India-UAE Relation / सिर्फ 2 घंटे के लिए भारत आए UAE के राष्ट्रपति: पीएम मोदी के साथ इस 'गुप्त' मुलाकात के पीछे क्या है बड़ी वजह?

यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ाईद अल नाहयान की अचानक भारत यात्रा ने सबको चौंका दिया है। महज दो घंटे के इस दौरे में पीएम मोदी के साथ हुई बातचीत के क्या हैं मायने? क्या यह मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का संकेत है या फिर 100 अरब डॉलर के व्यापार की नई रणनीति?

दुनिया की नजरें उस वक्त ठहर गईं जब संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ाईद अल नाहयान अचानक भारत की धरती पर उतरे और यह कोई सामान्य राजकीय यात्रा नहीं थी बल्कि एक ऐसी मुलाकात थी जिसने कूटनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। महज दो घंटे के लिए भारत आए यूएई के राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद एयरपोर्ट पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच की गर्मजोशी और गले मिलने की तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारत और। यूएई के रिश्ते अब सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि पारिवारिक और रणनीतिक स्तर पर एक नई ऊंचाई छू रहे हैं।

दोस्ती की एक नई मिसाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल को किनारे रखते हुए अपने। 'भाई' का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट जाने का फैसला किया। यह कदम दर्शाता है कि भारत के लिए यूएई की अहमियत कितनी ज्यादा है और एयरपोर्ट पर दोनों नेताओं के बीच की केमिस्ट्री देखने लायक थी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि वे अपने भाई का स्वागत करने के लिए खुद वहां गए। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा दिखाती है कि शेख मोहम्मद बिन ज़ाईद भारत-यूएई की दोस्ती को कितना महत्व देते हैं और पीएम मोदी ने न केवल हिंदी और अंग्रेजी बल्कि अरबी भाषा में भी पोस्ट लिखकर यूएई के राष्ट्रपति के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया।

सिर्फ दो घंटे का सफर और बड़े मायने

अक्सर अंतरराष्ट्रीय दौरों में नेता कई दिनों का समय बिताते हैं लेकिन शेख मोहम्मद बिन ज़ाईद का यह दौरा सिर्फ 120 मिनट का था। सवाल उठता है कि आखिर दो घंटे में ऐसा क्या होने वाला है जिसके लिए इतनी बड़ी तैयारी की गई? जानकारों का मानना है कि जब दो देशों के शीर्ष नेता इस तरह की संक्षिप्त लेकिन सघन मुलाकात करते हैं तो उसके पीछे बहुत बड़े रणनीतिक उद्देश्य होते हैं। यह मुलाकात सोमवार शाम को हुई और इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति रवाना भी हो गए। इस छोटी सी अवधि में दोनों नेताओं ने भविष्य की योजनाओं और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की।

व्यापार और अर्थव्यवस्था का नया अध्याय

भारत और यूएई के बीच व्यापारिक संबंध आज अपने सबसे सुनहरे दौर में हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा 100 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच चुका है। यूएई भारत के लिए क्रूड ऑयल, एलएनजी और एलपीजी का एक प्रमुख सप्लायर है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यूएई का साथ होना अनिवार्य है। इस मुलाकात में व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और निवेश के नए रास्ते खोलने पर भी चर्चा हुई और भारत में यूएई का निवेश लगातार बढ़ रहा है और यह छोटी सी यात्रा उस भरोसे को और मजबूत करने वाली साबित होगी।

मिडिल ईस्ट की हलचल और भारत की भूमिका

वर्तमान में मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व में जिस तरह की अस्थिरता बनी हुई है उसे देखते हुए यह मुलाकात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इजरायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष और लाल सागर में बढ़ते तनाव के बीच। भारत और यूएई का एक साथ खड़ा होना वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा संदेश है। यूएई इस क्षेत्र में एक शांतिदूत की भूमिका निभाता रहा है और भारत के साथ उसके गहरे संबंध इस क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद कर सकते हैं।

अरबी में पैगाम और दिल जीतने की कोशिश

पीएम मोदी ने इस यात्रा के दौरान एक बार फिर अपनी सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल किया। उन्होंने अरबी भाषा में ट्वीट करके यूएई की जनता और वहां के नेतृत्व को यह संदेश दिया कि भारत उनके साथ खड़ा है और राष्ट्रपति बनने के बाद शेख मोहम्मद बिन ज़ाईद की यह तीसरी भारत यात्रा है। हर बार उनकी यात्रा ने दोनों देशों के बीच एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। पीएम मोदी के विशेष निमंत्रण पर आए राष्ट्रपति के साथ हुई यह बैठक आने वाले। समय में रक्षा, अंतरिक्ष और तकनीक के क्षेत्र में बड़े समझौतों की नींव रख सकती है।

SUBSCRIBE TO OUR NEWSLETTER