अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए संकेत दिया है कि उनकी सरकार देश की प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों में हिस्सेदारी लेने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने बताया कि उनका प्रशासन AI रेगुलेशन, साइबर सुरक्षा और चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए एक नई रणनीति तैयार कर रहा है। इस रणनीति के तहत सरकार इन कंपनियों में हिस्सेदारी लेकर अमेरिकी जनता और टेक सेक्टर के बीच एक नया तालमेल बिठाना चाहती है ताकि देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा की जा सके।
अमेरिकी जनता के साथ साझेदारी का विचार
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनकी टीम इस विचार पर काम कर रही है कि AI कंपनियां अमेरिकी जनता को अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी दें। उन्होंने इस विचार को काफी दिलचस्प बताया और कहा कि इससे AI कंपनियों और अमेरिकी जनता के बीच एक तरह की साझेदारी बन सकती है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह इस विषय पर और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अगले हफ्ते AI क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर सकते हैं और इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह समझना होगा कि कैसे ये कंपनियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा में अपना योगदान और बेहतर तरीके से दे सकती हैं।
इससे पहले डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट NOTUS ने अपनी एक रिपोर्ट में जानकारी दी थी कि अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने AI कंपनियों के साथ शुरुआती स्तर की चर्चा शुरू कर दी है। इन चर्चाओं में इस संभावना पर भी गौर किया गया कि अमेरिकी सरकार कुछ चुनिंदा AI कंपनियों के शेयर खरीदकर उनमें प्रत्यक्ष हिस्सेदारी ले सकती है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक इस प्रस्तावित बैठक या सरकार की संभावित हिस्सेदारी के बारे में कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित बैठक में इस मुद्दे पर औपचारिक रूप से चर्चा होगी या नहीं, लेकिन बाजार में इसे लेकर हलचल तेज है।
इन प्रमुख कंपनियों पर है प्रशासन की नजर
रिपोर्टों के अनुसार, जिन प्रमुख कंपनियों के नाम इस संभावित योजना में सामने आए हैं, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- OpenAI
- Anthropic
- Facebook (Meta)
- SpaceX
साइबर सुरक्षा की चुनौतियां और पुराने निवेश
हाल ही में ट्रंप ने इसी कार्यकारी आदेश का एक संशोधित संस्करण जारी किया है। इसके तहत बड़ी AI कंपनियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने सबसे उन्नत और शक्तिशाली AI मॉडल जनता के लिए जारी करने से पहले उन्हें अनिवार्य रूप से सरकारी साइबर सुरक्षा परीक्षणों के लिए उपलब्ध कराएं। AI को लेकर बढ़ती चिंताओं के पीछे तकनीकी प्रगति भी एक बड़ा कारण है। उदाहरण के तौर पर, Anthropic कंपनी का नया और शक्तिशाली टूल Mythos चर्चा में है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की उन्नत तकनीक गलत हाथों में चली गई, तो बैंकिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े साइबर हमलों का खतरा पैदा हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन के लिए निजी कंपनियों में निवेश करना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी अमेरिकी सरकार ने Intel जैसी बड़ी कंपनी और कुछ रेयर अर्थ यानी दुर्लभ खनिज तथा क्वांटम टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश करके हिस्सेदारी ली है और सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस तरह का हस्तक्षेप जरूरी हो सकता है। ट्रंप का यह नया कदम अमेरिका को AI की वैश्विक दौड़ में सबसे आगे रखने और घरेलू स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
