अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास और उसके नियमन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस नए आदेश के माध्यम से ट्रंप सरकार ने एआई क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों और उनके डेवलपर्स के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई तकनीक का विकास सुरक्षित तरीके से हो और यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए कोई खतरा पैदा न करे।
30 दिन का अर्ली एक्सेस नियम
इस कार्यकारी आदेश के तहत, ट्रंप सरकार ने एआई मॉडल्स के डेवलपर्स से यह अपेक्षा की है कि वे अपने सिस्टम को सार्वजनिक रूप से जारी करने से ठीक 30 दिन पहले अमेरिकी सरकार को उसका अर्ली एक्सेस प्रदान करें। यह एआई कार्यकारी आदेश अमेरिकी सरकार के लिए एक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार करता है जिसके माध्यम से वह बाजार में आने से पहले सबसे उन्नत और एडवांस्ड एआई प्रणालियों की गहन जांच और परीक्षण कर सकेगी। सरकार का मानना है कि इस 30 दिन की अवधि के दौरान एआई मॉडल्स की क्षमताओं को परखा जा सकेगा, जिससे भविष्य में होने वाले संभावित खतरों को समय रहते पहचाना जा सके।
प्रमुख कंपनियों के साथ स्वैच्छिक सहयोग
व्हाइट हाउस की आधिकारिक वेबसाइट पर पोस्ट किए गए इस निर्देश को तकनीकी जगत की बड़ी कंपनियों के साथ एक स्वैच्छिक सहयोग के रूप में पेश किया गया है और इसमें ओपनएआई, एंथ्रोपिक, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य प्रमुख टेक कंपनियों के नाम शामिल हैं। आदेश की एक विशेष बात यह है कि इसमें किसी भी कंपनी को शामिल होने के लिए कानूनी रूप से मजबूर नहीं किया जा रहा है। यह पूरी तरह से एक स्वैच्छिक व्यवस्था है, जिसमें एआई कंपनियां अपनी मर्जी से सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने का विकल्प चुन सकती हैं। सरकार का लक्ष्य इन कंपनियों के साथ मिलकर एक सुरक्षित एआई इकोसिस्टम तैयार करना है।
साइबर हमलों से बचाव और सुरक्षा परीक्षण
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे एआई कंपनियों के साथ मिलकर सक्रिय रूप से काम करें ताकि एआई के माध्यम से होने वाले साइबर हमलों जैसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। पब्लिक रिलीज से 30 दिन पहले एआई मॉडल्स प्राप्त होने से सरकार को उनकी सुरक्षा प्रणालियों को टेस्ट करने का पर्याप्त समय मिलेगा। 2 जून को जारी किए गए इस कार्यकारी आदेश ने एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इसने मॉडलों के लिए सरकारी समीक्षा अवधि को पहले की तुलना में 90 दिनों से घटाकर अब अधिकतम 30 दिन कर दिया है। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ नवाचार की गति भी धीमी न पड़े।
हस्ताक्षर में देरी और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा
इस आदेश पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया में कुछ नाटकीय मोड़ भी आए। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि ट्रंप इस आदेश को लगभग दो सप्ताह पहले ही पेश कर देंगे। मूल रूप से, 20 मई को व्हाइट हाउस में एक जल्दबाजी में आयोजित समारोह में इस पर हस्ताक्षर किए जाने थे, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अंतिम समय में इस योजना को रद्द कर दिया था। उन्होंने संवाददाताओं को बताया था कि उन्हें निर्देश के कुछ पहलू पसंद नहीं आए थे। ट्रंप को विशेष रूप से इस बात की चिंता थी कि कड़े नियमों के कारण एआई की वैश्विक दौड़ में चीन के खिलाफ अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति कम हो सकती है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए आदेश में आवश्यक संशोधन किए गए और समीक्षा अवधि को कम किया गया।
