टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश शुरू एन चंद्रशेखरन ने कार्यकाल बढ़ाने से किया इनकार

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है। टाटा ट्रस्ट्स ने उनके उत्तराधिकारी की खोज के लिए एक चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड में विस्तार को लेकर आम सहमति न बन पाने के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है।

टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल को न लेने के फैसले के बाद अब नए उत्तराधिकारी की तलाश आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स ने उनके उत्तराधिकारी को चुनने के लिए एक विशेष पैनल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चंद्रशेखरन का वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है, जिसके बाद टाटा समूह के नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब समूह अपने विभिन्न व्यवसायों में बड़े पैमाने पर विस्तार और परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।

चयन समिति का गठन और औपचारिक प्रक्रिया

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) अब टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को चुनने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया है कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा नियुक्ति स्वीकार नहीं करेंगे। ट्रस्ट ने गुरुवार को जानकारी साझा की कि उसके नॉमिनी डायरेक्टर्स को 12 अगस्त को चंद्रशेखरन का एक ईमेल प्राप्त हुआ था, जिसमें उन्होंने अपने इस निर्णय के बारे में विस्तार से बताया था। ट्रस्टियों ने अब टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के प्रावधानों के तहत एक सिलेक्शन कमेटी यानी चयन समिति बनाने का प्रस्ताव पारित किया है। यह समिति नए चेयरमैन के पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार के नाम की सिफारिश करेगी ताकि समूह के मूल्यों और हितों की रक्षा की जा सके।

निर्णय के पीछे के मुख्य कारण

रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रशेखरन का यह फैसला उनके प्रस्तावित पांच साल के कार्यकाल विस्तार के लिए आम सहमति न बन पाने के बाद आया है। चंद्रशेखरन के बयान के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव की सिफारिश की थी। यह प्रस्ताव 24 फरवरी को टाटा संस के बोर्ड के सामने रखा गया था, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ पाया क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया था। चंद्रशेखरन ने कहा कि आम सहमति न होने की वजह से उन्होंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना था, लेकिन छह महीने बाद भी यह मामला नहीं सुलझ सका, जिसके बाद उन्होंने दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे न बढ़ाने का फैसला किया।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की चुनौतियां

चंद्रशेखरन ने जोर देकर कहा कि टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और वर्तमान में कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जो लागू होने के अहम चरणों में हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी 2027 के बाद समूह को आगे ले जाने के लिए न सिर्फ एक सक्षम लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर एक स्पष्ट सोच होना भी आवश्यक है। उन्होंने बोर्ड से आग्रह किया कि वे जल्द ही उत्तराधिकारी के बारे में फैसला लें ताकि ट्रांज़िशन की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। टाटा समूह इस समय एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिजिटल बिजनेस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए क्षेत्रों में भारी निवेश कर रहा है। अगले चेयरमैन को एयर इंडिया और जगुआर लैंड रोवर जैसे व्यवसायों की जिम्मेदारी संभालनी होगी, जबकि टीसीएस को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ते बदलाव का सामना करना पड़ रहा है।

वित्तीय प्रदर्शन और गवर्नेंस

एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल के दौरान टाटा समूह की मार्केट वैल्यू और मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और वित्त वर्ष 2026 में टाटा समूह का राजस्व 13 लाख 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह नेतृत्व परिवर्तन टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच गवर्नेंस से जुड़े सवालों और बोर्ड में बदलावों के बीच हो रहा है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी है, जो इस चयन प्रक्रिया में उसकी भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। SDTT ने चंद्रशेखरन के योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया है और कहा है कि वह टाटा संस और टाटा ग्रुप की वैल्यूज को ध्यान में रखते हुए लीडरशिप में समय पर और व्यवस्थित बदलाव सुनिश्चित करने में पूरा समर्थन देगा और फिलहाल, चंद्रशेखरन 20 फरवरी 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे।