मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अफ्रीका पर टिकी अमेरिका और चीन की नजरें, जानें क्या है रणनीति

मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच अमेरिका और चीन अफ्रीका की ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिका इरीट्रिया के साथ रणनीतिक संबंध सुधार रहा है, जबकि चीन ने 53 अफ्रीकी देशों के लिए जीरो टैरिफ का बड़ा फैसला लिया है। दोनों महाशक्तियां अपने आर्थिक और भौगोलिक हितों को साधने में जुटी हैं।

मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल युद्ध की वजह से स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। अरब क्षेत्र में युद्ध की स्थिति के बीच दुनिया की दो महाशक्तियां, चीन और अमेरिका, अपनी नजदीकी अफ्रीका महाद्वीप से बढ़ाने में लगे हुए हैं और अमेरिका अपने हितों के लिए रणनीतिक बदलाव कर रहा है और इस बार उसने अफ्रीकी देश इरीट्रिया को चुना है। अमेरिका इरीट्रिया पर लगे प्रतिबंधों को हटाकर उसका इस्तेमाल अपने रणनीतिक लाभ के लिए करना चाहता है। दूसरी ओर, चीन अफ्रीका के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

अमेरिका की रणनीतिक योजना और इरीट्रिया का महत्व

ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका बनी हुई है। ऐसी स्थिति में अमेरिका इरीट्रिया के साथ अपने संबंधों को सुधारने पर विशेष ध्यान दे रहा है और इरीट्रिया की भौगोलिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी सीमा रेड सी (Red Sea) से 700 मील से भी अधिक लगती है। वर्तमान में ईरान के साथ अमेरिका का सीधा तनाव चल रहा है और ईरान ने तेल के प्रमुख मार्ग, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने की धमकी दी है। इसके अतिरिक्त, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी रेड सी और बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandeb) स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दे रहे हैं। अमेरिका की योजना इरीट्रिया के साथ बेहतर संबंध बनाकर रेड सी में अपना प्रभाव बढ़ाने और ईरान के खिलाफ एक मजबूत बैकअप रणनीति तैयार करने की है।

चीन की आर्थिक रणनीति और जीरो टैरिफ का फैसला

चीन अपनी रणनीति के तहत आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता दे रहा है और अफ्रीका को अपना सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनाने में जुटा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में चीन-अफ्रीका व्यापार रिकॉर्ड 348 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें 17 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। चीन ने अफ्रीका को बड़ी व्यापारिक सहूलियत देते हुए मई 2026 से 53 अफ्रीकी देशों के सभी उत्पादों पर 'जीरो टैरिफ' लागू करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से अफ्रीकी सामान चीनी बाजार में सस्ता होगा, जिससे वहां के उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है।

वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में बदलाव और चीन की भूमिका

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के अफ्रीका आर्थिक आयोग (UNECA) के अधिकारी मेलाकु गेबोये ने वैश्विक आर्थिक स्थिति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है और उन्होंने कहा कि दुनिया की पुरानी आर्थिक व्यवस्था, जो लगभग 80 वर्षों से प्रभावी थी, अब भारी दबाव में है और पुराने नियम टूट रहे हैं। ऐसे समय में जब देश नए सिरे से रणनीतियां बना रहे हैं, चीन की यह खुली नीति अफ्रीका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सही समय पर आई मानी जा रही है।

मुख्य बिंदु और रणनीतिक उद्देश्य

चीन अपनी सॉफ्ट पावर के माध्यम से कच्चे माल की सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना चाहता है और साथ ही अपनी मशीनरी और ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए बाजार तलाश रहा है। अफ्रीका के साथ यह बढ़ती नजदीकी दोनों महाशक्तियों के लिए भविष्य की वैश्विक व्यवस्था में अत्यंत फायदेमंद साबित हो सकती है।