अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध के बहुत जल्द समाप्त होने का एक बड़ा और अहम दावा किया है। शनिवार को केंटकी में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थकों और जनता के बीच यह बात कही कि यह युद्ध बेहद कम समय में पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। इस रैली के दौरान ट्रंप ने न केवल युद्ध के अंत की भविष्यवाणी की, बल्कि यह भी आश्वासन दिया कि संघर्ष समाप्त होने के बाद अमेरिका में गैस की कीमतें पहले के मुकाबले भी काफी कम हो जाएंगी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हाल ही में किए गए अमेरिकी सैन्य हमलों का भी विशेष रूप से जिक्र किया और उन्हें पूरी तरह से एक जरूरी और अपरिहार्य कार्रवाई करार दिया।
ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों को बताया जरूरी
केंटकी की चुनावी रैली में आगे बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों से तेहरान की परमाणु क्षमता को भारी और अपूरणीय नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार बिल्कुल नहीं होने चाहिए, क्योंकि उनके आकलन के मुताबिक तेहरान उन हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे पूरी दुनिया और क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और अमेरिकी प्रशासन का यह रुख इस बात को रेखांकित करता है कि अमेरिका मध्य पूर्व में अपने सामरिक हितों और सुरक्षा को लेकर कितना सतर्क और आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
ईरान का पक्ष - सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होना जरूरी
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति के इन दावों के बीच ईरान की ओर से भी तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि क्षेत्र में स्थायी और दीर्घकालिक शांति स्थापना के लिए यह निहायत जरूरी है कि सभी मोर्चों पर जारी संघर्ष को तत्काल समाप्त किया जाए। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी एक क्षेत्र में भी लड़ाई और सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इससे यह व्यापक संघर्ष और अधिक लंबा खिंच सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को और अधिक गंभीर खतरा पैदा हो सकता है और ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के माध्यम से सामने आई इन जानकारियों के अनुसार, उप विदेश मंत्री खतीबजादेह ने विशेष रूप से लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को तुरंत समाप्त करने की आवश्यकता पर बहुत अधिक जोर दिया है।
इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन और लेबनान का मुद्दा
ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने यह भी दावा किया कि इस साल जून के मध्य में ईरान और अमेरिका के बीच जो इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन तय हुआ था, उसमें लेबनान का महत्वपूर्ण मुद्दा भी स्पष्ट रूप से शामिल था। अपनी इसी कूटनीतिक यात्रा के तहत खतीबजादेह गत बुधवार को लेबनान की राजधानी बेरूत पहुंचे थे और बेरूत प्रवास के दौरान उन्होंने वहां के स्थानीय नेताओं और प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की। आधिकारिक ब्योरे के अनुसार, उन्होंने लेबनान की संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और देश के विदेश मंत्रालय के विभिन्न प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की। खतीबजादेह ने अपनी इन सभी बैठकों को बेहद सकारात्मक और उपयोगी करार दिया, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी समझ को और बढ़ावा मिलने की बात कही गई है।
अमेरिका और इजरायल पर समझौता तोड़ने का गंभीर आरोप
बैठकों के बाद ईरानी उप विदेश मंत्री ने अमेरिका और इजरायल पर सीधा और गंभीर आरोप लगाया कि उन्होंने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का खुला उल्लंघन किया है। उनका यह पक्का दावा है कि ईरान और लेबनान पर लगातार हमले करके दोनों देशों ने उस समझौते की मूल भावना को भारी नुकसान पहुंचाया है और खतीबजादेह ने अफसोस जताते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से युद्धविराम कराने और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए जितने भी कूटनीतिक प्रयास किए गए, वे किसी भी ठोस नतीजे तक पहुंचने में नाकामयाब रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इजरायल पर किसी भी सूरत में भरोसा नहीं किया जा सकता है और यह अमेरिका की सीधी नैतिक व कूटनीतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने सहयोगी देश को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए हरसंभव तरीके से राजी करे।
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमेरिकी युद्ध को बताया अवैध
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ईरानी उप विदेश मंत्री ने ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अमेरिकी युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह से अवैध करार दिया। उन्होंने दावा किया कि वॉशिंगटन अपने तमाम प्रयासों के बावजूद ईरान की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली और किसी भी जवाबी कार्रवाई करने की आंतरिक क्षमता को पूरी तरह से खत्म करने में सफल नहीं हो पाया है। खतीबजादेह ने कहा कि ईरान ने अब तक एक बहुत ही गंभीर और कठिन संघर्ष का सामना किया है, लेकिन इसके बावजूद देश अपनी संप्रभुता और अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा आगे भी पूरी ताकत के साथ जारी रखेगा। ईरान का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रस्ताव
इसके साथ ही, ईरानी अधिकारी ने यह महत्वपूर्ण घोषणा भी की कि तेहरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए और अमेरिका की ओर से उठाए जाने वाले सभी सवालों का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आईएईए की 15 से अधिक आधिकारिक रिपोर्टों में पहले ही इस बात की पूरी पुष्टि की जा चुकी है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के नियमों का पूरी तरह से अनुपालन कर रहा है। खतीबजादेह ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि वह मात्र सात दिनों के भीतर रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है और अंत में उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी युद्ध की शुरुआत नहीं चाहता है, लेकिन यदि उस पर कोई युद्ध जबरन थोपा जाता है, तो वह उसका मुंहतोड़ और करारा जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।
