Uber ड्राइवरों को EV अपनाने की सलाह: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने की बड़ी अपील

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उबर (Uber) से अपने ड्राइवरों और फ्लीट मालिकों को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में बदलने में मदद करने की अपील की है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्लीन मोबिलिटी मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ और हरित परिवहन को बढ़ावा देना है।

भारत सरकार देश के परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से बढ़ावा देने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी क्रम में, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने प्रमुख राइड-हेलिंग कंपनी उबर (Uber) से एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक अपील की है। मंत्री ने कंपनी से आग्रह किया है कि वह अपने विशाल नेटवर्क से जुड़े ड्राइवरों और फ्लीट मालिकों को पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर स्थानांतरित करने में सक्रिय रूप से सहायता प्रदान करे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ और ग्रीन मोबिलिटी मिशन के व्यापक दृष्टिकोण का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में कार्बन उत्सर्जन को कम करना और टिकाऊ परिवहन समाधानों को अपनाना है।

क्लीन मोबिलिटी मिशन और ईवी का महत्व

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि आर्थिक रूप से भी ड्राइवरों के लिए फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ईवी चार्जिंग के लिए रूफटॉप सोलर (Rooftop Solar) का उपयोग करना एक अत्यंत सस्ता और लाभदायक विकल्प है। सरकार का लक्ष्य है कि परिवहन के साधनों को धीरे-धीरे हरित ऊर्जा की ओर ले जाया जाए, जिससे न केवल प्रदूषण में कमी आए बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना भविष्य की जरूरत है और इसमें बड़े कॉर्पोरेट घरानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उबर सीईओ के साथ उच्च स्तरीय बैठक

नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई वार्षिक बिजनेस समिट 2026 (CII Annual Business Summit 2026) के दौरान एक विशेष सत्र में प्रह्लाद जोशी ने उबर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक के दौरान, उन्होंने ईवी को व्यापक स्तर पर अपनाने और उपभोक्ताओं से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उबर दुनिया के सबसे बड़े परिवहन नेटवर्कों में से एक का संचालन करती है, और इसकी पहुंच लाखों ड्राइवरों और करोड़ों उपभोक्ताओं तक है। इसलिए, कंपनी की यह नैतिक और व्यावसायिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने ड्राइवरों और फ्लीट मालिकों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करे।

उपभोक्ता हितों और नियामक अनुपालन पर जोर

बैठक के दौरान केवल तकनीकी बदलावों पर ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों पर भी गहन चर्चा की गई। प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार के लिए ग्राहकों के हित और उनकी संतुष्टि सबसे ऊपर है। उन्होंने उबर प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए कि वे सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की गई सभी गाइडलाइन्स का पूरी तरह से पालन करें। इसके अतिरिक्त, मंत्री ने कंपनी को अपनी सभी आंतरिक प्रक्रियाओं का खुद ऑडिट (Self-Audit) करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं। सरकार का मानना है कि पारदर्शी प्रक्रियाएं ही उपभोक्ताओं का विश्वास जीतने में मदद कर सकती हैं।

सेल्फ ऑडिट और भविष्य की कार्ययोजना

मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बैठक के परिणामों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उबर ने अपनी प्रक्रियाओं का सेल्फ ऑडिट करने और उसके बाद सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, "मैंने उनसे साफ तौर पर कहा है कि उबर को अपने ड्राइवरों और वाहन मालिकों को ईवी में बदलने के लिए सपोर्ट करना चाहिए और इससे स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, उपभोक्ताओं के हित हमारे लिए सर्वोपरि हैं और " इस प्रकार, सरकार और निजी क्षेत्र के बीच यह सहयोग देश में स्वच्छ परिवहन और बेहतर उपभोक्ता सेवाओं की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।