टी20 विश्व कप 2026: उपकप्तान अक्षर पटेल प्लेइंग इलेवन से बाहर, प्रबंधन पर सवाल।

टी20 विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की पहली हार के बाद टीम संयोजन पर चर्चा तेज हो गई है। उपकप्तान अक्षर पटेल को लगातार शानदार प्रदर्शन के बावजूद प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया है, जबकि उनकी जगह आए वॉशिंगटन सुंदर विकेट लेने में असफल रहे हैं।

टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 चरण में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के प्रबंधन और चयन निर्णयों पर सवाल उठने लगे हैं। इस हार ने न केवल टीम की सेमीफाइनल की राह को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, बल्कि टीम के उपकप्तान अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने के फैसले ने भी विशेषज्ञों और प्रशंसकों को हैरान कर दिया है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली इस टीम में अक्षर पटेल को उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन टूर्नामेंट के महत्वपूर्ण मोड़ पर उन्हें टीम से बाहर बैठना पड़ा है।

अक्षर पटेल का शुरुआती मैचों में शानदार प्रदर्शन

टूर्नामेंट के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्षर पटेल ने इस विश्व कप के शुरुआती मैचों में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती प्रदान की थी। उन्होंने कुल तीन मैचों में हिस्सा लिया और छह महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। 0 ओवरों में केवल 24 रन देकर 2 विकेट हासिल किए थे। इसके बाद नामीबिया के खिलाफ उन्होंने अपनी लय बरकरार रखते हुए 20 रन देकर 2 विकेट लिए। पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भी अक्षर का प्रदर्शन सराहनीय रहा, जहां उन्होंने 29 रन खर्च कर 2 विकेट प्राप्त किए। इन आंकड़ों के बावजूद, उन्हें नीदरलैंड्स और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैचों से बाहर रखा गया, जो टीम प्रबंधन की रणनीति पर सवालिया निशान लगाता है।

वॉशिंगटन सुंदर की प्लेइंग इलेवन में एंट्री और प्रदर्शन

अक्षर पटेल के स्थान पर टीम में वॉशिंगटन सुंदर को शामिल किया गया। हालांकि, सुंदर का प्रदर्शन अब तक उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच में सुंदर ने अपने कोटे के ओवरों में 36 रन लुटाए और उन्हें एक भी सफलता नहीं मिली। 0 ओवरों में 17 रन दिए और कोई विकेट नहीं ले सके। दो मैचों में बिना किसी विकेट के रहने और महंगे साबित होने के बाद, टीम में उनके स्थान और अक्षर पटेल की अनुपस्थिति को लेकर बहस छिड़ गई है।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम की स्थिति

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार भारत की इस टूर्नामेंट में पहली हार है। इस हार ने टीम के संतुलन और मध्यक्रम की बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी विकल्पों पर भी पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है और खेल विशेषज्ञों के अनुसार, उपकप्तान का प्लेइंग इलेवन से बाहर होना एक दुर्लभ घटना है, विशेषकर तब जब खिलाड़ी फॉर्म में हो और चोटिल भी न हो। टीम प्रबंधन ने सुंदर को अक्षर पर प्राथमिकता देने के पीछे के कारणों को स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार ने इस फैसले की प्रभावशीलता पर संदेह पैदा कर दिया है।

जिम्बाब्वे के खिलाफ आगामी मुकाबला और सेमीफाइनल की राह

भारतीय टीम का अगला मुकाबला 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ होना निर्धारित है। सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत के लिए यह मैच जीतना अनिवार्य हो गया है। जिम्बाब्वे की टीम उलटफेर करने में सक्षम मानी जाती है, ऐसे में टीम इंडिया को अपने सर्वश्रेष्ठ संयोजन के साथ मैदान पर उतरना होगा। इस मैच में सबकी नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या प्रबंधन अक्षर पटेल को वापस प्लेइंग इलेवन में शामिल करता है या फिर वॉशिंगटन सुंदर पर ही भरोसा बनाए रखता है।

उपकप्तान की भूमिका और चयनकर्ताओं की रणनीति

चयनकर्ताओं ने जब अक्षर पटेल को उपकप्तान नियुक्त किया था, तब यह माना गया था कि वह टीम के मुख्य स्तंभों में से एक होंगे और सामान्यतः कप्तान और उपकप्तान टीम की प्लेइंग इलेवन का स्थायी हिस्सा होते हैं। अक्षर पटेल का बाहर होना यह संकेत देता है कि टीम प्रबंधन परिस्थितियों के आधार पर कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हट रहा है, भले ही इसमें वरिष्ठ खिलाड़ी शामिल हों और हालांकि, परिणामों के पक्ष में न रहने के कारण इन रणनीतिक बदलावों की आलोचना हो रही है। आगामी मैचों में टीम की सफलता ही इन निर्णयों की सार्थकता सिद्ध करेगी।