का इस्तेमाल होता है। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी तर्कों को दरकिनार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि BCCI को सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त है और उसकी भूमिका को चुनौती देना व्यर्थ है।