India-US Tariff War / मोदी मेरे अच्छे दोस्त, लेकिन मुझसे खुश नहीं, वजह भारत पर 50% टैरिफ- फिर बोले ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि पीएम मोदी भारत पर लगे 50% टैरिफ से खुश नहीं हैं, जिसका एक कारण रूसी तेल खरीद है। ट्रम्प ने दावा किया कि मोदी उनसे मिलने आए थे और भारत ने रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कई महत्वपूर्ण बयान दिए हैं, जिसमें भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ और रूसी तेल की खरीद प्रमुख मुद्दे रहे। ट्रम्प ने वॉशिंगटन में हाउस रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों की बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनसे 'ज्यादा खुश नहीं हैं' क्योंकि वॉशिंगटन ने रूसी तेल खरीदने की वजह से दिल्ली पर 50% टैरिफ लगाया है और इन बयानों ने दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों और भू-राजनीतिक समीकरणों पर एक बार फिर से ध्यान आकर्षित किया है।

टैरिफ विवाद और रूसी तेल खरीद

ट्रम्प के अनुसार, भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया गया है, जिसमें से 25%। अतिरिक्त टैरिफ विशेष रूप से रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया है। यह टैरिफ अमेरिका द्वारा भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने और रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में रूसी ऊर्जा खरीद पर अपनी चिंताओं को दूर करने के प्रयासों का हिस्सा है। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क भारत के लिए अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों। को बेचना मुश्किल बना रहा है, जिससे भारत के निर्यात पर सीधा असर पड़ रहा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि रूस से तेल खरीदकर भारत अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन पर। हो रहे हमलों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है, जिसकी अमेरिका लगातार आलोचना करता रहा है।

पीएम मोदी से मुलाकात का ट्रम्प का दावा

डोनाल्ड ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी खुद उनसे मिलने आए थे। ट्रम्प ने कहा, 'वह मेरे पास आए और बोले- सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं? और मैंने कहा- हां। ' हालांकि, ट्रम्प ने इस मुलाकात का समय और स्थान नहीं बताया। ट्रम्प ने पीएम मोदी के साथ अपने 'बहुत अच्छे रिश्ते' होने का भी जिक्र किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि मोदी टैरिफ की वजह से खुश नहीं हैं। ट्रम्प ने एक दिन पहले भी इसी मुद्दे पर बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने उन्हें खुश करने के लिए रूस से तेल आयात कम करने का फैसला किया। उन्होंने कहा था, 'वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था, इसलिए मुझे खुश करना जरूरी था। ' यह बयान ट्रम्प की अपनी कूटनीतिक शैली और व्यक्तिगत संबंधों पर जोर देने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

भारत का अपाचे हेलीकॉप्टर ऑर्डर

ट्रम्प ने भारत के रक्षा सौदों का भी उल्लेख किया और उन्होंने बताया कि भारत कई सालों से अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए उनके पास आ रहा था। ट्रम्प ने दावा किया, 'हम इसे बदल रहे हैं। भारत ने 68 अपाचे हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर दिया है। ' यह टिप्पणी भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को रेखांकित करती है, जहां अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है और अपाचे हेलीकॉप्टर का यह बड़ा ऑर्डर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की गहराई को दर्शाता है, भले ही व्यापार और ऊर्जा आयात को लेकर कुछ मतभेद हों।

भारत की नीति और बचाव

भारत ने रूस से तेल आयात करने के अपने फैसले का लगातार बचाव किया है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि तेल की खरीदारी देश के हित और अपने नागरिकों के लिए सस्ता ईंधन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर आधारित है। भारत ने यह भी दोहराया है कि वह अपनी रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखते हुए सभी वैश्विक भागीदारों के साथ बातचीत जारी रखेगा। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च कीमतों के बावजूद रियायती दरों पर तेल प्राप्त करने में मदद मिली। यह नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है।

अमेरिका की चेतावनी और व्यापार घाटा

ट्रम्प ने पहले भी चेतावनी दी थी कि अगर नई दिल्ली रूस के तेल आयात पर अमेरिका की चिंताओं को दूर नहीं करती है, तो वाशिंगटन भारतीय सामान पर टैरिफ और बढ़ा सकता है। अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने की कोशिश कर रहा है, और पिछले साल भारत के रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल खरीदने का हवाला देते हुए भारतीय सामानों पर आयात टैरिफ को दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिया था। यह कदम अमेरिका के लिए एक दबाव रणनीति का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य भारत को अपनी ऊर्जा खरीद नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करना था।

रूसी तेल आयात में भारत की कमी

हाल के आंकड़ों से पता चला है कि भारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर में करीब 17. 7 लाख बैरल प्रतिदिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। आने वाले समय में यह 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकता है। जनवरी में आने वाले आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है और नवंबर 2021 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए हैं, जिसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा है।

राजदूत की अपील और व्यापार वार्ता

रूसी तेल आयात में कमी के पीछे कई आर्थिक कारक भी जिम्मेदार हैं और यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने 20-25 डॉलर प्रति बैरल सस्ता क्रूड ऑयल बेचना शुरू किया था, जब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल थी। यह छूट भारत के लिए बेहद किफायती थी और हालांकि, अब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, और रूस ने भी अपनी छूट घटाकर 1. 5 से 2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है। इतनी कम रियायत में भारत को पहले जैसा फायदा नहीं मिल रहा है, ऊपर से रूस से तेल लाने में शिपिंग और बीमा खर्च भी ज्यादा पड़ता है। इसी वजह से भारत अब दोबारा सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका जैसे स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर्स से तेल खरीद रहा है, क्योंकि अब कीमत में पहले जैसा बड़ा अंतर नहीं बचा है, और पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से खरीद अधिक व्यवहार्य हो गई है।

ट्रम्प के साथ मौजूद अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि वह करीब एक महीने पहले भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के घर गए थे। उस मुलाकात में सबसे ज्यादा चर्चा भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने को लेकर हुई थी। ग्राहम ने बताया कि भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति ट्रम्प तक यह संदेश पहुंचाने को कहा था कि भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाए और लिंडसे ग्राहम के मुताबिक, भारत अब पहले के मुकाबले रूस से काफी कम मात्रा में तेल खरीद रहा है। यह मुद्दा दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता में प्रमुख रूप से उठाया गया है।

भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो अतिरिक्त 25% पेनाल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई। ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है, जिससे व्यापार संबंधों में सुधार आ सके।