ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने चीन को स्पष्ट और कड़ी चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उनका देश किसी भी चीनी दखल को बर्दाश्त नहीं करेगा और यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन और ताइवान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की आशंका है। राष्ट्रपति लाई ने अपने देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, खासकर एक अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट के बाद जिसमें दावा किया गया है कि ताइवान पर संभावित हमले में चीन को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ सकता है।
राष्ट्रपति लाई की दृढ़ प्रतिज्ञा
फोकस ताइवान की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में देश की सुरक्षा और सभी नागरिकों की जान-माल की रक्षा करने की कसम खाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं निश्चित रूप से देश की रक्षा करूंगा और चीन के दबाव या चीन के हाथ को ताइवान तक पहुंचने की बिल्कुल इजाजत नहीं दूंगा। ' यह बयान ताइवान की ओर से चीन की बढ़ती सैन्य। धमकियों और राजनीतिक दबाव के जवाब में एक मजबूत संदेश है। राष्ट्रपति लाई का यह रुख ताइवान की आत्मरक्षा की क्षमता और इच्छाशक्ति को दर्शाता है, और यह भी कि वे अपने देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे।
ताइवान की संप्रभुता पर जोर
राष्ट्रपति लाई ने गुरुवार को इस बात पर जोर दिया कि ताइवान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से चीन सीमा पार से ताइवान के लोगों पर दबाव बनाने की। कोशिश कर रहा है, उससे यह साफ हो जाता है कि बीजिंग की सत्ता ताइवान तक नहीं है। अपनी बात को पुख्ता करने के लिए, उन्होंने चीन में जन्मे जापानी सांसद हे सेकी की हालिया ताइवान यात्रा का जिक्र किया और हे सेकी को चीन ने प्रतिबंधित कर रखा है और उनके देश में प्रवेश पर रोक लगा रखी है। राष्ट्रपति लाई ने कहा कि यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि रिपब्लिक ऑफ चाइना (ROC), जो ताइवान का आधिकारिक नाम है, और PRC एक-दूसरे के अधीन नहीं हैं। यह बयान ताइवान की अंतरराष्ट्रीय पहचान और उसके स्वतंत्र अस्तित्व को रेखांकित करता है।
चीन की आक्रामक रणनीति और ताइवान का जवाब
पिछले कुछ महीनों से चीन लगातार ताइवान को डराने और धमकाने की कोशिश कर रहा है। इसमें सैन्य अभ्यास, हवाई क्षेत्र में घुसपैठ और सीमा पार से दबाव बनाना शामिल है। राष्ट्रपति लाई ने उम्मीद जताई कि चीन के नेता समझेंगे कि ताइवान को निशाना बनाने वाले सैन्य अभ्यास शांतिपूर्ण कदम नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चीन की घुसपैठ और सीमा पार से डाले जा रहे दबाव से ताइवान को चीन का हिस्सा बनाने का लक्ष्य हासिल नहीं होगा। ताइवान की सरकार और सेना चीन की इन हरकतों का लगातार जवाब दे रही है,। अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन जुटा रही है।
अमेरिकी थिंक टैंक की चौंकाने वाली रिपोर्ट
चीन की आक्रामक रणनीति के बीच, एक अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट सामने आई है जो चीन के लिए आंखें खोलने वाली हो सकती है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो उसे 1 लाख तक सैनिकों की मौत का सामना करना पड़ सकता है। यह रिपोर्ट 'इफ चाइना अटैक्स ताइवान' (If China Attacks Taiwan) नाम से जर्मन मार्शल। फंड द्वारा जारी की गई है, जिसे अमेरिकी सरकार से भी फंडिंग मिलती है। फोकस ताइवान ने इस रिपोर्ट की जानकारी दी है, जो। क्षेत्र में संभावित संघर्ष के गंभीर परिणामों को उजागर करती है।
युद्ध के संभावित परिणाम और चीन को पीछे हटना
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ताइवान पर हमले की स्थिति में चीन को आखिर में पीछे हटना पड़ सकता है, हालांकि वह ताइवान के किनमेन और मत्सू द्वीपों पर कब्जा कर सकता है और यह आकलन चीन के लिए सैन्य, रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी नुकसान का संकेत देता है। जर्मन मार्शल फंड की इस रिपोर्ट में ताइवान के साथ 'बड़े युद्ध' से लेकर 'छोटे संघर्ष'। तक के अलग-अलग हालात में चीन के लिए संभावित नुकसान का विस्तृत आकलन किया गया है। यह रिपोर्ट चीन को ताइवान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के गंभीर परिणामों पर विचार करने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद की जा सकती है।