उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर एक बार फिर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है और रामपुर जिला प्रशासन ने यूनिवर्सिटी परिसर में बनी 40 इमारतों में से 38 इमारतों को अवैध करार देते हुए उन्हें ध्वस्त करने का कड़ा आदेश जारी किया है। प्रशासन के इस फैसले के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि 15 दिन बाद जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलेगा। इसी बीच गुरुवार को आजम खान की पत्नी और पूर्व विधायक डॉक्टर तंजीन फातिमा जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचीं, जहां पुलिस की भारी मौजूदगी को देखकर वह बेहद नाराज हुईं और उन्होंने पुलिसकर्मियों को परिसर से बाहर जाने का रास्ता दिखा दिया।
पुलिस और तंजीन फातिमा के बीच तीखी नोकझोंक
यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर तैनात पुलिसकर्मियों को देखकर डॉक्टर तंजीन फातिमा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रशासन ने खुद 15 दिन का समय दिया है, तो पुलिस का इस तरह परिसर के अंदर बैठना पूरी तरह गलत है। तंजीन फातिमा ने कहा, "हमारे पास कोर्ट का स्पष्ट आदेश है जिसमें हमें 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन इस तरह जबरन यूनिवर्सिटी के अंदर नहीं बैठ सकते। " उनके इस कड़े रुख के कारण यूनिवर्सिटी परिसर में काफी देर तक हलचल और गहमागहमी का माहौल बना रहा।
जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना और उद्घाटन का इतिहास
जौहर यूनिवर्सिटी की कहानी उत्तर प्रदेश की राजनीति के उतार-चढ़ाव से जुड़ी हुई है। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 18 सितंबर 2006 को हुई थी, जब मुलायम सिंह यादव की सरकार में आजम खान कद्दावर मंत्री थे। हालांकि, स्थापना के तुरंत बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया और समाजवादी पार्टी की सरकार चली गई, जिसके कारण आजम खान मंत्री नहीं रहे और यूनिवर्सिटी का उद्घाटन टल गया। इसके 6 साल बाद, जब 2012 में उत्तर प्रदेश में फिर से समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने, तब आजम खान एक बार फिर सबसे ताकतवर मंत्री के रूप में उभरे। इसके बाद 18 सितंबर 2012 को इस यूनिवर्सिटी का भव्य उद्घाटन किया गया था।
38 इमारतों को अवैध घोषित करने का कानूनी आधार
यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराने का आदेश रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा दिया गया है। बताया गया है कि जब यूनिवर्सिटी का निर्माण शुरू हुआ था, तब रामपुर विकास प्राधिकरण का गठन नहीं हुआ था और वह क्षेत्र जिला पंचायत के कार्यक्षेत्र में आता था। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उस समय केवल 2 बिल्डिंग बनाने के लिए जिला पंचायत से मंजूरी ली थी, लेकिन उसके बाद बनी 38 इमारतों के लिए कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं ली गई। अब रामपुर विकास प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत कार्रवाई करते हुए इन 38 भवनों को अवैध निर्माण की श्रेणी में रखा है। विस्तृत सुनवाई और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही इन इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया गया है।
पहले भी लग चुके हैं बड़े झटके
जौहर यूनिवर्सिटी के लिए यह पहली बड़ी कानूनी मुसीबत नहीं है। इससे पहले साल 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी की 70 हेक्टेयर से अधिक जमीन वापस ले ली थी। सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहित किए जाने के खिलाफ आजम खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद से ही यूनिवर्सिटी का एक बड़ा हिस्सा आजम खान के हाथ से निकल गया था। अब 38 इमारतों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटकने से यूनिवर्सिटी के अस्तित्व पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 15 दिनों की समय सीमा समाप्त होने के बाद अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
